कृषि बीज वितरण मेला ।

11,12 सितंबर 2019 को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के सोजंय खेती-बाड़ी की पैदावार के लिए उन्नत किस्म के बीज वितरण का आयोजन एक मेले के रूप में किया गया । मेले में कृषि की लंबी फसल के बीजों की अपेक्षा पशुओं तथा कृषि करने वाले उत्पादों की ही झलक देखने को मिली।

कुछ स्टालो पर तो अनभिज्ञ विशेषज्ञ बैठे थे। बीजों के वर्गीकरण में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का कहीं भी नाम व अता-पता नहीं था। सब प्राईवेट लिमिटेड कम्पनीयो के उत्पादन थे।क्या पांच हजार एकड़ में फैले विश्वविद्यालय के कोई उत्पाद नहीं है। या हरियाणा सरकार के पास इतना भी बजट नहीं है कि अपने उत्पाद पर विश्वविद्यालय का नाम न लिख सके। एक छोटा सा दुकान दार कहीं का कचरा उठा कर अपना नाम पता लिखवाते हैं।

हरियाणा बीज विकास निगम तो एक अलग विभाग है जो कृषि उत्पादन विपणन भारत सरकार के संबंधित भाग का हिस्सा है। कृषि विकास विभाग के बीज तो मंडियों से झार लगे के होते हैं। वे दाने वास्तव में बीज के लिए पैदा ही नहीं होते हैं। वे केवल खाद्य पदार्थ ही होते हैं। अतः बहुधा बार तो पैदा ही नहीं होते हैं।

यदि पैदा हो गये तो पैदावार कम होती है। क्यों कि बीज हमेशा अलग पैदा होते हैं।व उन की पहचान जरूरी है। दुकानो से अच्छे बीज किसान अपने खेत में ही पैदा करवाकर रख सकता है।

पितर और कनागत पक्ष में निशेध

पितर और कनागत पक्ष में पूर्ण रूप से क्या प्रति बंध ह़ोता है और क्यों। पितर ,कुपितर व कनागत तथा ओट आदि जिन आद के ऋण व उन से पूर्ण रूप से छूटकारा पाने के लिए एक बार पिण्ड दान पाण्डु पिणडारा के ब्रह्म सरवोर में 15 दिन व एक दिन में पिण्ड दान एक बार निराहार रहकर दान धान में करवायेंगे तो हो उनके भार से मुक्त हो पाओगे।

अनपढ़ व चरित्र हिन ब्राह्मण के होने पर स्वयं अपनी भाषा में खुद ब्रह्मा को साक्षी मान कर रूपए या पैसा व अन्य सामान आग के हवाले कर दे तब तक करते रहे जब तक पूरी तरह राख में बदल जाये। रूपया या पैसा दोनों अलग-अलग मतलब में प्रयोग होते हैं रूपया पिता जी व पैसा बच्चों के, तथा अन्य सामान दूसरे सगे संबंधियों के लिए जलाया जाता है। माता,बहन, बेटी, पत्नियां के लिए वह अन्य स्त्री के लिए तीनों प्रकार के नवरात्र में पिण्ड दान देवी स्थल पर होता है।

हरियाणवी प्रश्न माला

1 कनोह का मतलब क्या है

2 किरमारा का अर्थ कै सै।

3 पाबड़ा का नाम पाबड़ा क्यों पड़ा।

4 नहला को नहला क्यों कहा जाता है।

5 सिमानी का मतलब कै सै।

6 नगथला का अर्थ क्या है।

7 श्यामसुख के हो सै।

8 सिणदोल का डेरा बताओ।

9 किरोड़ी का नाम किरोड़ी क्यों पड़ा।

10 बैलख के हो से।

कम्प्यूटर पर या मोबाइल पर गेम

कम्प्यूटर या मोबाइल पर गेम खेलने वालों का इलाज मनोचिकित्सक के पास बिल्कुल भी नहीं है। वह आप के बच्चों को नशे की दवा का आदि न बना दें। अतः आप बच्चे को भूलकर भी मनोचिकित्सक के पास न ले जा ये।

इसके लिए जितने रूपए मोबाइल के उपर खर्च करते हैं उतने में, किसी खेल क्लब की सदस्यता दिलाकर , उसके स्वास्थ्य तथा स्वभाव की रक्षा कर सकते हैं। यदि आप के पास, समय है तो आप भी साथ था सकते हैं। दोनों के व देश के हित में भी होगा।

Shortest Route to Hissar from Kirmara.

