फ्लोर टेस्ट व कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात में जो फैसला देने में देरी कर रही है। जितनी देर करेगी ,इस केस में राज्य की जनता,यदि किसी भी पार्टी ने भड़का दी तो , देश को ,कोर्ट के फैसले में देरी के कारण, देश को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि ज्यादातर पार्टी एेसी स्थिति में जनता को आक्रोशित कर देती है।

जब मामला कोर्ट में है तो जनता के उपद्रव का दोष कोर्ट परआयेगा।फैसले में देरी के कारण। अतः सुप्रीम कोर्ट ने एेसे मामले पर शीघ्र फैसला लेना चाहिये। कांग्रेस ,एन सी पी व शिव सेना ने तो जल्दी बहुमत सिद्ध करने की बात पहले ही कह चुकी है। दूसरा दंगा भड़का ने का आरोप बि जे पी पर लगेगें। जो फैसले में देरी करवा रही है फ्लोर टेस्ट में देरी चाहती है जो देरी में हुक एण्ड करूक करना अवश्य चाहती है।

यदि किसी के पास बहुमत है तो ,दिनों की क्या जरूरत है मिनटों बहुमत सिद्ध कर सकते है डरना किस बात से । सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में पुनः राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिस करनी चाहिये।ताकि दंगा भड़कने की स्थिति में पुलिस व फौज बुलाये जा सके।फिर कितने ही दिन ही नहीं चाहे वर्षों में फ्लोर टेस्ट कर ले।वैसे फ्लोर टेस्ट का अर्थ होता है जमीन चाटना होता है। बहुमत का मामला कभी तक सिद्ध कर ले। पहले राष्ट्रपति शासन होना चाहिये। यदि बहुमत सिद्ध हो जाये तो ही राष्ट्रपति शासन हटाया जाये।

चुनाव संहिता

यदि लोक सभा चुनाव आने वाला है २०२४ का।मैं भारत की जनता की राय जानना चाहता हूं क्या पूरे भारत की जनता मुझे अपना मत अभिव्यक्ति का पक्स देगी।जनता मुझे किसी प्रकार भी नहीं जानती है। जिस प्रकार राज्यपाल व राष्ट्रपति को जनता नहीं जानती है। केवल प्रधानमंत्री को ही जनता सीधे तौर पर जानती है क्योंकि उसे जनता चुनती है चाहे उसे संसद के इलाके का बहुमत न मिला हो। जिस देश की जनता का ७२ प्रतिशत मत सरकार के पक्स में नहीं हैं फिर भी देश में २८ प्रतिशत मत वालों की सरकार है यह तो समय का सरासर अन्याय है।

राज्यपाल व राष्ट्रपति चाहे कितने गंदे व अनपढ़ हो,जिन्हें संविधान के कानून की पालना करने व करवा ने में डर लगता हो । क्या उस पद पर आसीन होने चाहिये। बैचारी जनता तो मुक बधीरो की तरह तमाशा देखती रहती है।न जनता ने उन्हें चुना है। हां मैं असली बात पर आता हूं कि भारत की १०० प्रतिशत जनसंख्या मुझे चुनाव संहिता का पालन करते हुये । चुनाव में नोमिनेशन फिस के इलावा एक पैसा भी खर्च न करूं तो क्या जनता मेरे पक्स में राय देगी।

ऐसा मैंनें क्यों कहा, क्या भारत की जनता जानती है। आज चार साल से ज्यादा समय बाकि है। आपके नुमायन्दे अजमाने के लिये। मैं तो चुनाव खर्च का एक पैसा भी जनता पर टैक्स के रूप में नहीं डालना चाहता। जो अरबों रूपये चुनाव पर खर्च होते हैं।उसको केवल सरकारी अधिकारी कर्मचारी की तन्खाह तक ही सीमित रखूंगा। इस टेलीफोन से पूछ. लिया। चार साल सोचने को जनता को दे दिये।व आज की संसद के न्यायधीश भारत का एक-एक नागरिक बना दिया। अवलोकन व न्याय करना तुम्हारे हाथ में है। बाद में पछताना न पडे़ , अतः समय पर चेत जाये।

नेता लोगों की पहचान भीड़ देख कर न करे। उनके पांव पड़े, भूमी देख कर करें। यदि किसी भी नेता के कदमों के कारण जमीन हरी भरी दिखाई दे ,तभी उसे नेता माने।अन्यथा नहीं।यदि हरी भरी भूमी नंगी व उजड़ी नजर आये तो कदापि नेता न चुने।यह प्रकृति का नियम है व सास्वत सत्य है जो कभी मिटाया नहीं जा सकता है।यदि आज के नेता मेरी तरह टेलीफोन पर राय जानते। लोग उनके पक्स में राय देते तो भारत का हर घर व राह ,आज सोने से निर्मित होती।

सारा पैसा फिजूल खर्च कर दिया जाता है। चुनाव प्रणाली के घटिया नियमों के कारण। सारे बैंक व फैक्टरियां कंगाल हो गये है।नौकरियों से लोगों को निकाला जा रहा है। नौकरियों में बढ़ोतरी की बजाय कटोती की जा रही है। बढोतरी केवल MLA व MP के इलेक्शन में हुये खर्च को वसूलने के नियम बनाये गये है।जैसे हरियाणा की सरकार ने मकान का किराया एक लाख रूपये कर दिया है। यदि विधायको की हेसियत देखो तो उनको किराये के तौर पर एक पैसा भी नहीं मिलना चाहिये। तकरीबन विधायकों के सरकारी निवास के इलावा हर जगह अपने मकान खरीद रखे है। फिर किराये की नौबत कहां से आयी। यदि सरकारी आवास पसंद नहीं आता तो सरकार बनाते क्यों हो। चुनाव नहीं लड़ना चाहिये।

