भारत सरकार ने आधार कार्ड को पूर्ण रूप निरस्त कर दिया जाना चाहिए। इससे लोगों को परेशानी के सिवाय कुछ नहीं है। क्या किसी की ग़लत जन्म तिथि का मनुष्य कोई लाभ मिलता है। मेरे अपने विश्लेषण के आधार पर मैं यह बात दावे के साथ कहता हूं कि 99% गलत जन्म दिवस के रिकार्ड व दस्तावेजों के कारण बुरे भाग्य, रोग व आये दिन के झगड़े फसादों का शिकार होते रहते हैं।
भारत सरकार ने आधार कार्ड को लाकर लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इसका केवल एक जबर्दस्त फायदा हुआ है करीब भारत की 75 प्रतिशत जनता को बिमारियों से ग्रस्त करने के कारण हर शहर, गांव में हस्पताल हर गली मोहल्ले में बन गये है़। क्योंकि गलत चीज को ठीक करना, हमारा सबका उत्तरदायित्व है लेकिन सरकार ने गलत को सही करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।अब लोग कहां जायें। एक सबसे बड़ा हथियार जनता के पास था जहां कानून की देखभाल में, अपराधी तत्व तक ठीक हो जाते हैं। परन्तु आधार कार्ड को सुप्रीम कोर्ट ने आदमी को तड़पा तड़पा कर मारने का हथियार बना दिया है।
यदि कोई किसी दूसरे की ग़लती का खामियाजा किसी निर्दोष को दण्ड देता है तो वह भारत सरकार व उसका आधार कार्ड है। कोई भी मुकदमे की अपील के लिए भी तीन मौके कानून देता है। लोकल न्यायालय,हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट । परन्तु जो गम्भीर मामला नहीं है बना दिया गया है उसे केवल एक चांस दिया गया है। इससे गंदा उदाहरण किसी भी कानून की किताब में नहीं मिलेगा। जब सरकार नागरिकता प्रमाण पत्र लेकर आ रही है तो इसकी जरूरत किसी भी प्रकार का औचित्य ही नहीं रह जाता है।
फिर सरकार का कानून गलत विषय वस्तु की पैरवी क्यों करने लग गया। आधार कार्ड में जब रिकार्ड गलत है और सरकार कहती हैं कि ठीक है, सरे आम सरकार गलत दस्तावेजों को आधार कार्ड की बिनाह पर ग़लत कार्य करवाने पर जनता को मजबूर कर दिया है। सारी जनता को सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर फिर से आधार कार्ड के नाम को बदल कर नागरिकता कम जन्म प्रमाणपत्र नाम से जारी करना चाहिए। जनता को कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाना चाहिए ताकि आराम से जन्म प्रमाण के सबूत सरकारी कार्यालयों से प्राप्त किए जा सके। ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जिसका नाम बर्थ व मृत्यु का रिकॉर्ड नहीं हो। हां यह हो सकता है कि उनका रिकॉर्ड पाकिस्तान व बंगला देश में हो। आजादी से पहले जन्मे लोग वहां से प्राप्त कर सकते हैं। अपने हलफनामे में स्वयं हस्ताक्षर से प्रमाणित स्टेटमेंट दे कर बनवा सकता है।
दुनियां में मां बाप बेटे को नहीं चाहते हैं, न बेटे बेटी मां बाप ही चाहते हैं। हर तरफ एक दूसरे पर इल्ज़ाम लगाते रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसका स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है कि गलत जन्म दिवस, समय का मनुष्य के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। लाखों रुपए के भंडारे,नग व टोने-टोटके आदि मनुष्य को ग़लत जन्म दिवस के दोष से मुक्ति दिलाने में शत-प्रतिशत नाकामयाब रहते हैं।
सारे डाक्टरों के हस्पताल छानने के बाद पुरा शरीर अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन,कलर डोपलर और एक्सरे मशीनों से छलनी हुआ शरीर लेकर, यमराज की अदालत में पहुंच जाते हैं। वहां कहते हैं कि पृथ्वी ग्रह के न्यायाधीशों ने हमारी बात नहीं सुनी। क्या आप बता सकते हैं मैं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पूछता हूं इस ब्लॉग के माध्यम से। क्या ग़लत जन्म तिथि के कारण हुए रोग , किसी मशीन से चित्रित होते हो। उनका इलाज क्या होगा । सरकार ने सरकारी कागजों में ग़लत प्रमाणित विषयों के अवलोकन की क्या विधा बनाई है जिससे लोगों के कष्ट दूर हो सके।
आपके ग़लत लेख के दण्ड को जो सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी बैठे हैं,इस जन्म में वे ठीक नहीं कर सकते हैं। इसका दण्ड भारत सरकार व न्यायमूर्ति न्यायाधीश को अगले जन्म में बहुत ही भंयकर रुप से भोगना पड़ेगा। सरकारी लेख व्यक्ति अपने लिए व्यक्तिगत रूप से नहीं लिखता है। अतः फिर सारा दंड सरकार चलाने वाले को भोगना पड़ता है।
सरकार से निवेदन है कि आधार कार्ड को समाप्त कर देना चाहिए। वैसे भी आदमी जहां जन्म लेता है वहां नहीं रहता है। आजकल तो बहुत मुश्किल है क्योंकि जन्म आप्रेशन टेबल पर होता है। वहीं वह अधिकार रहता है। पहले तो घर पर जन्म होने से जन्म सिद्ध अधिकार मिल जाता था। अब यह हो नहीं सकता है आप अजमा के देख लेना। सब लोग गांव छोड़ कर शहर की शरण में आ गए हैं। सबने अपने खेत क्यार तक बेच दिए हैं। इन आधार सरीखे गलत दस्तावेजों की वजह से।
हां कुछ लोग अपने तुझ फायदे के लिए जन्म तिथि बदल लेते हैं। परन्तु उसका व्यक्तिगत फायदा शायद ही किसी को हुआ हो। सुना है नरेंद्र मोदी की जन्म तिथि भी गलत है। उसने अपने बुरे हटाने के लिए कभी राम मंदिर तो कभी शिव मंदिर बनवाता फिरता है। अतः इस गंभीर मुद्दे पर तहेदिल से विचार कर बदलाव अवश्य लाये।