संयुक्त राष्ट्र संघ में राम मन्दिर

राजा राम का चित्र संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यालय में भी होना चाहिए । वे सम्पूर्ण भूमण्डल के राजा होने के साथ , त्रिलोकी के नाथ थे। किसी भी देश को इसमें एतराज नहीं होना चाहिये। अपनी राय दे, विश्व शान्ति के लिये।

क्या आप बता सकते हैं

  क्या आपको जानकारी है कि राजा राम कहां के राजा थे यदि पता है तो उनका राज्य कितना बड़ा था। उसकी सीमाएं किस राज्य तक थी। इसकी जानकारी अवश्य लिखना। क्यों कि आजकल के नेताओं व पंडितों ने उन्हें कुछ ही फीट से कुछ गज भूमि तक ही सीमित कर दिया है।

                 राजा राम त्रिलोकी विजेता महाराज दशरथ के पुत्र थे। त्रिलोकी विजय की तब वे अयोध्या के राजा थे। फिर अश्व मेघ के घोड़ा छोड़ कर सम्पूर्ण भू मण्डल पर अपना राज कायम कर लिया था। वे चक्रवर्ती सम्राट बने थे। यानि पूरी पृथ्वी पर उनका राज्य था।

                 जब उनकी मृत्यु कारण महारानी कैकेई व मंथरा दासी बनी तो उन्होंने ने भरत को केवल उत्तर प्रदेश के एक जिले का राज नहीं सोपा था पूरी पृथ्वी का राज दिया था। वहीं राज राजा भरत ने राजा राम को दे दिया था। वे पूरी पृथ्वी के राजा थे। रावण वध के बाद तो वह चक्रवर्ती सम्राट बने थे।

                  लेकिन भारत सरकार ने उन्हें व उनके राज्य को कुछ एकड़ भूमि में बांध दिया है। आज की पूरी अयोध्या नगरी भी नहीं दी है कहते हैं अपने को राम भगत। उनके बैगर वे पूरी पृथ्वी पर पुजनीय थे। अब केवल भारत के छोटे से भूखण्ड में समेट दिया है। क्या यह उचित कदम है। उनकी पूजा तो अभी भी त्रिलोकी नाथ के रूप में ही होती है।

                  अपनी राय देना।

बार बार थूक आना और बाहर थूकना

यदि आप को बार बार बहुत मात्रा में दूध बनता है और उसे बाहर थूकना पड़ता है तो यह आपके लिए बहुत नुक्सानदायक है तथा एक गंदी आदत भी शरीर में घर कर जाती है। लोगों की दृष्टि में आप घृणा के पात्र बन जाते हैं। शारीरिक मानसिक क्रिया भी ग़लत होने लग जाती है। जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

थूक बनना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अतिआवश्यक है। लेकिन यदि अधिक थूक बनता है इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में टोक्सिन की मात्रा ज्यादा उत्पन्न होने लगी है। जो शरीर के पाचन तंत्र को नुक्सान पहुंचाने के फिराक में है। इसके प्रतिकुल प्रभाव को रोकने के लिए ही अधिक थूक का निर्माण मुंह में होना शुरू हो गया है।

थूक लार का ही हिस्सा हैं जिसमें इंजाईम होते हैं जो हमारे भोजन को पचाने में सहायक होते हैं। थूक खाना आसानी से निगलने में मदद करता है। यदि थूक न बने तो खाना निगलना मुस्किल हो जाता है। यदि थूक कम बनता है तो पेट में जलन व गैस की समस्या, पेप्टिक अल्सर कारण बन जाता है। सेहत दिन प्रतिदिन गिरती जाती है। शरीर में खाया पिया नहीं लगता है।

  इस समस्या का निदान बिना दवा दारु के पूर्ण से सम्भव है। न ही दवा के प्रतिकूल प्रभाव का डर रहता है। न आपको किसी डॉक्टर व वैद्य के पास जाने की आवश्यकता होती है। आगे जो उपाय बताए रहा हूं उसे डाक्टर व वैद्य भी कर सकते हैं या अपने मरीजों को सलाह दे सकते हैं। यह एक योग क्रिया है। इसका प्रभाव में दिन नहीं लगते हैं। केवल १ सैंकंड में पूर्ण प्रभाव देखा जा सकता है।

