मातृत्व दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

मां वह होती है मन का मीत

जिसके सबने गाये हैं रो- रो के गीत,

अंश का अपने जिसने बनाया है तुझको

कहता रहता है क्या दिया है तुने मुझको

खाना न खाया खुद, खिलाया तुझको

आंचल की ओट सुलाया है तुझको

संसार साथ दिया है उसने तुझको

मां के बिना तु क्या था बता खुद को

दुध का कर्ज फर्ज क्या दिखाया उसको

छांव का आंचल क्या लुटाया तुझको

मां , मां होती है जिसने मान दिया तुझको।

क्या सम्मान दिया तुने उसको। बेचारी का नाम दिया है उसको

तेरी बेपनाह मोहब्बत की झोली को कोटि कोटि नमन मेरा, एक दिन तू इस नर्क से भवन में तर जायेगी। मातृत्व का बोझ शायद तेरी दुनिया कभी सह नहीं पायेगी।

मातृत्व की हार्दिक शुभकामनाएं, हमेशा एक ऐसा योग्य संसार व संस्कृति दे जो जहां में रोशन करता रहे तुझको।

अपनापन होता है एक पराया

अपने ढूंढने निकला मैं , दिखे सब पराये

मां को तो मां कह लूं , उसने तो छोटे के लाड़ लड़ाये,

फिर सोचा बुआ,बहन है अपनी , उन्होंने जा अपने घर अपनायें।

चाचा, ताऊ देखें, वो सब खुद खाने को आये,

भाई, भतीजे देखें सब हो लिए पराये, बेटी को भी देखा उसने भी घर अपने लिए बनाए।

बेटे को जब देखा , उसने भी अपनी घरवाली के सहारे लिए अपनाए,

शेष बची थी पत्नी जिसने गले में हार थे पहनाये,

वो भी तो चली गई , बैकुंठ जा अपनाए

आगे पिछे देखने लगा कुछ भी ना बाकी पाये। सारी दुनियां देख ली सब के सब मिले पराये।

अपनापन जब लगा ढूंढने, खुद से बड़ा अपना मिला न कोए।

माता तक तो त्याग गई किस को सिर निवाए,

शत शत मातृत्व को नमन मेरा , जो मुझे इस जहां में लाये।

लाड प्यार दुलार त्याग दिए फिर भी हैं अपनायें

चिन्ता न कर उनकी सबकी, सब है पराये। शरीर तक तो साथ नहीं सब राख बने पाये।

अपना आपा रखिये जो होता नहीं पराये।

यदि आप योगासन करते हैं तो सावधान रहिए

योगासन व प्राणायाम शरीर को स्वस्थ व तनाव मुक्त रखने का एक बेहतरीन विकल्प है। जिसमें आपका समय के सिवाय कुछ खर्च नहीं होता है।

योगासन किसी अच्छे शिक्षक की देखरेख में ही करें। एक बार सिखने के बाद तो जिस समस्या का मैं उल्लेख करने जा रहा हूं बहुत कम चांस होते हैं लेकिन होते अवश्य है। अतः सावधान होकर योग सीखिये। कहीं ठीक होने की जगह बिमारी को ग्रहण न कर ले।

जब हम योग करते हैं तो शरीर के मुड़ने व सीधा होने के समय हमारा श्वसन तंत्र सही से व आपके नियंत्रण में होना चाहिए। आपका ध्यान कहीं नहीं भटकना चाहिए। शरीर को जब हम आगे झुक कर हाथों को पांवों से स्पर्श करने की क्रिया करते हैं तो हमारी सांस हमें धीरे धीरे छोड़नी चाहिए। जब सीधे खड़े होते समय धीरे धीरे सांस अंदर खींचें श्रऔर सीधा खड़े हो जाएं।

यदि हमारा ध्यान थोड़ा सा भी भटक गया तो सांसों की लय बिगड़ जाती है। यदि नीचे जाते समय सांस खींच ली तो, ययययआपको ऐसी बिमारी पैमक्षक्षक्षययदा हो यक्षृक्षक्षश्रृक्षजाएगी जिसका इलाज बहुत ृणश्रक्षश्रश्रश्र श्रृमश्रश्ररययहै। छोटी आंत का हिस्सा ऊपर की ओर ृतयसश्रश्रश्रररकी जाता है। इससे शश्ररररीर में लगातार दर्द बना रहता है किसी प्रकार की दवा काम नहीं करती है। पीलिया हो जाता है लेकिन दवा बेअसर हो जाती है। लोग भुत प्रेत का भी इलाज तर के तक जाते हैं किसी उपकरण की पकड़ में भी नहीं आती है।

