आपने मेंढ़क,मछली,कछुवा,मगरमच्छ जैसे जलीय जीवों के नाम तो सुने और देखे होगें।लेकिन आपने ओक्टोपस नाम भी नहीं सुना होगा । यह एक प्रकार की मछली है परन्तु मछली की तरह दिखती नहीं है।हिन्दी में इसे झिन्गा कहा जाती है। यह एक रोग जन्य जीव है, इससे चर्म तथा आन्त के रोग फैलाते है,ये रोग जलीय व खाने से उत्त्पन्न रोग कहलाते है इसका चित्र निम्नलिखित है
Good News For Farmers
It is a good news for farmers that climate and ecological timing is changed to Balance the season of harvesting. The right time sowing and harvesting at right time gives high yield and profit. The cotton crops are ready to pluck the yield in the month of August itself in full swing with out drought affected crop.
It is good sign for rabi s season ,will be sown in time in the full swing.By the 2nd week of October ,the kharib season will be over. You can see the maturity of crops in the photo scan.
Useless Became Gold
A useless thing known as nitrogen gas has been converted into gold to earn in the emergency of light of your tube well ,house and industry along with to bring the engineers of chemistry from the places of education.See new type of gold

Coduct A Survey
Conduct a survey for paralysis of body parts on the basis of Vastu Sastra and a email to me on the sblohchab19@gmail.com to bring the severity and effect of a single millimetre land encroachment ,can cause a serious effect on body health.All the daily news paper ask the culprit to give the opinion honestly.So, your ailment can be cure with out much loss of your money and state of health.
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एक चीज
एक चीज माँगते हैं,हम तुमसे पहली बार,
ऐसी-वैसी चीज न माँगे, माँगे चोरी, ठगी, बेईमानी , चरित्रहिनता,और लूट-खसोट तज दे बार म बार।
करना हो ,इकरार तो माँगते हैं पहली बार।
किराया मालिक का
हिसार का अर्थ होता है साह पुरूष ,जिस पर कोई उगँली न उठा सके। मुझे दुख ही नहीं आत्म ग्लानि महसूस हो ती है जो अपने पुरूष हो ने पर ग्लानि भरी नजरें उठवाते है।यही किस्सा कल फिर हुआ। एक और किंग फिसर चलाने से पहले बन्द हो ने के कगार पर पहुँच गई।
पहली उड़ान अभी चण्डीगढ़ भी नहीं पहुँची कि रोना शुरू कर दिया ,जहाज कम्पनी ने। सरकार घाटे को पूरा क्यों करेगी ,क्या सरकार के कर्मचारी किराया नहीं देते,करोड़ों रूपये के क्लेम हर रोज सरकारी कर्मचारी करते है।यदि घाटा सरकार ने भरना है तो सरकार ही, पहले की भाँति अपने जहाज खरीद ले। जनता दोहरा बोझ, किराया और टैक्स का क्यों सहन करे।
कोई चीज घाटे में कब आती है,जब उसकी मालिक महा भंयकर रूप से लालची हो जाये।अन्यथा आप मुफ्त में भी कोई धंधा करते हो तो घाटा नहीं होता है। एक जहाज और तिपहिया वाहन में कोई फरक नहीं होता है,फिर उसका किराया,इतना मंहगा करोगे तो कोई नहीं बैठेगा। मज़दूर और भिखारी लोगों की सवारी में राज करनिये बैठने लगेगें तो दिवाला,अवश्य निकलेगा। राजा लोग जनता की समस्यों के लिये जमीनी यातायात के साधन या पैदल रूबरू होते हैं। जनता चील व कव्वे नहीं हैं कि जहाज में बैठकर ,उनसे मारने प्रबंध करना पड़े।
ये जो वायुदूत टैक्सी शुरू की है यह तभी कामयाब हो पायेगी जब इसका किराया साधारण बस के बराबर होगा, चाहे आजमा के देख लो।घाटा तो मालिक को भरना पड़ेगा।हाथी बांधा है तो ख़ाना भी घर से खिलाना पड़ेगा।
भारतीय रेल बनाम पॉड होटल
भारतीय रेल ऐसे भंयकर व खतरनाक जोखिम कदापि न उठाये। भारत जैसे देश में, जहाँ आधे से ज्यादा सवारी बैगर टिकट के रेल में सफर करती है तथा जो दस रूपये किराये के, रेलवे को नहीं दे सकते, उनसे 700रू की उम्मीद करना , मुर्खतापूर्ण कदम होगा। देश व रेलवे का पैसा यूहीं बरबाद न करे। सबसे पहले बिना टिकट के प्रवेश व यात्रा पर पूर्ण रूप से रोक लगानी हो गी। अन्यथा वे सब भूत बंगलों के सिवाय कुछ भी नहीं होगा।
सब्जी का भाव
दूध तो दूध नहीं रहा ,मोल हो गया।
दूध तो मांये देती थी ,गाय-भैस का तोल हो गया।
बेटा माँय से , सब्जी कहाँ से लाऊ ,रूपये का मोल हो गया।
देखा पाकिस्तान का भाव , रूपये की जगह पैसा बलवान हो गया।
180में गोभी की गाय आई,पाकिस्तान धनवान हो गया।
भैस का दूध कहीं नहीं मिला, मैं हैरान हो गया।
पाकिस्तान जैसा छोटा सा देश,भैस छोड़ गधी पर परवान हो गया।
सब्जी तो नहीं आई, पर पाकिस्तान धनवान हो गया।
आओ दाग पर द़ाग लगाये
क्या दाग को जख़म उभर आये,
दाग को द़ाग लगा दो,ताकि चिता बन जाये।
वैश्या हो या तवायफ को कोई मरज़ उभर आये,
काली राहों को आग लगा दो , ताकि ज़ख्म भर आये।