आप इस क्रिया को किसी समय तथा एक दो से लेकर कितनी बार व कहीं भी, चलते फिरते, उठते बैठते या योग की तरह समय निकाल कर सकते हो। इसमें आपको केवल यही एक काम करना पड़ता है आप जहां जिस अवस्था में हो , यदि अधिक थूक बन रहा व आप को उसे निगलने की बजाय थूकने की इच्छा होती है तो आप अपने पैरों की उंगलियों को मोड़ लेना जितना भी मुड़ती है चाहे जूते पहने हुए हो। जूतों को पहने पहने उंगलियों को मोड़ लेना है। जैसे ही उंगली मुड़ी उसी सैंकड थूक पेट में चला जायेगा।

आपकी थूकने की गंदी आदत तो छूट जाएगी। उससे बड़ी बात यह है कि आपके उदर जनित रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। आपका स्वास्थ्य बिना किसी टोनिक के ठीक होना शुरू हो जाएगा। आप रोज मरा की गैस बनना व पैप्टिक अल्सर से बच जाओगे। पेट में अधिक बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक अम्ल न्युट्रीलाइजड हो जायेगा। आपकी समस्या समाप्त हो जायेगी।

अपना जीवन संवारने के लिए

  हर किसी को यह इच्छा रहती है कि वह हमेशा स्वस्थ रहें, वह किसी भी रोग यानि शरीर से उसकी शक्ति लूटने वाले ठगो से बचा रहे। परन्तु ये इतने शातीर होते हैं कि किसी न किसी प्रकार शरीर के अंगों की शक्ति कम कर , उन्हें कमजोर कर देते हैं। फिर वह कमजोरी धीरे धीरे बढ़ती जाती है और आगे चल कर एक भयानक रोग का रूप धारण कर हमें तंग करने लगती है। कभी कभी तो असाध्य रोग में परिणित हो जाती है।उसका उग्र रूप असहनीय होता है।

इससे बचने के लिए एक बहुत ही शानदार और बिना किसी प्रकार के खर्च का उपाय है बस इसमें आपको अपनी सामंजस्य शक्ति संजोकर व एकाग्र कर कुछ शारीरिक क्रियाएं करनी होती है उसके बाद ये ठग आपके शरीर के पास नहीं फटक सकते हैं।आपको नियमित रूप से आदत बना कर इन क्रियाओं को एक दो मिनट के लिए करना पड़ता है। यदि आप इस विद्या में बंध गए तो आप की पौ बारह। कोई रोग आपको नहीं बतायेगा। और आप चैन की जिंदगी जी सकते हो

                 आपको अपने आज्ञा चक्र को जाग्रत करना है। उसके लिए आपको केवल एक दो मिनट ही ध्यान एकाग्र कर योग मुद्रा में बैठना है। और जो चित्र दिया है उसे बिना पलक झपकाते एकटक चक्कर के मध्य में ध्यान केंद्रित करना है। इससे सारी शक्ति एक स्थान आज्ञा चक्र में समाहित हो जायेगी। आपका शरीर पूर्णतः आपके नियंत्रण में आ जायेगा। आपके अंग प्रत्यग आप की इच्छा अनुसार कार्य करना शुरू कर देंगे। अब आप या कोई मनुष्य रोग , ठीक बिमारी , तकलीफ़ व कष्ट नहीं चाहते हैं।

                   जब आप चाहेंगे ही नहीं तो आपके शरीर द्वारा कष्ट व रोग  नकार दिया जाएगा । तो ये दुःख दर्द आप के पास तक नहीं फटकने नहीं देंगे वो आप निरोगी हो जाओगे। आप हर रोज प्रातः दो मिनट अपने लिए अवश्य निकाल कर कर यह योग क्रिया जरूर करें। जीवन जीने के लिए शरीर अनमोल निधि है। इसको व्यर्थ के व्यसनों में भूला कर, इस मुल्यवान धरोहर को नष्ट न करें। आशा करता हूं यह बिना खर्च का उपाय अवश्य आजमाएंगे और स्वस्थ जीवन अपनाएंगे।