इसका इलाज केवल योग के द्वारा ही सम्भव है परंतु कई बार शरीर कमजोर हो ने के कारणरश्ररश्रय योग करना मुश्किल होता है अतः सावधानी के साथ योगासन करें। अपने शरीर की श्वसन प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखें।

यदि किसी कारणवश, आप इस समस्या से ग्रक्षक्षययस्त हो। तो आप इसके इलाज के लिए निम्नलिखित पते पर संपर्क कर सकते हो।

सुरज भान लोहचब मौन

मकान नं 3446क्षयरक्षयश्रश्रश्रश्रक्षश्रश्रयक्षक्ष

हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी

सैक्टर 1,4 हिसार हरियाणा

मोबाइल 9485765519

ई मेल sblohchab19@gmai.com

अपनी समस्या इमेल भी कर सकते हैं।

रज्ञक्षयक्षक्षलरररयक्षक्षक्षधक्ष

समस्या हल करें

एक स्थान पर एक प्रश्नोत्तरी चल रही थी। वहां एक अनपढ़ व्यक्ति देखने चला गया और पूछा कि यहां क्या हो रहा है। एक लड़के ने कहा कि यहां सवाल जवाब पूछे जा रहे हैं। फिर उसने पूछा कि क्या मैं भी इसमें सवाल पूछ सकता हूं। लड़के ने कहा वहां स्टेज पर चल कर पूछ लो।

वहां जा कर उसने पूछा तो उन्होंने न हां कर दी और कहा कि पहले आप ही पूछ लो। उसने हंस कर कहा कि पहले आप ही बताओ स्टेज पर कुल सात सदस्य थे कमेटी के ,उसको शामिल करने से मना कर दिया।

प्रश्न:-

मेरे पास पच्चीस आदमी थे सबके सब काम पर चले गए,बताओ कितने शेष बचे।

क) शून्य ख) 25

ग) 7 घ) 8

सही उत्तर क्या है अपने उतर के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त करें । उत्तर इस पते पर भेजें

sblohchab19 @gmail. com

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क्या भारत की राजनीति की चरित्रहीनता समाप्त होगी या नहीं?

भारत की राजनीति का इतिहास गवाह है भारत के लोगों के ग़लत राजनीति निर्णयों का। इतिहास भरा पड़ा है राजनीति के अभद्र व्यवहार से। सतयुग से लेकर कलयुग तक भारत ही एक ऐसा देश है जहां अन्याय के सिवाय कुछ नहीं होता है।

सतयुग का अक्ष्य नारी के प्रति आकर्षण सतयुग को ले डुबा।

त्रेता पुत्राधिकार के प्रति अन्याय ने त्रेता को धराशाई कर दिया।

द्वापर युग को भाई भाई के प्रति अन्याय के फैसले ने सृष्टि का अन्त कर दिया था

अब कलयुग में हर प्रकार की चरित्रहीनता ने कलयुग को सृष्टि के अन्त की कहानी लिख दी है। कुछ दिन ही निकल रहे हैं दुनिया खत्म होने वाली है। दिल थाम के बैठ जाओ।

आगे आने वाले चुनावों में यह वोटिंग

ईवीएम को हटाकर बेल्ट पेपर पोलिंग होनी चाहिए

हाथ उठा कर स्विट्जरलैंड पद्धति पर चुनाव हो।

ईवीएम कम्बाइंड न हो कर हर पार्टी के उम्मीदवार के नाम पर ईवीएम हो। ताकि डाले गये वोटों से छेड़खानी की सम्भावना न रहे।

अलग अलग बेल्ट बाक्स हो

अपनी राय दें ।

भारतीय लोकतंत्र में अब राजनेता व नौकरशाह चरित्रहीनता की सीमायें लांघ चुके हैं

भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली का विश्लेषण किया जाये तो आपको केवल भ्रष्टाचार का नंगा नाच ही देखने को मिलेगा। ऐसा एक भी कार्य नहीं होता है जहां चरित्र हीनता मुंह बाय बोलती है। काम करना तो दूर की बात है। पहले तो लोग अपने दफ्तरों से गायब रहते हैं। यदि मिल भी जाए तो खाने को जोड़ते हैं। कुछ न कुछ बहाना बनाकर टरका देने के इलावा काम नहीं आता है।