Shortest route from Kirmara to Hissar is Kirmara Nagthala ,Thhaska Balaji choak Durjanpur,Chothha Mile and Hissar.Being less distance it is by passing the toll plaza also. Time span is mostly same or less depend upon the driver and time of journey.

Due to the single road it takes some time extra time during the pick hours. Otherwise a nice road for comfortable journey.

किसी को तंग

किसी बुरी आत्मा से पिछा छुड़ाना हो तो उसे पत्थर के बूते में बांध दो । यानि की उसकी तंत्र की मूर्ति स्थापित करवा दो। वह आत्मा उसमें कैद हो जाएगी।और उसे तुड़वाना नहीं। नहीं ही , उसकी दोबारा पूजा आदि नहीं करें । तो वह आपसे दूर कैद हो जाएगी । वहां फिर कभी भूलकर भी नहीं जाना।

दगा किसी का सगा नहीं

हरियाणा में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं । चरित्र हीन धोखेबाज ,मकार , बेईमान तथा दगाबाज लोग नये लफुसड़ो के साथ लोगों को धोखा देने के लिए चुनावी दंगल में उतरने की फिराक में हैं। जिस आदमी ने एक बार धोखा दे दिया हो कि सी को,उस पर सात जन्मों तक विश्वास नहीं करना चाहिए। क्यों कि जिस धोखे से धोखे बाज पिछा छुड़ाना चाहता है वह आदत एक मनु सृष्टि के जन्मों से बाहर आने पर छुटती है।

अतः पार्टी अध्यक्ष और जनता ने झुठे लोगों से बच कर रहना चाहिए। नहीं तो पुरी लुटिया डूबो देंगे। धोखे बाज किसी भी काम के ,व कभी भी नहीं विश्वास के काबिल नहीं हैं । हजारों लोगों का उदाहरण भारत के इतिहास में अभी मोजूद है। सम्भल कर चलना। रूपया किसी का नहीं होता है । एक बार इज्जत चली गई तो कहीं खड़े हो ने लायक भी नहीं बचोगे । कोई भी छूट भैया कहीं भी बेइज्जती कर देगा । तथा बड़ा बनकर मुंह छुपाने की जगह तक नहीं मिलेगी।

इतिहास उठाकर देख लेना , पहले।

स्वास्थ्य के दुश्मन

हम और हमारी जीभ ,स्वाद लेने की आदी हो गई है।हम अपनी गलत इच्छाओं की पूर्ति के लिए , अपने स्वास्थ्य को रोगों की भेंट चढ़ा देते हैं। जिनमें से कुछ सब्जियों व मसालों का प्रयोग हररोज करने के कारण , मनुष्य केंसर जैसे महाभयकर व दुखदाई रोगों का शिकार हो गया। ये सब बताये ग्ए थे , रोगों का इलाज करने के लिए । परन्तु कुछ लोगों के अज्ञान व लालच के कारण मनुष्य जाति मुर्खतापूर्ण रोगों का दंश झेल रहे है। इसके लिए लोगों ने तरह के भारमक प्रचार कर लोगों को मौत और दुखों के मुख में डाल दिया।

मैं उन वस्तुओं का नाम लेने से पहले , उनके उन गुणौं को बता दूं ताकि असमंजस की स्थिति न पैदा हो जाए। ये सभी उन्हीं रोगों का दवा है जिन्हें ये पैदा करती है। फरक इतना है कि दवा रोज नहीं ली जाती है। ये तीन सब्जियां है लहसुन ,प्याज व लाल मिर्च ।

