भाग्य व कर्म का खेल

सुखम शुभम् देहानु कृतम् 

                     शेषानी भव भविष्यति।

संसार में देह सुख ही धन दौलत है 

                      जिसके पास ये है तो और कुछ बाकी नहीं।

नये दिवस की शुभ कामनाएं। 

                       हर दिन नई खुशियां लेकर आए।

कर्म हमारे जीवन का अभिन्न अंग है

                        इसके बिना हर कोई अपंग है।

कर्मों का कोई ठिकाना तो होता नहीं,

                        इसका एक हिस्सा कहीं होता है

 तो दुसरा किसी और जगह।

                         समय वह ताला है जो सही जगह के 

बिना कभी भी खुलता नहीं है।

                           सब अपने हिस्से के कर्म करने ,

देश की सर जमीं छोड़ बाहर के 

                           देश के सिर मढ़े पड़े हैं

सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं के साथ 

                           अपने कर्म करने की बधाई

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शुभ प्रभात की शुभकामनाएं

आज का दिन आप व आपके परिवार के लिए खुशियों भरा हो। पार्वती नंदन श्री गणेश की कृपा से दिन सुखपूर्वक व्यतीत हो।

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आपकी त्वचा की रक्षा करने के लिए

 आजकल के दूषित वातावरण में हर प्राणी का जीना मुश्किल हो गया है। वातावरण में इतनी जहरीली गैस फैली हुई हैं कि हर जीव को आन्तरिक व बाहरी रोगों ने जकड़ लिया है। हर कहीं भी आपको ल्यूकोड्रमा जैसे बदरंग शरीर के साथ घुमते मनुष्य व अन्य प्राणी दिखाई दे जायेंगे।

इसका दूसरा कारण जलीय प्रदूषण है। आजकल आपको हर जगह सड़ रहा पानी अवलोकन में आता है। हर नदी,नाला जोहड़ व अन्य जल स्रोत गन्दगी से सरोबर पड़े हैं। सरकार इनकी सफाई व रखरखाव के लिए हर वर्ष अरबों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन डाक के तीन पात की तरह प्रदूषण नियंत्रण में नहीं आ रहा है। इसका कोई बड़ा कारण तो नहीं है परन्तु है बहुत ही गंभीर। यदि लिखते हैं तो बस यही श्रेय मिलता है कि सरकार के विरुद्ध है। परन्तु हकिकत में आज कल कोई विभाग सही से काम नहीं करता है। 

काम केवल रुपए कमाने , बजट बढ़ाया जाता है रुपए हजम करने को। पीने के पानी तक की किल्लत चिखे मार रही है। पूरा रुपए नौकरशाह व विधायक और सांसद की जेब में जाते हैं । ठेकेदार को २% भी खर्च करने को नहीं मिलता है। खैर इसे छोड़ काम की बात कर ली जाये। हम जिस बिमारी की बात कर रहे हैं उसे मार भगाना है जैसे चुनाव में सत्तारूढ़ दल हरा कर भ्रष्ट तंत्र कर दिया जाता है उसी प्रकार हाईपरट्रोफाइड स्कीन नामक रोग हमारे खानपान में सुधार कर ठीक किया जा सकता है।

इसका मुख्य कारण शरीर में वसा की मात्रा कम होने से यह व्याधि देखने में आती है। शरीर में चिकनाई व पानी की कमी होने से जिस भाग पर दबाव अधिक पड़ता है वहां त्वचा इक्कठी  हो जाती है वह दर्द करने के साथ भद्दी दिखाई देने लगा जाती है। चलने व काम धन्धा करने में कष्ट होने लगता है। इसका एक कारण चाय व मदिरा का अधिक सेवन भी है। आन्तरिक तौर पर जहरीली गैस व गन्दे पानी के प्रयोग से बहुत अधिक बढ़ रहे हैं।

इसका सबसे अच्छा इलाज तो बिना दवा खाए ही है कुछ शरीर की सफाई अच्छी तरह रगड़ कर करनी चाहिए। पैर हाथ की मृत चर्म निकाल दे फिर सरसों के तेल से मालिश करें। इन सबसे जरूरी आपके खाने में वसा यानि घी की मात्रा कभी कम नहीं होनी चाहिए। इससे शरीर के अन्दर वसा कम होने से चर्म व अस्थि के लोग निश्चित रूप से होते हैं। शरीर में साइनोवियल फल्यूड कम हो जाता है वह बनाना बंद कर देता है।

