अच्छा श्रोता बनने के लिए गुण

दूसरे को बोलने के लिए उत्साहित करें।

सवाल पूछे । यह हमारी दिलचस्पी को दिखाता है

वक्ता के बोलते समय रुकावट न डालें।

विषय न बदले ।

सम्मान व समझ का भाव दिखाये।

ध्यान से सुने।

इधर उधर ध्यान भटकाने वाली वस्तुओं से बचे।

अपने आपको दूसरों के स्थान पर रख कर विश्लेषण करें।

खुले विचारों वाला बनो। अपनी पहले से बनी धारणा को , दूसरे के विचारों में बाधा न बनाएं।

संदेश पर ध्यान दें,वह क्या कहना चाहता है।न कि उसके सलीके पर।

शारीरिक हरकतों से भाषा पहचाने। चहरे व नज़रों की भाषा से पहचानने की कोशिश करें। सबसे ज्यादा संदेश उसके शरीर की अभिव्यक्ति देती है। ग्रहण करें यदि सही है तो।

भावों को समझें , शब्दों के साथ।

ज्ञान प्रश्नोत्तरी

1 भारत की सबसे लंबी नदी कौन सी है?

क) यमुना ख) सतलुज

ग) गंगा घ) ब्रह्मपुत्र

2 1983 के क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम के कप्तान कौन थे?

क) सुनील गावस्कर ख) रवि शास्त्री

ग) कपिल देव घ) नवजोतसिंह सिद्धु

3 भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार क्या है?

क) पद्म भूषण ख) पद्म विभूषण

ग) भारत रत्न घ) नागासेश्य

4 हरियाणा की दुसरी राजकीय भाषा कौन सी है?

क) हिन्दी ख) अंग्रेजी

ग) तेलगु घ) तमिल

5 भारत की जनगणना कितने वर्षों में कराई जाती है?

क) 20 ख) 15

ग) 10 घ) 5

क्या भारत की राजनीति में यह घिनौनापन चलता रहेगा?

राजनेता की परिभाषा तोड़ फोड़ , गुंडागर्दी करना भारतीय राजनीति में कब तक चलेगा। भारत की जनता इन छुटभैय्ए नेताओं की झूठी बातों में फंस कर अपना भविष्य क्यों चौपट करते हैं।

जनता यदि नहीं समझी तो लोगों को राजनेता, अपना राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तक ही सीमित रखेंगे। उन्हीं से वोट लेते हैं, उन्हीं का सामान तुड़वाते है, उन्हें ही पुलिस से पिटवा देते हैं और उन्हीं की जेल करवा देते हैं। जनता को इनसे दूरी बना कर रखनी चाहिए। ये लोग राजा नहीं होते हैं। जिनके पास लोगों के दुःख दूर करने का प्रकृति प्रदत्त जन्म से अधिकार होता था। अब राजतंत्र भी नहीं है जिसमें अकेले को दोषी करार दिया जा सके।।

अपना ऐसे लोगों से बचाव रखना।ये बहुत खतरनाक होते हैं।

पांच राज्यों में किस पार्टी को हार सामना करना पड़ेगा

क बीजेपी ख कांग्रेस

ग टीएमसी घ एलडीएफ

ड़ यूडीएफ च असम गण परिषद

नाभि का अपने स्थान से खिसकना।

नाभि हमारे शरीर का मुख्य अंग है चिकित्सा विज्ञान में इसको कम महत्व दिया जाता है।इसी कारण से बहुत से लोग चिकित्सक की पहचान में नहीं आते हैं। वे संदेह के आधार पर दवा दे ते रहते हैं लेकिन मरीज को कुछ भी भर आराम नहीं मिलता है। डाक्टर तापमान बढ़ने के कारण एन्टीपायरेटिक दवा दे कर ,कह देते हैं, बुखार है उतर जायेगा। परन्तु यह धीरे-धीरे गम्भीर रूप धारण करता जाता है।

इसके लक्षण चार प्रकार के है तथा उदर जनित ज्यादा तर रोगों का कारण नाभि सरकने के कारण होता। अच्छी तरह डायग्नोसिस न होने बाद में क्रोनिक समस्या बन जाती है। इसके कारण सिस्टम में अवरोध पैदा हो जाती है। अंत में छेद तक हो जाते हैं। यह समझने के लिए क्रमबद्ध तरीके से विश्लेषण करना ज़रूरी है।

