मंहगाई के इस दौर में यदि तुम्हारा कोई बिना छल कपट , रुपए , पैसे के बगैर तत्परता से एक सुदृढ़ साथी व सहयोगी के समान साथ देने वाला है तो केवल साईकिल ही है। मंहगाई के इस समय में बिना किसी चिन्ता के अपने गन्तव्य तक सम्मान सहित वैभव व शालिनता के साथ पहुंचापढ़ना जारी रखें “साईकिल तुझे सलाम”
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संतों की पहचान
हिजड़े व भिखारी कभी भी सन्त नहीं होते हैं। वे केवल गन्दीं आदतों का जखीरा होते हैं। उनकी एक मात्र पहचान है कि वे अहंकारी होते हैं। सन्त को कभी भी गेरवे व भगवा वस्त्र धारण करते हैं। दिमागी तौर पर पूर्ण रूप से शीतल मानसिकता के होते हैं। एक माता पिता की शालीन गृहस्थपढ़ना जारी रखें “संतों की पहचान”
यह देश का दुर्भाग्य है कि
भारत देश का दुर्भाग्य है कि यहां के अधिकारियों को गिनती करना नहीं आता है। हर बार बेल्ट पेपर से चुनाव के नतीजों में सारे हुए को रुपयों व गुण्डों के बल पर जीता दिया जाता था। फिर आई वोटिंग मशीन तकनीकी की सौगात को देवियों की शक्ति ने इतना बदनाम कर दिया है वेपढ़ना जारी रखें “यह देश का दुर्भाग्य है कि”
लड़ाई का मतलब क्या
लड़ाई का मतलब क्या लड़ आई या लड़ गई होता है। अपने आई क्यू के मुताबिक उतर दिजिये। हमें आपकी राय का इन्तजार है।
भारतीय जनता पार्टी को समाप्त करना
भारतीय जनता पार्टी को समाप्त करना कांग्रेस पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी है क्या आप मेरी इस बात से सहमत हैं अपनी बेखौफ राय अवश्य लिखें। ताकि आने वाले भविष्य की चुनौतियों को सही प्रकार से निपटाया जा सके।
इतना दौलत का क्या करोगे
क्या आप दुनियां को बता व समझा सकते हो क्या, इतना दौलत का क्या करोगे का क्या अर्थ है ताकि हर आदमी समझदार बने।
निम्नलिखित पंक्ति लिखे शब्दों का अर्थ लिखो।
बकरिशेरदिये =? अपने ज्ञान की प्रकाष्ठा अपने ज्ञान से तोलिए।
क्या भारत की जनता बता सकती है?
मैं भारत की जनता से प्रश्न पूछ रहा हूं सच्चे मन से सच्चाई के साथ बताना । जो जनता रुपयों की भूखी है। आज से 15 वर्ष पहले तक रुपए के किसी प्रकार से जो आपा धापी आज मची है पहले नहीं थी। आपको क्या ज्ञात है पहले क्यों नहीं थी पहले रुपए पर पशुओंपढ़ना जारी रखें “क्या भारत की जनता बता सकती है?”
हादशों का देश भारत, हकीकत नदारद
भारत में आये दिन अजीबोगरीब हादसे व परिस्थितियां पैदा होती नहीं है पैदा की जाती है, केवल लूट खसोट करने के लिए। सरकारी तंत्र केवल अय्याशी का अड्डा बना हुआ है। उन्हें अपनी ड्यूटी तक का पता नहीं है कि उनकी ड्यूटी है क्या। पुलिस में तो 75 प्रतिशत नकली वर्दी पहने डकैत हैं। पुलपढ़ना जारी रखें “हादशों का देश भारत, हकीकत नदारद”
बढ़ती मंहगाई की मार
बढ़ती महंगाई की मार को कम करने के लिए सरकारी तंत्र का पूर्ण रूप से विरोध प्रदर्शन करें। किसी भी प्रकार के वाहन की खरीद व व्यक्तिगत प्रयोग न करें। हमेशा पैदल चलने का संकल्प करें। किसी प्रकार की अनावश्यक वस्तु की खरीद न करें। जहां भाव बढ़े, वहां से कोई खरीददारी न करें। जनतापढ़ना जारी रखें “बढ़ती मंहगाई की मार”