लहसुन जो कि एक सटीरोयड है जोकि अमरजनसी की दवा है तब दी जाती है जब जान बचानी जरूरी होती है तथा दूसरी कोई दवा असर कारक नहीं होती है यदि ऐसी दवाएं या पदार्थ लगातार ले लिए जाए तो ऐ रोग कारक ही नहीं ,जान लेवा भी साबित हो ये है इसलिए पहले परहेज की हिदायत दी जाती है। अतः इस औषधि को कभी कभार रोग की ही अवस्था में ले। अन्यथा इससे दूर रहें।।

लाल मिर्च पाउडर या साबुत दोनों ही हालात में हलाहल विष का दूसरा रुप है ।यह केवल विष जन्य रोगों का इलाज करने के लिए प्रयोग की जाती थी। लेकिन आज कल इस बिष का प्रयोग , हस्पतालों के मरीजों की भीड़ कम नहीं होने देता। अलसर जैसे भया्वह रोग लाल मिर्च का वरदान है। इससे तो बिल्कुल ही बच कर रहना चाहिए कि सी प्रकार स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है। इसकी पैदाईश महाभयकर रूप से सड़ी गली ,खुन खराबे वाली जमीन से पैदा हुई है। इसमें भूत और प्रेतों का भी वास होता है।

तीसरा तेली प्याज है जिस प्रकार तेली के कोल्हू के पास जाने पर ,बिन मारे रोते हैं ,उसी प्रकार प्याज भी ऐसी वस्तु है जो बिन मारे रूलाती है। प्याज को काटो या छिलो आंखों से आंसू निकलते है। यह भी एक भूतिया औषधि है पेट के कीड़े मारने में प्रयोग किया जाता है। लेकिन इस के खाने वालोें को एक मिनट का भी आराम नहीं मिलता है। यह औषधि के तौर पर साल में एक आध बार ही लेना चाहिए। इसके नुकसान बहुत, परन्तु जिसको सेहत ख्याल नहीं व रुपए के लालची प्रयोग कर सकते, ताकि वे यह न कह दे कि उन्हें तो हमारी कमाई से जलन हो रही है।

इसके कारण सबसे पहले आपके शरीर से बदबू आने लगती है , समाज में उपेक्षा का पात्र बनना पड़ता है।सब कहते हैं दूर हट, बास मार रहा है। सबसे गन्दी आदत प्याज खाने वालों में यह होती है कि कहीं भी उसे अपनी गुदा मार्ग पर उंगली करने की होती है जोकि होती बवासीर के रोग के कारण। कारक प्याज खाना होता है

अगर शरीर को ठीक रखना है तो इन तीनों से किनारा करना पड़ेगा। छः महीने बाद में बताना ,इन तीनों से दूर रहने के बाद कितना स्वास्थ्य ठीक हूआ। यदि आप ने झूठ नहीं बोला तो बिना किसी दवा के पचास प्रतिशत रोग का इलाज हो जाएगा।यह मेरी गारंटी है।

Installation of Electrical Meter on Poles Are Fatal

To make money by installing electrical meters on poles will prove fatal.It will be better to fix on the wall of the street of the owners.It is unthoughtful idea to make the farmers to kill.

Most of the villages have very narrow streets.When farmers will bring their agriculture waste in their vehicles . They will intangible with panel board and drag it out from the poles will cause short circuit and may result into fatality.

It humble request to with draw the order and use the other method to stop the theft of electricity.

To pay the pay off.

Any due of any body is balanced with someone .Let it be small or big amount with out forcing any body to beg.That is a social and heinous crime against humanity. Let be rental or pormotional dues of any kind , which was to help the individual as a labour to perform the job familiar or bessinessess.

Honestly pays get back the rewards of flowering the bessinessess.

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