यहां मैं संक्षेप में बता रहा हूं कि नाभि ऊपर खिसकने के कारण शरीर में कब्ज की शिकायत पहला लक्षण होता है। उसके बाद शरीर में भारीपन के साथ में कमर दर्द होता है बाद में लिवर के हिस्से में दर्द रहने लगता है। पीलिया की शिकायत हो जाती है। बाद में गम्भीर दशा धारण कर लेता है।

यदि नीचे खिसका जाती है तो लूज मोशन हो जाते हैं। छोटी व बड़ी आंत कमजोर हो जाती है। पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। यदि बाई या दाई साईड में सरक जाती है तो किडनी खराब हो जाती है।

इसके सही जगह पर लाने को कई तरीके हैं । सही करने के समय कुछ सैकंड के लिए यहां भयंकर दर्द हो सकता है। परन्तु जैसे ही अपने स्थान पर आ जाती है दर्द एकदम से गायब हो जाता है। इसमें मैं दो तरीके बता रहा हूं। इनमें किसी दूसरे की मदद ले ने की जरूरत नहीं होती है। आप अकेले ही अपने स्थान पर ला सकते हो। तथा अपनी आंखों से चैक कर सकते हो।

पहला तरीका है । फर्श पर चटाई बिछाकर कर लेट जाओ। दोनों हाथ शरीर के साथ रखें। दोनों पांव एक दूसरे के साथ सके हुए हो। अब देखना है की किस और सरकी हुई है। यदि बाई ओर सरकी हो तोतो दायां पैर, यदि दाई ओर सरकी तो बांया पैर को से सही करना है। यह देखने के लिए कि नाभि किस ओर है आपको अपने शरीर की मिडियन लाइन को देखना है। यह हर शरीर में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। नाभि के ऊपर ध्यान दें जाये हलके रोयेंदार यह लाइन साफ बता देगी कि किस तरफ सरकी हुई है।

माना दाई तरफ सरक गई है। तो बातें पैर के ही पंजे को पगथली की ओर जोर से दबाते ताकि पैर के टेंडन में क्रेम्प पड़ जाये। कुछ सैकेंड दर्द को बाद अपने-आप समाप्त हो जायेगा । देखना मध्य लाइन नाभि के मध्य भाग में आ गयी हैं। नाभि के नीचे की लाइन भी उसकी सीधी लाइन में हो। यदि मध्य लाइन एक सीन में है तो आप दोनों पैरों को एक साथ में पंजे मिले हुए होने चाहिए, सीधे खड़े हो जाएं। तत्पश्चात कुछ खा ले ताकि वापस न सरक जाये। यह क्रिया तब तक करते रहना है जब तक, नाभि अपनी जगह पर स्थिर न हो जाये‌।

दूसरा तरीका है बहुत ही आसान लेकिन आपको दर्द कई देर तक सहना पड़ेगा। इसमें आपने अपने रोज मरा के काम आने वाले जूते का प्रयोग करना है। दोनों पैरों में जूते पहन ले , फिर जिस ओर नाभि सरकी है उससे दूसरी तरफ़ के पैर की पगथली के नीचे अपनी जुराब को रोल बना कर डाल लें ताकि नाभि सरकने के कारण फ्लैट फुट के समान हुए पैर को सही आकार में लाये। कुछ देर इधर उधर पहले आपको इसमें दर्द तो लगा यार होगा परन्तु कम होता जायेगा। जब दर्द कम हो जाये तो जूते निकाल दे। नाभि देखें कितनी सरकी है इसे आदत बना लीजिए। आपकी नाभि कभी नहीं सरकेगी। यह मेरी गारंटी है। आप पेट ही नहीं ज्यादा तर बिमारियों से छुटकारा पा लोगे।

अपने शरीर पर स्वयं प्रयोग करें। लेख कैसा लगा। आमजन के लिए फायदेमंद रहेगा। अपनी प्रतिक्रिया अवश्य लिखना।

आजकल का असाध्य रोग गाल स्टोन

रोग एक प्रकार का ठग होता है जो हमारे शरीर में व्याप्त होने दशा में, शरीर से कुछ न कुछ लूटता रहता है। चोर व डकैतों की तरह इन्हें मृत्यु दण्ड देना बहुत आवश्यक है नहीं तो कभी ये डकैतों के साथ हुए इनकाउंटर में आपको धराशाई कर सकते हैं। अतः उनको ठिकाने लगाना बहुत जरूरी है।