केवल एक कार्य में,इतने निपुण हैं, दूसरे देशों में उन जैसे हेराफेरी करने वाले कहीं नहीं मिलेंगे। उपर लेकर नीचे तक बिना रिश्वत के कार्य करना वे अपराध समझते हैं। लोगों की समस्या सुनना व सुलझाना , उन्हें अपराध व श्राप लगता है। भारतीय जनता पार्टी के किसी राजनेता को बोलने की तमीज तक नहीं है। क्या अनाप शनाप बकते हैं। इलेक्शन रेलियों के फुटेज चैक कर सकते हो।

इलेक्शन परिणाम नाम मात्र का लाइव अपडेशन था। पोल सर्वे को दिखाया जा रहा था। न ही टीवी चैनल भी ऐसे बात कर रहे थे जैसे खरीदे लोग बात करते हैं कोई निष्पक्ष बात नहीं कर रहे थे। सब केवल रटी रटाई बात कर रहे थे।

बीजेपी सौ से नीचे थी। एकदम से 194 पर ले गए फिर वापस नीचे नहीं आई। जब टीएमसी की संख्या बढ़ी तो दफ्तरों में आग लगा दी। फर्नीचर तोड़ दिया गया, परन्तु पुलिस का नामोनिशान के नजर आया। शाम को टी म सी 203 पर दिखाई जा रही थी। परन्तु बीजेपी को जीता घोषित कर दिया। इसमें रिश्वतखोर अधिकारियों को करोड़ों रुपए देकर खरीदा गया होगा।

ईवीएम ए आई तकनीक पर आधारित है। जब वह स्वयं ब्यान कर रहा है।इसे हैक किया व बदला जा सकता है। देश के भीतर भी तथा देश के बाहर से तो बहुत ही आसानी से कास्टिंग बदल सकते हैं। जब आदमी वोट कास्ट करता है तो उसको तो जिसे वोट दिया दिखाई देगा । लेकिन कुछ सैकंड के बाद एक आइ जहां फिक्स किया गया है छप जाता है। इसी पद्धति से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है।।

यह तब तक जारी रहेगा,जब तक सीधा हाथ उठा वोट देने की परम्परा शुरू नहीं की जाएगी।या राजतंत्र वापस नहीं आयेगा।

गर्मी की तपन से रोग व बचाव के तरीके

मई का महीना व सूर्य देव के तेज ने मौसम को काफी गर्म बना दिया है। जैसे गर्मा गर्म खाना खाने से मुंह जल जाता है,उसी प्रकार शरीर भी तेज गर्मी से झुलस जाता है। गर्मी के इस प्रकोप से बचने के लिए हमें हतीहात बरतनी चाहिए। अधिक गर्मी के समय घर पर रहने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन काम पर जाने वाले लोगों को तो जाना ही होगा

अत: अपने बचाव के लिए घर में सामान उपलब्ध अवश्य करवा लें। आपके पास छाता, सिर ढकने को कपड़ा, पानी की बोटल जरुर साथ में रखें।सिर को कपड़े से ढक कर रखें। समय समय पर पानी पीते रहे। शरीर में पानी की कमी न होने दे। शरीर में लवण तत्वों की पूर्ति के लिए, पानी में नमक व चीनी मिला कर साथ ले।

किसी भी इमरजेंसी के लिए उपाय जरूर जानने चाहिए। ताकि अकेले होने पर अपने आप को सम्भाल सके। चक्कर आने की स्थिति में तुरन्त बैठ जायें। नहीं तो गिरने पर चोट लग सकती है।

गर्मी में पसीना अधिक आता है इससे चेहरे पर धूल मिट्टी जमने के कारण किल, मुहांसों की समस्या हो जाती है। अतः चेहरे को साफ रखें व कपड़े से ढक कर रखें। चेहरे पर नींबू के छिलके को रगड़ कर चेहरे की त्वचा को साफ रखें।

सिर दर्द होने के अवस्था में नींबू का शरबत पिये। सफेद रंग के कपड़े पहने। खुले कपड़े होने से गर्मी कम लगती है। टाइट कपड़ों का प्रयोग कम कर दें। जूतों की बजाय चप्पलों का प्रयोग करें। ताकि परों की गर्मी सिर में चढ़ कर , माइग्रेन की समस्या पैदा न कर दे। पैदल चलने की कोशिश कम करें।

अपना ख्याल रखिए व स्वस्थ रहिए।

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