सरकारें जनता की समस्याओं का साझा स्वरूप होती है। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति भी इसी कारण की जाती है कि जनता की समस्याओं का समाधान सही,कम समय में व सही प्रकार के व्यवहार से हो। ऐसे देखा जाए तो वे किसी के भाई , भतीजे,मां, बाप, चाचा,ताऊ आदि होते हैं। लेकिन वैधानिक मजबूरियों के कारण वे अपनत्व न दिखाने पर मजबूर होते हैं।
परन्तु उनका व्यवहार हमेशा उपेक्षा भरा रहता है। व किसी मदद करने की बजाय,उसको देरी से करने की अपेक्षा रखते हैं। अकेले कर्मचारियों का भी दोष नहीं होता है, इसमें उल्लेखनीय भूमिका अधिकारियों की होती है। वे आम जनता की समस्याओं का समाधान करवाने की बजाय, सारा दिन दफ्तरों से गायब रहते हैं पूछने पर पता चलता है कि आज नही आयेंगे, वे चौटाला की बकवास सुनने गये है़। लोग दूर दूर से किराया लगा कर आते हैं। उन्हें फिर आने की कह कर टरका दिया जाता है।
चौटाला कोई काम तो नहीं,सारा दिन निठल्ले होते हैं चल पड़ते भीड़ बढ़ाने , रास्ता रोक कर गिरफ्तार हो ने के चक्कर में, वह एक आध अपराधी तत्व को बचा तो ले जायेंगे। इसके एवज में हजारों लोगों को बेवजह यातनाएं झेलनी पड़ती है। रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यदि उन्हें गिरफ्तार होने मजा आता है तो किसी ऐसे थाने में गिरफ्तार हो जहां पुलिस वालों को कोई काम नहीं होता हो। ताकि उन्हें भी काम मिल सके ।
सरकारी कार्यालयों की हालात यह कि कहीं कुर्सी टुटी पड़ी है तो कहीं अग्नि शमन यंत्र टूटे पड़े हैं। भवन की मरम्मत व रंगाई- पुताई तो जब से भवन बना है उसके बाद से नहीं हुआ है। रख रखाव के मद का खर्च पूरा हज़म कर गये है़। कम्प्यूटर महाराज तो उच्च कोटि के पंडित की भांति कार्य करते हैं। लाख बुलावा देने पर समय मिलता है वैसे ही कम्प्यूटर महाशय का हाल है लाख कोशिश करने पर चालू होता है। साहब की शिकायत करें तो जो हाकिम ऊपर बैठे हैं उनके कान सांप के कानों की तरह होते हैं। सांप बेचारे को तो कान नहीं होते हैं मूंडी जमीन पर रखनी पड़ती है लेकिन इन अधिकारियों को तो कान होते हैं फिर भी नहीं सुनता और दिखता है।
कर्मचारी व जनता परेशान करने में शायद उन्हें बहुत मज़ा आता है। इसीलिए किसी भी कम्प्यूटर की रिपेयरिंग नहीं कराई जाती है। हर रोज वोट लेने के लिए व सत्ता हथियाने के लिए लोक लुभावन कानून बना दिया जाते हैं कर्मचारियों व अधिकारियों को इसका पता तक नहीं होता है। इस टेबल से उस टेबल के बीच चक्कर लगाते हुए कार्यालय का चपड़ासी ताला चाबी हाथ में लिए कहता है,चलो बाहर, बंद करने का समय हो गया है।
सरकार बताये कि जनता शिकायत करने कहां जायें।जो नं शिकायत का दिया जाता है,वह आफिस के कम्प्यूटर में कहीं दर्ज नहीं मिलता है। यह सरकार के विकास व भारत के विकास की तस्वीर। धन्य है भारत के लोग इतने गन्दी कानून व्यवस्था को मान सम्मान दे रहे हैं।