हमारे खान पान की बदौलत हमारे शरीर में कैल्शियम,फास्फोरस और आयरन जैसे कैमिकल अधिक मात्रा में लेने से या शरीर का पाचन तंत्र सही न होने के कारण, शरीर के लिवर, गाल ब्लैडर व मुत्र पिंड में पत्थर के गोलियां की भांति बन कर हमारे अक्सकिरेटरी सिस्टम में अवरोध पैदा कर देते हैं। इससे शरीर असहनीय दर्द होता है साथ में दूसरे लोग भी पैदा करवा देता है।

इसके इलाज के लिए दवाओं के साथ, हमारे खान पान में कैल्शियम की मात्रा वाले पदार्थो पर रोक लगा दी जाती है। कई शल्य क्रिया से भी गुजरना पड़ता है। सभी पद्धतियों में अपने तरीके से इलाज किया जाता है। सभी कारगर है केवल अंग को शल्य क्रिया को छोड़ कर। शल्य क्रिया में शरीर में कई बार दर्द बना रहता है।

होमियोपैथी में स्टोन को पिघला कर शरीर से बाहर किया जाता है। फिर दोबारा भी नहीं बनता हैं क्योंकि इसे अति सुक्ष्म मात्रा में दिया जाता है। लम्बे समय तक दवा का सेवन भी नहीं करना पड़ता है। बहुत ही अच्छी व कारगर औषधि इस पद्धति में उपलब्ध है। यदि किसी भाई बहन व बुजुर्ग को यह समस्या है तो इसके लिए निम्नलिखित पते पर संपर्क कर सकते हैं

डाक्टर सुरज भान लोहचब

मकान नं 3446 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी

सैक्टर 1 व 4 हिसार हरियाणा

मोबाईल नं : 9485765519

पर भी सम्पर्क कर अपनी तकलीफ़ दर्ज़ करवा कर दवा पूछ सकते हैं ताकि आने पर आपको ज्यादा समय न लगे। यदि मरीज चलने फिरने लायक नहीं है तो आप अपना पता व जानकारी दर्ज करवा दें। डाक्टर साहब आपके घर पर मरीज का चैक अप करने व दवा देने आ जायेंगे।

क्लिनिक का समय सुबह 9:30 से शाम 4:30 तक

मेरा उद्देश्य केवल रोगी का रोग दूर करना है इसी में मुझे अपार आनन्द आता है।

ज्ञान प्रश्नोत्तरी

निम्नलिखित प्रश्नों का सही विकल्प चुनें:-

1 चक्षु किसे कहते हैं?

क) हाथ ख) कन्धा

ग) आंख घ) अच्छी वस्तु

2 यदि आप को लू लग जाती है तो क्या होता है?

क) सिर दर्द ख) चक्कर आना

ग) पानी की कमी घ) बुखार आना

3) पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है?

क) 24 डिग्री ख) 36 डिग्री

ग) 90 डिग्री घ) 180 डिग्री

4 यदि आप सूर्य प्रणाम करते हैं तो आपके हाथ किस दशा की ओर होंगे?

क) उत्तर ख) दक्षिण

ग) पश्चिम घ) पूर्व

5 यदि आप अपने स्थान से चलते हैं तो पहले कौन सा पैर आगे चलता है?

क) बायां पैर ख) कोई सा भी नहीं

ग) दायां पैर घ) दोनों पैर

आपके शरीर से कभी भी न लूटी जाने वाली वस्तुओं के बारे में पढ़ कर कैसा लगा, क्या यह आपके के लिए उपयोगी है अपनी प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति अवश्य करें ताकि हमारे मनोबल बढ़ाने के साथ आपकी मदद करने में हमें भी आनन्द आये।

