दुबई को दुबई क्यों कहते हैं?

 दुबई संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी है। इसका सम्बन्ध त्रैता युग से है। दुबई उर्दू भाषा का अल्फाज़ है जिसका अर्थ दो बहने हैं जो संयुक्त कुटुम्ब में रहती थी। किसी कारण वश वे विधवा हो गई। क ई जन्मों तक मनुष्य योनि में रहने पर उनके दुःख कम नहीं हुते।

आखिर तंग आकर उन्होंने मनुष्य योनि त्याग दी। दूसरी योनियों में भी उद्धार नहीं हुआ।अन्त में वे चूहे की योनि में जन्म लिया। तब उनको पूर्व जन्म अधिभार निवृत्ति का ज्ञान प्राप्त हुआ। तथा चूहे की योनि में मनुष्य जन्म लिया। अपने माता पिता के भार अधिभार से मुक्ति मिली।

तब उन्होंने अरब अमीरात के दुबई शहर को बसाया। दो बहनों के कारण इस का नाम दुबई पड़ा। देश का नाम Rat यानि चूहा के अमीरात पड़ा। दोनों के इक्ट्ठा रहने पर संयुक्त बना। आजकल वे चूहियां बैंगलोर रेलवे स्टेशन पर बड़े बड़े चूहों रुप में रहती हैं।

क्या आप जानते हैं?

 क्या आप जानते हैं कि चिंटिया मनुष्य व पशुओं को क्यों काटती हैं। मनुष्य को तो चिंटी चारपाई व छत पर काटे बिना नहीं रहती। ऐसा क्यों करती हैं चिंटी, क्या आप इसका सही जवाब दे सकते हो। 

यदि नहीं तो लिखना, आगे लिखे पत्ते पर । आपके लिए जवाब इसी वेब साइट पर लिखा दिया जाएगा ।

पत्ता है sblohchab19@gmail.com. 

आप के उत्तर की प्रतीक्षा में।

इंडिया का शुद्धिकरण अर्थ

 इंडिया का हरियाणवी में अर्थ होता है इंडी, वह दो प्रकार की होती है। एक इंडी वह होती है जिसके ढक्कन नहीं होता है, वह इंडी हिजड़े के समान होती है।

दूसरी इंडी वह होती है जिसके ढक्कन लगा लेती है औरते। तथा दहेज के समान में दी जाती है। यह इंडी उस कंवारी लड़की के समान होती है जिसका सतीत्व की झिल्ली बरकरार होती है। यह वर पक्ष के लिए लड़की के चरित्र की पहचान के रुप में भेंट होती है लड़की की ओर से।

पहले वाली इंडी में यह इंगित करता है कि लड़की के रूप में हिजड़ा है या लड़की की झिल्ली फट चुकी है। यह संकेत भी ज्यादा तर लड़की स्वयं देती है। कारण कुछ भी हो सकता है जैसे साईकिल चलाने से, व्यायाम करने से भी झिल्ली फट जाती है। न की केवल बलात प्रयोग से या लड़की की ना समझी के कारण  जैसे हस्तमैथुन से। 

आज कल ज्यादातर झिल्ली फटती मिलती है जिस का कारण युद्धिस्टर के नारी समाज को दिये श्राप के कारण। जिसमें औरत या लड़की की योनि से खून आना झिल्ली फट ने की निशानी होती है। इसका स्टिक कारण पांचों पांडव भूत , प्रेत व ओपरी वायु के रूप में शरीर में  प्रवेश कर जाते हैं ताकि जन्म ले सके।

परन्तु कंवारी लड़की जन्म नहीं दे सकती है वह अपने शरीर से उन्हें बाहर निकाल देती है यह क्रिया पांचों पांडव अपनाते हैं अतः खून का रिसाव भी पांच दिन तक होता है। लड़कियां व औरतें उन्हें दण्डित करने के लिए चुराहे या रास्ते में डाल देती हैं।इस समय औरतों का शरीर दुर्गंध युक्त हो जाता है इसका कारण पांचों पांडव पानी में डूबकर मरे थे, उनके बड़े शरीरों के कारण ही वह बदबू औरत के शरीर से आती है।

