हम और हमारी जीभ ,स्वाद लेने की आदी हो गई है।हम अपनी गलत इच्छाओं की पूर्ति के लिए , अपने स्वास्थ्य को रोगों की भेंट चढ़ा देते हैं। जिनमें से कुछ सब्जियों व मसालों का प्रयोग हररोज करने के कारण , मनुष्य केंसर जैसे महाभयकर व दुखदाई रोगों का शिकार हो गया। ये सब बताये ग्ए थे , रोगों का इलाज करने के लिए । परन्तु कुछ लोगों के अज्ञान व लालच के कारण मनुष्य जाति मुर्खतापूर्ण रोगों का दंश झेल रहे है। इसके लिए लोगों ने तरह के भारमक प्रचार कर लोगों को मौत और दुखों के मुख में डाल दिया।
मैं उन वस्तुओं का नाम लेने से पहले , उनके उन गुणौं को बता दूं ताकि असमंजस की स्थिति न पैदा हो जाए। ये सभी उन्हीं रोगों का दवा है जिन्हें ये पैदा करती है। फरक इतना है कि दवा रोज नहीं ली जाती है। ये तीन सब्जियां है लहसुन ,प्याज व लाल मिर्च ।
लहसुन जो कि एक सटीरोयड है जोकि अमरजनसी की दवा है तब दी जाती है जब जान बचानी जरूरी होती है तथा दूसरी कोई दवा असर कारक नहीं होती है यदि ऐसी दवाएं या पदार्थ लगातार ले लिए जाए तो ऐ रोग कारक ही नहीं ,जान लेवा भी साबित हो ये है इसलिए पहले परहेज की हिदायत दी जाती है। अतः इस औषधि को कभी कभार रोग की ही अवस्था में ले। अन्यथा इससे दूर रहें।।
लाल मिर्च पाउडर या साबुत दोनों ही हालात में हलाहल विष का दूसरा रुप है ।यह केवल विष जन्य रोगों का इलाज करने के लिए प्रयोग की जाती थी। लेकिन आज कल इस बिष का प्रयोग , हस्पतालों के मरीजों की भीड़ कम नहीं होने देता। अलसर जैसे भया्वह रोग लाल मिर्च का वरदान है। इससे तो बिल्कुल ही बच कर रहना चाहिए कि सी प्रकार स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं है। इसकी पैदाईश महाभयकर रूप से सड़ी गली ,खुन खराबे वाली जमीन से पैदा हुई है। इसमें भूत और प्रेतों का भी वास होता है।
तीसरा तेली प्याज है जिस प्रकार तेली के कोल्हू के पास जाने पर ,बिन मारे रोते हैं ,उसी प्रकार प्याज भी ऐसी वस्तु है जो बिन मारे रूलाती है। प्याज को काटो या छिलो आंखों से आंसू निकलते है। यह भी एक भूतिया औषधि है पेट के कीड़े मारने में प्रयोग किया जाता है। लेकिन इस के खाने वालोें को एक मिनट का भी आराम नहीं मिलता है। यह औषधि के तौर पर साल में एक आध बार ही लेना चाहिए। इसके नुकसान बहुत, परन्तु जिसको सेहत ख्याल नहीं व रुपए के लालची प्रयोग कर सकते, ताकि वे यह न कह दे कि उन्हें तो हमारी कमाई से जलन हो रही है।
इसके कारण सबसे पहले आपके शरीर से बदबू आने लगती है , समाज में उपेक्षा का पात्र बनना पड़ता है।सब कहते हैं दूर हट, बास मार रहा है। सबसे गन्दी आदत प्याज खाने वालों में यह होती है कि कहीं भी उसे अपनी गुदा मार्ग पर उंगली करने की होती है जोकि होती बवासीर के रोग के कारण। कारक प्याज खाना होता है
अगर शरीर को ठीक रखना है तो इन तीनों से किनारा करना पड़ेगा। छः महीने बाद में बताना ,इन तीनों से दूर रहने के बाद कितना स्वास्थ्य ठीक हूआ। यदि आप ने झूठ नहीं बोला तो बिना किसी दवा के पचास प्रतिशत रोग का इलाज हो जाएगा।यह मेरी गारंटी है।