सफलता का रहस्य

सदा मुस्कराना और सबकों प्यार करना

गुणी लोगों का सम्मान करना

बच्चों के दिल में रहना

सभी आलोचकों से स्वीकृति पाना

झूठे दोस्तों की दगाबाजी को सहना

खुबसूरती को सराहना

दूसरों में खूबियां ढूंढना

किसी उम्मीद के बिना

दूसरों के लिए खुद को अर्पित करना

उत्साह के साथ खेलना व हंसना

और मस्ती भरे तराने गाना,

इस बात का अहसास कि।

आपकी ज़िन्दगी ने किसी एक आदमी का

जीवन सफल बनाया

यही। सच्ची सफलता है।

आदमी को हमेशा दूसरों के लिए जीने की आदत बना लेनी चाहिए। जीवन ही दूसरों के लिए कार्य करने का नाम है। क्या इसमें सच्चाई है, अपनी राय खुल कर देना ताकि लेखक का मनोबल लिखने के बना रहे।

ज्ञान दर्शन प्रश्नोत्तरी के सही उत्तर दीजिए?

ज्ञान दर्शन प्रश्नोत्तरी के निम्न लिखित प्रश्नों से अपना ज्ञान बढ़ाइये :-

1 संसद सदस्य बनने की न्यूनतम आयु क्या है?

क) 25 वर्ष ख) 40 वर्ष

ग) 35 वर्ष घ) 21 वर्ष

2 इंडिया गेट कहां स्थित है?

क) बम्बई ख) कलकत्ता

ग) मद्रास घ) दिल्ली

3 सतपुड़ा पर्वत कहां पाया जाता है?

क) झारखंड ख) हिमाचल प्रदेश

ग) असम घ) मध्य प्रदेश

प्रश्नों के सही देकर बताये कि प्रश्नोत्तरी आपको कैसी लगी, अपनी टिप्पणी अवश्य करें। ताकि आपके ज्ञानवर्धन के लिए अच्छे व कठिन प्रश्नों के हल आपको मिल सके।

आधार विहिन अर्थ व्यवस्था

क्या कोई वस्तु या व्यवसाय, व्यवस्था आधार के बिना चल सकती है। इसका सीधा सा मतलब है नहीं। आधार के बिना कोई चीज टिक नहीं सकती है। पेंडुलम की तरह इधर उधर घूमती रहती है बिना उद्देश्य के। अर्थ व्यवस्था के विषय में भी लागू होता है। कोई भी अर्थ व्यवस्था बिना आधार के विकास की गति नहीं पकड़ती है। वह चरमरा कर ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती है।

भारतीय अर्थ व्यवस्था के दो आधार स्तम्भ थे।अब दोनों ही गायब हो गए हैं। उसी तरह यह अर्थ व्यवस्था भी गायब हो जायेगी , जैसे पुरानी अर्थ व्यवस्था ढूंढे नहीं मिलती हैं। टक्का, दमड़ी,धेला, पाई इत्यादि। क्योंकि उनकी मूलभूत आधार की कोई कीमत नहीं बची थी महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि लाखों पाई में कुछ नहीं आता था।

अब रुपए की बारी है, पैसा पहले ही गायब हो चुका है। जो अर्थ व्यवस्था का मूल स्तम्भ था। इसका जीता जागता उदाहरण है भूमि के रेट, जो भूमि पहले 5 पैसे में एक एकड़ आती थी अब उसके भाव प्रति एकड़ 485000000 रुपए है। रुपए की कीमत अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में शून्य होने वाली है। 1 रुपया भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल है लेकिन यदि आप एक रुपए का सामान खरीदने बाजार में देश के किसी भी हिस्से में चले जाना कुछ भी मिलेगा। आधार खत्म कर दिया है। यदि एक रुपए में एक किलो सोना मिलता तो भारतीय अर्थव्यवस्था को आधार मिल जाता। परन्तु 1 रुपए में तो 1 मिली ग्राम सोना नहीं मिलता है। कुछ समय बाद देश में मारा मारी की स्थिति होने वाली है। वस्तु एक और खरीददार एक करोड़।

इस स्थिति से निपटने के लिए नहीं अर्थ व्यवस्था लागू करनी होगी। रुपए की जगह मानव करेंसी लागू करनी पड़ेंगी। इसकी छोटी इकाई जीव करनी पड़ेगी। एक मानव = एक करोड़ जीव होगें। फिर अर्थव्यवस्था करोड़ों वर्षों तक सुदृढ़ बनी रहेगी। एक जीव में सारी दुनिया का सामान खरीदा जा सकता है।

आपको मेरा सुझाव कैसा लगा। अपनी टिप्पणी अवश्य करें।

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