अपना जीवन संवारने के लिए

  हर किसी को यह इच्छा रहती है कि वह हमेशा स्वस्थ रहें, वह किसी भी रोग यानि शरीर से उसकी शक्ति लूटने वाले ठगो से बचा रहे। परन्तु ये इतने शातीर होते हैं कि किसी न किसी प्रकार शरीर के अंगों की शक्ति कम कर , उन्हें कमजोर कर देते हैं। फिर वह कमजोरी धीरे धीरे बढ़ती जाती है और आगे चल कर एक भयानक रोग का रूप धारण कर हमें तंग करने लगती है। कभी कभी तो असाध्य रोग में परिणित हो जाती है।उसका उग्र रूप असहनीय होता है।

                  इससे बचने के लिए एक बहुत ही शानदार और बिना किसी प्रकार के खर्च का उपाय है बस इसमें आपको अपनी सामंजस्य शक्ति संजोकर व एकाग्र कर कुछ शारीरिक क्रियाएं करनी होती है उसके बाद ये ठग आपके शरीर के पास नहीं फटक सकते हैं।आपको नियमित रूप से आदत बना कर इन क्रियाओं को एक दो मिनट के लिए करना पड़ता है। यदि आप इस विद्या में बंध गए तो आप की पौ बारह। कोई रोग आपको नहीं बतायेगा। और आप चैन की जिंदगी जी सकते हो

                 आपको अपने आज्ञा चक्र को जाग्रत करना है। उसके लिए आपको केवल एक दो मिनट ही ध्यान एकाग्र कर योग मुद्रा में बैठना है। और जो चित्र दिया है उसे बिना पलक झपकाते एकटक चक्कर के मध्य में ध्यान केंद्रित करना है। इससे सारी शक्ति एक स्थान आज्ञा चक्र में समाहित हो जायेगी। आपका शरीर पूर्णतः आपके नियंत्रण में आ जायेगा। आपके अंग प्रत्यग आप की इच्छा अनुसार कार्य करना शुरू कर देंगे। अब आप या कोई मनुष्य रोग , ठीक बिमारी , तकलीफ़ व कष्ट नहीं चाहते हैं।

                   जब आप चाहेंगे ही नहीं तो आपके शरीर द्वारा कष्ट व रोग  नकार दिया जाएगा । तो ये दुःख दर्द आप के पास तक नहीं फटकने नहीं देंगे वो आप निरोगी हो जाओगे। आप हर रोज प्रातः दो मिनट अपने लिए अवश्य निकाल कर कर यह योग क्रिया जरूर करें। जीवन जीने के लिए शरीर अनमोल निधि है। इसको व्यर्थ के व्यसनों में भूला कर, इस मुल्यवान धरोहर को नष्ट न करें। आशा करता हूं यह बिना खर्च का उपाय अवश्य आजमाएंगे और स्वस्थ जीवन अपनाएंगे।

अपना जीवन संवारने के लिए

  हर किसी को यह इच्छा रहती है कि वह हमेशा स्वस्थ रहें, वह किसी भी रोग यानि शरीर से उसकी शक्ति लूटने वाले ठगो से बचा रहे। परन्तु ये इतने शातीर होते हैं कि किसी न किसी प्रकार शरीर के अंगों की शक्ति कम कर , उन्हें कमजोर कर देते हैं। फिर वह कमजोरी धीरे धीरे बढ़ती जाती है और आगे चल कर एक भयानक रोग का रूप धारण कर हमें तंग करने लगती है। कभी कभी तो असाध्य रोग में परिणित हो जाती है।उसका उग्र रूप असहनीय होता है।

                  इससे बचने के लिए एक बहुत ही शानदार और बिना किसी प्रकार के खर्च का उपाय है बस इसमें आपको अपनी सामंजस्य शक्ति संजोकर व एकाग्र कर कुछ शारीरिक क्रियाएं करनी होती है उसके बाद ये ठग आपके शरीर के पास नहीं फटक सकते हैं।आपको नियमित रूप से आदत बना कर इन क्रियाओं को एक दो मिनट के लिए करना पड़ता है। यदि आप इस विद्या में बंध गए तो आप की पौ बारह। कोई रोग आपको नहीं बतायेगा। और आप चैन की जिंदगी जी सकते हो

