हरियाणा सरकार अपने कच्चे चिठ्ठों का बखान चुनाव जीतने के लिये जोर शौर के साथ कर रहा है
पक्का चिठ्ठा शायद सरकार के नेताओं को नहीं मिलता है।इसलिये हमनें सोचा क्यों न मैं ही एक पक्का चिठ्ठा दे दें ताकि नेता लोगों की सेहत व बचाव का प्रबंध पहले से कर लिया जाये,. नहीं तो पता चला कि सभा में पहुँचने से पहले पेट दर्द से हस्पताल में भाषण देना पड़े और नियुक्त जगह पर लोग इन्तजार कर ,वापिस जाये।
जरा सम्भल कर चलना , आजकल नेता लोगों की बजाय, बेचारी सड़क को जोर -जोर से चिला-चिलाकर भाषण देती है। उसकी भाषा चालक तथा उसकी गाड़ी तो समझ लेती है लेकिन सरकारी कर्मचारी तथा नेता लोगों को स्पेशल कोर्स करने पर ही समझ में आती है।फिर कहते नजर आयेगें ये तो हमारे विभाग का मामला नहीं हैं।यह तो रख रखाव विभाग का पेचिदा मामला है।
वार्षिक बजट तो खत्म हो गया है।बजट तो नहीं खत्म होता है लेकिन सड़क जरूर खत्म हो जाती है।देखिये ये तस्वीर क्या बोलती है।पाँच-छ: साल पुरानी सड़क है ,हालात अंग्रेजों के जमाने के खण्डरों जैसे है।यह सड़क एेतिहासिक गाँव किरमारा से एेतिहासिक गाँव नगथला को जोड़ती है।दोनों गाँव हरियाणा के छोटे से इतिहास में बहुत बड़ी जगह रखते हैं।एक मुगलकालिन शासक का मृत्यु स्थल है जोकि नगथला के नाम जाना जाता है तथा दूसरा किरमारा जो कि सृष्टि के विनाश से भी पहले का है।






