प्रदुषण को रोकने के सार्थक उपाय वही होते हैं जो उसको जड़ से समाप्त कर सके।वह है उस वस्तु के उतपादन पर पूर्णरूप से रोक लगाना।
यह पराली नाम की वस्तु आने वाले समय में एक मल्टीपल लोगों का कारण बन कर सामने आयेगी।तब जन मानस के सामने सड़ कर मरने के इलावा कोई इलाज नहीं होगा। सरकार के सहयोग व प्राईवेट कम्पनियों द्वारा लाया गया , पदार्थ डिकम्पोजर आने वाले समय में जैसे पराली को सड़ायेगा ,वैसे ही दुनिया के लोगों को सड़ायेगा ।
क्यों कि जो लोगों बता या जा रहा है कि सड़ी हुई पराली की खाद बहुत कठीन अच्छी बन की है। एक सिदा साधा सा जवाब हर बेवकूफ से भी बेवकूफ आदमी बता सकता है कि सड़ी वस्तु खाने से खाने वाला सड़ेगा। फिर कृषि विग्यानिक तथा दूसरे लोग यह बताये कि सड़ी खाद से फसलें कैसे नहीं सड़ेगी।यह तो लाज्जमी है सड़ना। फरक इतना लोगों तब समझ में आयेगा ,जब बिमारी के रूप में रोग की तड़प समझायेगी।तथा को,रो कर अग्यानी डाक्टर से पूछेगा।उस बेचारे को क्या मालूम ,रोगी के बुरे करम ही रोग का कारण है तथा डाक्टर को एक चिज बहुत ही अच्छे तरीके से आता है।उस विषय पर डाक्टर को कित ने भी अवार्ड दे लो।डाक्टर कभी छुठा साबित नहीं होगा।
वह है डैथ सर्टिफिकेट क्योंकि मरे हुये को जिन्दा करने की हिम्मत ब्रम्हा के पास भी नहीं। डाक्टर डैथ सर्टिफिकेट साईन करने के माहिर होते है । बड़ी खुशी के साथ कर सकते है। मरने की चिन्ता समाप्त हो जाती है।अब वापिस विषय पर दो शब्द और लिख दूं । सरकार को बेवकूफी भरे कानून नहीं बनाने चाहिये तथा जो लोग उनसे जिसका विषय पर पूछते है वही उनकी बेइज्जती न करे ।जैसे कि चुनाव में हरा कर करते है ।यदि सरकार ने अपनी बेइज्जती रोकनी है तो कानून को अमली जामा सही तरीके से बनाना व पहनाना होगा।किसी लालच में किसी प्रकार की ढिल नहीं देनी चाहिये।ढील नदी तो सरकार के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।सरकार में बैठे ९९ प्रतिशत लोगों को पता नहीं।तुम्हारा न्यायधीश पाँच वर्षों में एक बार अवश्य करता है।
लोहे को मत मार हथोड़े व लुहार को मार । हथोड़े की मार कम तथा लुहार का जोर कम होगा तो लोहे में सुधार कभी नहीं होगा।काले लोहे को आग में जलाकर सफेद चमकदार स्टील बनाता है।अतः पराली को जलाने से मत रोकिये। सड़ कर मरने से अच्छा है सांस रूककर मर जाये।
इस भंयकर धूये से छुटकारे का एक ही स्टीक व पक्का समाधान है धान की खेती पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाना। वैसे भी यह कोई फसल नहीं है। यह एक खरपतवार है अतः इसे वार देना चाहिये। चावल स्वास्थय के लिये वैसे भी नुकसान दायक होता है। यह तो भिखारी व अवारा पशुवों तथा चूहों,व रेंगने वाले जीवों का खाना है।
समय आपको सद बुद्धि दे।