                 आपको अपने आज्ञा चक्र को जाग्रत करना है। उसके लिए आपको केवल एक दो मिनट ही ध्यान एकाग्र कर योग मुद्रा में बैठना है। और जो चित्र दिया है उसे बिना पलक झपकाते एकटक चक्कर के मध्य में ध्यान केंद्रित करना है। इससे सारी शक्ति एक स्थान आज्ञा चक्र में समाहित हो जायेगी। आपका शरीर पूर्णतः आपके नियंत्रण में आ जायेगा। आपके अंग प्रत्यग आप की इच्छा अनुसार कार्य करना शुरू कर देंगे। अब आप या कोई मनुष्य रोग , ठीक बिमारी , तकलीफ़ व कष्ट नहीं चाहते हैं।

                   जब आप चाहेंगे ही नहीं तो आपके शरीर द्वारा कष्ट व रोग  नकार दिया जाएगा । तो ये दुःख दर्द आप के पास तक नहीं फटकने नहीं देंगे वो आप निरोगी हो जाओगे। आप हर रोज प्रातः दो मिनट अपने लिए अवश्य निकाल कर कर यह योग क्रिया जरूर करें। जीवन जीने के लिए शरीर अनमोल निधि है। इसको व्यर्थ के व्यसनों में भूला कर, इस मुल्यवान धरोहर को नष्ट न करें। आशा करता हूं यह बिना खर्च का उपाय अवश्य आजमाएंगे और स्वस्थ जीवन अपनाएंगे।

मोदी सरकार का स्वस्थ भारत

 भारत की सरकार जो संविधान की परिभाषा के अनुसार भारत की जनता की सरकार होती है। लेकिन आज कल संविधान की परिभाषा अप्रत्यक्ष रूप से बदल दी है नेताओं ने व भारतीय जनता ने। आपको जानकर हैरानी तो होगी लेकिन आप भी अनुसरण उसी भाषा का करते हैं। अब भारत सरकार ने होकर मोदी सरकार हो गई है। तथा जानी भी इसी नाम से।

                  अब मोदी कहें या भारत सरकार कहें, फर्क बहुत पड़ता है। भारत सरकार में सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी होती थी किसी भी कानून को अमली जामा पहनाने की। मोदी सरकार में यह जिम्मेदारी मोदी व उनके संसद सदस्यों की और जवाबदेही भी। किसी कानूनी व सही तरह से कार्यों के करवाने की। परन्तु हकिकत में आज कानून नाम की कोई वस्तु बची नहीं। केवल रूपयों को लूटने ने तक सरकार का कर्तव्य। बन कर रह गया है। हर कार्यलय में रिश्वत के बिना कोई कार्य नहीं होता है।

                   बचे हुए कर्मचारी सड़कों पर चक्का जाम कर अपनी ड्यूटी करते नजर आते हैं। किसी दफ्तर में अपनी कुर्सी पर कोई नजर नहीं आता है। अब विषय पर आते हैं। स्वस्थ भारत के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन वह सब कार्य करने को न होकर सरकारी अधिकारी व नेताओं की जेब गर्म करने तक समाप्त हो जाता है। सफाई कर्मचारी की पेमेंट के लिए रुपए सरकार के पास नहीं है। हर जगह गंदगी के ढेर चारों ओर नजर आतें हैं। एक वर्ष हो गया है सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर आते। 

                    मोदी  व खट्टर सरकार ने कानून को दूरस्त करने की बजाय स्वयं को दूरस्त करने पर जुटे हुए हैं। हर आफिस में खुले तौर पर काम करवाने की रिश्वत  मांगी जाती है। नहीं दी तो आप का काम किसी भी जन्म न हो ने तक के हालात है। लोग टैक्स के साथ सफाई कर्मचारी को रिश्वत दे कर कार्य करवाने को मजबूर हैं। पता नहीं भारत की जनता कब सीखेंगी भारत के नेता लोगों इमानदारी का पाठ पढ़ाना। यदि यह सरकार फिर आई तो उनके स्वास्थ्य प्रोग्राम के कारण गंदगी के पहाड़ व करोना जैसी महामारी फिर चुनाव परिणाम के साथ भारत में दर्शन देगी। यह इस सरकार का शायद पहला मुद्दा है। ताकि हर हस्पताल में मरीजों की जन संख्या में वृद्धि कर सके।

