भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली का विश्लेषण किया जाये तो आपको केवल भ्रष्टाचार का नंगा नाच ही देखने को मिलेगा। ऐसा एक भी कार्य नहीं होता है जहां चरित्र हीनता मुंह बाय बोलती है। काम करना तो दूर की बात है। पहले तो लोग अपने दफ्तरों से गायब रहते हैं। यदि मिल भी जाए तो खाने को जोड़ते हैं। कुछ न कुछ बहाना बनाकर टरका देने के इलावा काम नहीं आता है।
केवल एक कार्य में,इतने निपुण हैं, दूसरे देशों में उन जैसे हेराफेरी करने वाले कहीं नहीं मिलेंगे। उपर लेकर नीचे तक बिना रिश्वत के कार्य करना वे अपराध समझते हैं। लोगों की समस्या सुनना व सुलझाना , उन्हें अपराध व श्राप लगता है। भारतीय जनता पार्टी के किसी राजनेता को बोलने की तमीज तक नहीं है। क्या अनाप शनाप बकते हैं। इलेक्शन रेलियों के फुटेज चैक कर सकते हो।
इलेक्शन परिणाम नाम मात्र का लाइव अपडेशन था। पोल सर्वे को दिखाया जा रहा था। न ही टीवी चैनल भी ऐसे बात कर रहे थे जैसे खरीदे लोग बात करते हैं कोई निष्पक्ष बात नहीं कर रहे थे। सब केवल रटी रटाई बात कर रहे थे।
बीजेपी सौ से नीचे थी। एकदम से 194 पर ले गए फिर वापस नीचे नहीं आई। जब टीएमसी की संख्या बढ़ी तो दफ्तरों में आग लगा दी। फर्नीचर तोड़ दिया गया, परन्तु पुलिस का नामोनिशान के नजर आया। शाम को टी म सी 203 पर दिखाई जा रही थी। परन्तु बीजेपी को जीता घोषित कर दिया। इसमें रिश्वतखोर अधिकारियों को करोड़ों रुपए देकर खरीदा गया होगा।
ईवीएम ए आई तकनीक पर आधारित है। जब वह स्वयं ब्यान कर रहा है।इसे हैक किया व बदला जा सकता है। देश के भीतर भी तथा देश के बाहर से तो बहुत ही आसानी से कास्टिंग बदल सकते हैं। जब आदमी वोट कास्ट करता है तो उसको तो जिसे वोट दिया दिखाई देगा । लेकिन कुछ सैकंड के बाद एक आइ जहां फिक्स किया गया है छप जाता है। इसी पद्धति से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है।।
यह तब तक जारी रहेगा,जब तक सीधा हाथ उठा वोट देने की परम्परा शुरू नहीं की जाएगी।या राजतंत्र वापस नहीं आयेगा।