इस के इलाज के लिए गन्दे कपड़े यानि कि सनेटरी नेपकिन को आग में जला देना चाहिए। ताकि शरीर से दूर्गंध न आए। पिण्ड दान करने की क्रिया भी इसी कड़ी का हिस्सा है। लेकिन पांडवों के गलत चरित्र व आचरण के कारण कोई भी उनको जन्म देने को तैयार नहीं होता है। दूसरा द्रोपदी का पांडवों को दिया गया श्राप है। वह केवल द्रोपदी ही हटा सकती है।

अब रही देश के सही नाम करने की तो उस समय जब महाराजा दशरथ राज करते थे वे उनके संन्यास ग्रहण का समय समीप आया तो राजयोग राजकुमार रामचंद्र के पक्ष में था। लेकिन महारानी कैकेई को दिये दो वचन जो युद्ध भूमि में दिये थे तब महारानी कैकेई ने समय आने पर मांगने की कह दिया था। राजकुमार रामचंद्र के राज्य अभिषेक के समय , महारानी कैकेई ने मन्थरा दासी के उकसाने पर राजयोग भंग कर ,राज राजकुमार भरत को दे दिया वो साथ में राजकुमार रामचंद्र को १४ वर्ष का बनवास दे दिया।

तब से चली आ रही गलत परम्परा के कारण राजतंत्र तो विलुप्त प्राय हो गया है। यह अपभ्रंश तब से लेकर अब तक नपुंसकों तक के हाथ में जाकर राजसत्ता बिल्कुल समाप्त हो चुकी है। इन नपुंसकों के राज लालसा की बदौलत भारत का नाम इंडिया पड़ा है।

अब यदि भारत सरकार में नपुंसक नहीं हैं तो इंडिया से नाम बदल कर रामराज्य कर सकते हैं ताकि नीच राज योग भी समाप्त हो जाते तथा सही राज सत्ता भी कायम की जा सके।

आगे चलकर राजा भरत को भी सही राजयोग वह राज सत्ता दी जा सके। इसके लिए जनता सरकार को लिखित रूप में दे। जब कोई संसद सदस्य कहीं आते तो देश का नाम बदलने के लिए कहें। जन्माष्टमी के अवसर पर मांओं से अनुरोध है कि वे आगे से किसी भी कृष्ण को जन्म न दे ताकि नपुंसक राजसत्ता पर काबिज न हो सके।

मेरी सम्पूर्ण विश्व की मांओं शुभकामनाएं आने वाले समय में एक सही राजपुरूष को जन्म दे।

कल्पांतकारी के जन्म दिवस की

 कल्पांतकारी भगवान् श्री कृष्ण के अवतरण दिवस के अवसर सम्पूर्ण सृष्टि के जन मानस एवं लग चुरासी जीव आत्माओं को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद ताकि आपका आने वाला समय आपको सुखमय व धन धान्य से परिपूर्ण रख सके। समय का आदर व सम्मान अवश्य करना सिखे तथा सम्मान करना चाहिए।

The meaning of The India

A wrong meaning was given by a English person in Oxford school of learning that India means a black dog. But This is not true, infect India means is earthen lamp in between the two objects. That was the Sun.

It is better for the people of western civilization not to hate the black person. The body skin color is due to the birth in the night of a dark face. It is for the betterment for the people of any part of world and pray to your God for next birth in day time or moon face.

शेयर की चमक का लाभ उठाये

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इस कम्पनी का नाम Empower India ltd है यह कम्पनी संचार तकनीक से संबंधित उद्योग के यंत्रों व उपकरणों के व्यापार में व्यवसाय कर रही। कम्पनी का शेयर बाजार में 0.78रुपये के भाव पर व्यापार कर रहा था।

सूर्य यान आदित्य के अन्तरिक्ष में भेजने पर

भारत के अन्तरिक्ष ज्ञान वाला के बुद्धिजीवियों की अथक सोच एवं कार्य शीलता व कर्मठता की एक और सीढ़ी पर कदम रखने के साहस की मैं तहेदिल से धन्यवाद, शुक्रिया व बधाई देता हूं।