                    इस सरकार के पास वृद्धि के एजैंडा के सिवाय कोई और मसौदा नहीं है। हर वस्तु की वृद्धि खतरनाक होती है। BJP के पास जनसंख्या वृद्धि, मरीजों व बिमारियों की वृद्धि , कुड़ा कबाड़ की वृद्धि के मुख्य मसौदे है। चारों ओर के वातावरण को देख कर यही लगता है। आपकी क्या राय है जनता को जरुर लिखे।

अच्छा लेकिन बुरा निर्णय

हर आदमी व समाज को विकास की जरूरत होती है। उसके लिए वे हर प्रकार के प्रयास करते हैं। व्यक्तिगत तौर और सार्वजनिक तौर अपनी पूरी कोशिश करते हैं। विकास की दौड़ कभी सफल तो कभी विफल होता है। सरकार इसी कड़ी में मारुति कार की एक कम्पनी खरखोदा में लगवाने जा रही हैं। उसकी भूमि तो पहले ही ग्रहण कर ली है परन्तु अब बैटरी की कम्पनी के लिए भूमि अधिग्रहण करना है।

             राज्य में कोई उद्योग लगाना, राज्य के लोगों को रोजगार के साधन मुहैया कराने के लिए यह आवश्यक भी है। हरियाणा में जमीन पहले ही कमी है पहले तो हरियाणा मरुभूमि के कारण परेशान रहा। लोगों ने हरियाणा की भूमि को उपजाऊ बनाने में बहुत कुछ बलिदान किया है। देश की भूखमरी हटाने बहुत बड़ा योगदान है। जमीन दान कर कर हर खेत तक पानी पहुंचाया गया है। अब जब किसान थोड़ी खुशहाली के नज़दीक पहुंच गया है तो कम्पनियों के लिए जमीन देने का कारण सामने समस्या बन कर खड़ा हो गया है। यह सब किसान को खाने को आतुर है। 

              अब यह सवाल सामने मुंह खोले खड़ा है दोनों में से एक को ही सही तौर पर विकसित किया जा सकता है। दूसरे को निगल जाऊंगा। अब हरियाणा सरकार को उचित निर्णय लेना पड़ेगा कि उद्योग धंधों को जमीन चाहिए या खेती के लिए। हरियाणा में किसान के पास भूमि नाम मात्र की बची है। वे उसमें बमुश्किल गुजारा करते हैं। भू माफिया ने भी किसान की भूमि औने पौने दाम पर खरीद  ली है। जिसका बुरा असर मार्किट में बढ़ी महंगाई से साफ झलकता है। सारी भूमि कुछ बरसों में फैक्टरी व शोपिंग मॉल मालिकों के कब्जे में आ जायेगी। लोग पुराने ढर्रे पर चलने लग जायेंगे। साहूकार के गुलाम की तरह रहने को मजबूर हो जायेंगे।

              अतः। सरकार को उद्योग देश के ऐसे भाग में लगाने चाहिए जहां बंजर भूमि है दूसरे राज्यों में ऐसी भूमि बहुतायत में उपलब्ध है। इससे वहां के गरीब लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। बंजर भूमि का सही इस्तेमाल होगा। खेती वाली जमीन बेमतलब के कार्यों में जाया न होगी। खेती व खेती आधारित उद्योग ही हरियाणा में किसान के हित में लगाये। ताकि किसानों व उनके वंशज को अपने काम को बढ़ावा देने के अच्छे अवसर प्राप्त हो सके। सरकार को यह भी करना चाहिए कि शहरी करण को रोक देना चाहिए। अब मकान बनाना तो दूर एक प्लाट लेने के लिए करोड़ों में रुपए चाहिए जो नामुमकिन होता जा रहा है।

               गांव में अपने खेत की जमीं पर ही मकान बना सकते हैं। बनाने का खर्च भी करोड़ों में पहुंचा दिया है आमदनी के तौर पर महज १० से १५ हजार ही दिये जाते हैं। जिसमें खाने का भी पूरा नहीं पड़ता है। दूसरे खर्च अलग रह जाते हैं। अतः सरकार हरियाणा को खेती आधारित राज्य ही रहने दें। ताकि लोग अपना पेट तो ठीक ढंग से भर सके।

It Shame the part of IAF

  Indian air force is now a day in the practice of flying non official person in the fighter aircraft. It is not at all good for the air force. They do no even the ABCD of  technology of the aircraft. If they have pressed any switch by mistake, what will happen the can imagine. It may result in to crash. Better avoid this practice. No prime minister, president or the sports person become special to fly in trainer aircraft.