अतः पानी भरपूर मात्रा में लें। घी भी उचित मात्रा में अवश्य लें चाहें डाक्टर ने मना कर दिया हो। नहीं तो आपको विटामिन ए की दवा लेने को मजबूर होना पड़ेगा। घी में वही काम कर ना होता है। जितने रुपए डाक्टर की फीस व दवा में खर्च होंगे, उतने में घी आ जायेगा। यदि रोगी अधिक तंग करता है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

भारत सरकार को भारतीय जनता की रक्षा करनी चाहिए।

क्या आप जानते हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत में आत्महत्या की घटनाएं भारत सरकार के कारण बढ़ने जा रही है। सरकार अपने कान व आंख बंद कर अपनी राजनीति की रोटियां सेंक रही है। जब सरकार की आंख खुलेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। अतः सरकार को उस पहलू पर सारी राजनीति छोड़कर काम करना चाहिए। जिसका आगे जिक्र करने जा रहा हूं।

सरकार गरीब लोगों को या अमीर लोगों को घर या दुकान जिस भी रेट पर उपलब्ध करवा रही है। वह भारत की जनता की हेसियत से बहुत ऊंचे भाव पर दे रही है। कुछ पूंजीपतियों को छोड़ कर किसी के पास इतनी धन संपत्ति नहीं है जो वह कीमत आम जनता व व्यापारी सात जन्म में भी नहीं पूरी कर सकता है।

ऊंचे भाव पर प्लाट जिसका मुल्य करोड़ों रुपए है सरकार की फीस लाखों में है बनाने का खर्च करोड़ों में है सामान कीमत यदि व्यवसाय करते हैं लिक्विड फंड हर रोज जरूर चाहिए। कुल मिलाकर देखा जाए तो कम से कम एक दुकान चलाने में दस पंद्रह करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। ग्राहक दिन में दस भी मिलने कठिन है। इतना रुपया बैंक से ऋण पर लिया गया है।उसका ब्याज भी पूरा नहीं आता महीने भर में। लोगों को भूखे पेट सोने को मजबूर भारत सरकार ने कर दिया है।

सरकार कुछ यानि १०००, २००० प्रोपर्टी डीलरों के बहकावे में चल रही है। जब लोगों की कूरकी होती है तब पता चलता व्यापारियों व मकान मालिक की गई भैंस पानी में। घर का सामान सड़कों पर फैंक दिया जाता है। नौकरी के रुपए इतने अधिक देते हैं कि बच्चों की फीस तक के रुपए पास नहीं रहते हैं यह हालात उन लोगों की है जिनमें शराब,जुआ, रंडीबाजी आदि कोई बुराई नहीं है। एक बुराई है केवल वे भिखमंगो को अपना वोट देकर राजनीति में ले आते हैं।

जनता से गुजारिश है कि आने वाले चुनावों में उन्हीं नुमायन्दों को वोट दे जो आपके जीवनयापन के साधनों को आम लोगों की पहुंच से बाहर न होने दें। सरकार नौकरी हर किसी को नहीं दे सकती हैं। २) सरकार को कहें कि दुकान व मकान सरकार बनाकर दे। इस एवज में सरकार किराये पर दुकान व मकान दे और मासिक किराया लें। इससे लोगों पर कर्ज का भार नहीं रहेगा। सरकार के रुपए किराये से पूरे कर लिए जाएंगे।

सरकार यह नीति फिर लानी चाहिए जो बंद कर दी थी। इसमें सरकार व लोगों , दोनों का फायदा है। नहीं तो जब लोग ही नहीं रहेंगे तो राज किस पर करोगे। इसका भविष्य बहुत ही नजदीक और खतरनाक है। सबकुछ ले डूबेगा। मुफ्त के माइक पर कोई भी जोर जोर से चिल्ला कर कुछ भी कह सकता है।हकिकत सातों आसमान दूर की बात है। आजकल बिना चुटकी के काम नहीं होता है यही भारत सरकार की इकलौती सच्चाई है। कोई इसको नहीं नकार सकता है।

भारतीय जनता पार्टी ने लोगों को गिरवी रखने काम बड़े सुंदर ढंग से किया है।। पता नहीं क्यों ये राजनेता , राजनेता तो नहीं है कहना पड़ता है अपनी हकिकत क्यों भूल जाते हैं। राजनेता वह होता है जिसके राज में किसी को किसी प्रकार की तकलीफ़ नहीं होती है। उसके भूमि पर पैर रखते ही सारी प्रजा की तकलीफ़ समाप्त हो जाती है।

       लोगों को ऐसे राजनेता को ही चुनना चाहिए। सरकार को इस ओर ध्यान अवश्य देना चाहिए। उम्मीद करता हूं कि सरकार कानून बनाकर किराये के मकान व दुकान लाकर जनता की कठिनाइयां दूर करेगी।

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