मां वह होती है मन का मीत
जिसके सबने गाये हैं रो- रो के गीत,
अंश का अपने जिसने बनाया है तुझको
कहता रहता है क्या दिया है तुने मुझको
खाना न खाया खुद, खिलाया तुझको
आंचल की ओट सुलाया है तुझको
संसार साथ दिया है उसने तुझको
मां के बिना तु क्या था बता खुद को
दुध का कर्ज फर्ज क्या दिखाया उसको
छांव का आंचल क्या लुटाया तुझको
मां , मां होती है जिसने मान दिया तुझको।
क्या सम्मान दिया तुने उसको। बेचारी का नाम दिया है उसको
तेरी बेपनाह मोहब्बत की झोली को कोटि कोटि नमन मेरा, एक दिन तू इस नर्क से भवन में तर जायेगी। मातृत्व का बोझ शायद तेरी दुनिया कभी सह नहीं पायेगी।
मातृत्व की हार्दिक शुभकामनाएं, हमेशा एक ऐसा योग्य संसार व संस्कृति दे जो जहां में रोशन करता रहे तुझको।