       Secondly, once no technician is allowed to go in the air after the maintenance of aircraft to check the serviceability of the system. They are merely allowed to go for ground run. They are the only person who are supposed to know the the facts of the aircraft system whether those are correctly assembled and are functioning normally. They deprived this facility to get acknowledged the facts.

        The pilots who do not know the much about the technology of aircraft system , blame the innocent technician later on when fault reoccurring in the space of air. Once the unperson of the system can go in the fighter aircraft then , why a technician airman and engineering officer can not go to test the system in the air. They must be allowed or stop this practice of taking the unauthorized person in the fighter aircraft. Air so many times refused their airman to board in the transport aircraft while moving on emergency leave also.

          Air official are injustice to the airman technician by taking Prime minister or President in fighter aircraft. I request air force authority not to do the for the mere sack of commendation and a medal. At for the sack of the country . Please think twice.

सरकार व सरकारी शिक्षा और दीक्षा

 सुबह सुबह हर कोई चाहता है कि किसी अच्छी खबर से दिन का आगाज हो। जब दुनिया को हर रोज घटित हो ने वाली घटनाओं से रुबरु करते अखबार यह लिखते हैं बेहद मजबुरी में,कि आज यहां यह हो गया, वहां वह हो गया। प्रकृति प्रदत्त घटनाओं पर तो मनुष्य व सरकार का जोर नहीं चलता है लेकिन सरकार बहुत से ऐसे कर्म कर देती है जो नहीं करने चाहिए।समय रहते नहीं रोका जाये तो अनर्थ करते देर नहीं करती है।

 सरकार सार्वजनिक कार्यों को करने के लिए ही चुनी जाती है न की व्यक्तिगत कामों के लिए। हरियाणा सरकार भी यही करने जा रही है। कल के समाचार पत्र में लिखा है कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद करने जा रही है जहां विद्यार्थियों की संख्या कम है। यहां सोचने की बात यह है कि बच्चों की संख्या चार हजार से अधिक है उन्हें बन्द कर दूसरे स्कूलों में भेज दिया जाएगा। यदि चार हजार कम है तो भारत सरकार को जनसंख्या वृद्धि करने का कानून लाना पड़ेगा ताकि बच्चों की संख्या स्कूलों में बढ़ाई जा सके।

    यह सब नीच मानसिकता वाले राज नेताओं की काली करतूत है ताकि अपने प्राइवेट स्कूल अच्छी तरह से चला सके। आज ऐसा नहीं ढूंढा नहीं मिलेगा जिसका अपना स्कूल या कॉलेज न हो। इसलिए वे न तो सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भर्ती कर रहे हैं। इससे उनको अपने स्कूलों के लिए सस्ते अध्यापक मिल जाते हैं, साथ में यह तीर भी छोड़ दिया है ताकि कम पैसों में काम करो और ज्यादा रुपए दो। भारतीय पार्टी की सरकार ने तो बिल्कुल ही हद कर दी है।

      खुले तौर हर विभाग को व्यक्तिगत बनाने पर तुली है। तथा शौषण काली साम्राज्यवाद लाने जा रही है ताकि अंग्रेज़ी शासन व मुगल काल की तरह लोगों का शौषण व दमन कर सके। समय रहते लोगों ने कदम नहीं उठाया तो गम्भीर परिणाम भोगने पड़ेगें। सब अपनी जेब के आकार में वृद्धि के सिवाय कुछ नहीं कर रहे हैं। दस वर्ष से अध्यापकों की भर्ती नहीं की है।

  सचेत जा समय रहते, नहीं तो आपके बच्चों का भविष्य अंधकारमय होते देर नहीं लगेगी। यदि लोगों ने विरोध नहीं किया तो वे उसी स्कूल को प्राइवेट कर आप से ज्यादा फीस ले लूटेंगे। प्राइवेट स्कूलों में स्लेबस भी उनका अपना होता है। मन माने ढंग की किताबे लागू करते हैं। जिसके फलस्वरूप अभिभावक पर अधिक भार पड़ता है।

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें