कुम्भ का स्नान एक तरह से शुऱू हो चुका है गंगा स्नान से जो बदहाली मिलती है उसका विश्लेसन स्वयं करके देख सकते जो गंगा स्नान करने वालों को क्या मिला है या फिर मेरे पास लिखना मैं गिनती करके बताऊंगा कौन कौन सड़ कर मर गये है तथा कितने दुनियां में क्यों कहां कहां दुर्दशा पूर्णदशा भोग रहे हैं।
वैसे दो उदाहरण आपके सामने परसतुत कर करता हूं। जिससे आपको स्नान के नुकसान व फायदे हैं। जितने भी ये बाबे अखाड़े वाले हैं उनके तन पर एक धागा तन ढकने को नहीं दिया गंगा ने तथा न खाने को दिया आज तक भिख मांगते फिरते करोंड़ों सदियां बित गई । दूसरी देश के सारे नेताओं की हालत देखो ,हर रोज हर जगह लड़ते रहते है, ये सब साल में दो चार बार गंगा को हाथ जोड़ने व अपने बुरे कर्म देने जाते हैं।
लेकिन सीमा से रोज लाशे आती है गंगा भारत में युगों से बहती चली आ रही लेकिन भारत की गरीबी कम होने की बजाय, हालत बद से बदतर होती जाती है फिर वहां पर क्यों गंद फैलाने जाते हो, सारे भारत में गरीबी व पापों के सिवाय भारत में और कुछ नहीं मिलता है यदि कलु कली पाप हरती गंगा तो भारत दुनियां में पाप करनें में अवल नहीं होता।हर जगह व्यभिचार व पापों का सिर मोर बन चुका है भारत ।
आओं तुम्हारी भलाई के लिये कभी गंगा स्नान न करने का संकल्प ले तथा हरिद्वार को गंदगी व जल को दुषित होने से व करने से बचाये तथा अपने आप को महा भंयानक वेदनाओं से बचायें। मैं तो देखुंगा 12 साल में आने वाले कुम्भ में न जाकर मेरा क्या बिगड़ेगा तथा गंगा स्नान करने वालों को क्या मिलेगा । वैसे कुम्भ का अर्थ होता है गंदगी से भरा घड़ा । अब देख लेना व निर्णय करना है गंद में नहाना है या नहीं नहाना है ।