आशा करता हूं कि आप अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर सकते हैं मैं आपके सामर्थ्य अनुसार सहायता करने को तैयार हूं। सभी को बहुत बहुत बधाई हो।

देशी व वनस्पति घी में मिलावट

 जन मानस समय रहते सचेत हो जाएं नहीं तो महा भंयकर व्याधियों से रुबरु होना पड़ेगा जो लाइलाज बिमारियों के साथ आयेगी। तथा लाचारी व घृणित अवस्था में मौत के मुंह में समाना पड़ेगा। अतः पानी सिर के ऊपर से बहने के पहले अपना सुदृढ़ प्रबंधन कर लेना।

लोग रुपए, पैसों के लालच में महा घिनौना काम करने से नहीं हिचकते हैं। इसी कड़ी में एक प्रमुख पहलू यह है कि लोग देशी व वनस्पति घी तथा खाद्यान्न तेलों में सूअर की चर्बी व प्लाज्मा तरल मिलाते हैं। बहुत से पेय पदार्थों में भी पशुओं के खून व प्लाज्मा की मिलावट नंगी आंखों से देखी जा सकती है।

ये सब शारिरिक व मानसिक रोगों का इकलौता कारण है। अधिकांश तौर पर इनसे उत्पन्न बिमारियां, केवल मौत के मुंह तक ले जाती है। सचेत रहें ऐसे पदार्थों से दूर रहें। इस के पिछे दूसरा अहम मुद्दा और भी महा भंयकर जो आपकी रातों की नींद उड़ा देगा। पढ़ते रहिए।

जितने भी साधु, बाबा, सुवादु, तांत्रिक ,झाड़ फूंक व बेऔलाद औरतें इस काम को बखूबी व बेख़ौफ़ करते देखे जाते हैं। यदि आप भी उनमें से एक है तो सम्भल जाएं ताकि आने वाले जन्म आपको अंध कूप के नर्क में जाने से बच सके। जितनी यातना तुम लोग निरह जीवों को देते हो उससे की करोड़ गुणा यातनाएं दी जाती है।

अब निर्णय केवल तुम्हारा तुम्हारे काम आयेगा। एक छोटा सा अपराध , करोड़ों वर्षों के नर्क के कष्टों का कारण बन सकता है। यदि आप ऐसे लोगों को पकड़ने के इच्छुक हैं तो उन लोगों पर नजर रखे जो आपके करीब है सबसे ज्यादा जिम्मेदार व यही लोग  नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इनके कर्मों की पहचान भी देख लीजिए ताकि बचा जा सके। बहुधा ये लोग दो तरह से काम करते हैं एक ये किसी मोली के धागे को तंत्र मंत्र से गंठित कर यानि गांठ बांध कर आप के घर में या राह में फैंक देते हैं जैसे ही आपका पांव उस पर पड़ा आपको उससे संबंधित समस्या से जूझना पड़ता है। आज कल पोलिथीन के लिफाफे व सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग भी अपने चरम पर है।

दूसरा कारण बहुत ही सरल है जो ज्यादा तर लोग कर रहे हैं। इसमें लोग अपने मनोभावों को दूसरे के शरीर में प्रवेश करवाने के लिए ,अपने हाथ से एक इसारा उस आदमी की ओर करते हैं जिसमें अपने बुरे कर्म डालने होते हैं। इसमें एक आदमी से लेकर करोड़ों लोगों की गैंग समलित होती है ताकि इसारा करने वाले का पता लगाने में कठिनाई हो। भारत वर्ष में यह गैंग भगवान् कृष्ण के नेतृत्व में काम कर रही है।जिसका दूष्परिणाम कृष्ण अनेक जन्मों से भोग रहे हैं वह भंयकर रुप से सड़ गये तथा काले कलूटे पड़े है।

आप लोगों के ध्यानार्थ व चेतावनी स्वरूप लेख सम्पूर्ण सृष्टि के हितार्थ समर्पित। दिनांक १६ फरवरी ६०अबस/16-4-60ABS

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