सारे नेताओं के घरों के सामने सूअर लेट मारते रहते हैं व सरकारी आवास में मिन मेख निकालते है। क्या भारत की जनता इतना मंहगा किराया चुकाने के लिये तैयार है क्योंकि यह देना जनता को ही पड़ता है। मंहगाई हकीकत में केवल व केवल चुनाव पर होने वाले खर्च से बढ़ती है।तथा संवैधानिक नियमों के अन्दर इसकी भरपाई नहीं हो सकती है। अतः नेता लोग लूट खसोट करते हैं नाम दूसरा रख लेते है ताकि जनता को पता न चले व संस्य की स्थिति में रहे।

२०१९ के हरियाणा के चुनाव की हकीकत ,किसी ने किसी को चुनाव में खर्च के लिये २ लाख रूपये दे दिये। वह है कोई व्यपारी।अब यह बताओ वह दो लाख रूपये ,दस लाख रूपये बनकर जनता कैसे पड़ता है, जाने। पहले तो व्यपारी अपने ग्राहको को दाम बढ़ाकर कर लूटेगा।जिसका कानून में कहीं भी रिकार्ड न होगा। फिर विधायक जनता को लूटेगा। चुनाव खर्च दिखाकर। फिर पार्टी लूटेगी। फिर चुनाव आयोग का आंकलन लूटेगा। फिर हरियाणा सरकार लूटेगी । उसके बाद भारत सरकार लूटेगी। बजट में टैक्स बढ़ाकर।जबकि यह रिश्वतखोरी नहीं होती तो ३६ प्रतिशत जीएसटी की बजाय २प्रतिशत टैक्स में काम चल जाता। उसमें से एक प्रतिशत बजट बचत अवश्य निकलती ,जो भारत के बजट में स्वपन में भी किसी नेता ने आज तक सोची भी नहीं।।

यदि सोचते तो बचत अवश्य होती ।यह विधि का विधान है।नेताओं ने घाटे दिखाकर व घाटे का बजट बना कर देशवाशिओं को धोखा दिया है। मनमोहन सिंह जब वित मंत्री बने तो सबसे पहला काम बचत करना बंद करवा दिया। पी अफ की बचत जब बहुत होती थी।ब्याज कम कर सारे रूपये कंगाल व्यपारियों के हाथो खत्म करवा दिये। क्या वे रूपये सरकार नहीं प्रयोग करती थी।सरकारी कर्मचारी को १२प्रतिशत ब्याज न दे कर विेदेशी कर्जदारों से उस से मंहगे ब्याज पर उधार लिया। पी, एफ का पैसा कर्मचारी किसी इमरजेन्सी को छोड़ कर , कभी नहीं निकलवाता है।

एक ऐसा जंहासा दिया सरकार ने ,सारे कर्मचारियों को कंगाल कर दिया।वह कंगाली की राह है शेयर मार्किट।इसके हाथ चढ़ गये तो बर्बादी के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगता है।यह गूढ़ रहस्य हर किसी को समझ में नहीं आता है।है सीधा सा नियम ,आप बिना ब्याज के अपने रूपये अनजान जगह पर लगा देते है। ९० प्रतिशत कम्पनियों तो चलती नहीं है बाकि दस ब़ची को तुम्हारे रूपयों की जरूत नहीं होती है। लोगों ने लाभ लेने के लिये शेयर वैल्यू बढ़ाई है कम्पनियों के मालिक ने हमेशा दिवाला पन के सिवाय कुछ नहीं दिखाया। जो संसार में एक नं़ का अमीर है,वह केवल टैक्स अधिकारियों के कारण सम्भव हो पाया है।

ये सब नेताओं को रूपये दे ते है और दुनिया को वहशी भेडि़यों की तरह लूटते है।आजकल यह खौफनाक मंजर हर नुक्कड़ पर मिल जायेगा।पता नहीं भारत की जनता को बुद्धि कब आयेगी।यदि इसी प्रकार की शिक्शा पध्यति व राजनीति रही तो कभी भी सम्भव नहीं है। जनता हर किसी नेता के जिन्दा बाद ,मुर्दाबाद के नारे लगाती है। उन्हें पता नहीं है जो शब्द वे चिला रहे हैं उस का अर्थ क्या है। सीधा सीधा मतलब निकलता है। वह तक तो पता नहीं ,चिलाते रहते हैं।जिन्दा का अर्थ तो जिन्दा है बाद लगते ही ,पहले मरना होता है. वैसे ही मुर्दाबाद में मुर्दाबाद का अर्थ मरा हआ।बाद का अर्थ बाद में। जिन्दाबाद का नारे का अर्थ जिसके लिये चिला रहे हैं उस को मार ने का उद्दघोष कर रहे हैं।़

अब दुनिया बताये कि एेसे भारतीयों का क्या करें।जिसको बोलने वाले शब्द का ग्यान न हो।

लड़ाई होती नहीं कराई जाती है।

आप को जानकर आश्चर्य होगा कि कि लड़ाई झगड़े होते नहीं है कराये जाते हैं। तथा उसमें मरने वाले शतप्रतिशत निर्दोष होते है।जो हथियार बनाने वाली कम्पनियों के कारण होता है।सुरक्सा के नाम पर बनाये जा रहे हथियार जब टेस्ट किये जाते है तो इसमें निर्दोष की हत्या की जाती है चाहे जानवर ही क्यों न हो।

लड़ाकू विमानों का टेस्ट किया जाता है तो जान माल का कितना नुकसान पहुंचा सकते है तो नुकसान कर टेस्ट किया जाता है। अब यह बताओ हथियार का कोई फायदा है। जब दोनों ओर नुकसान होता हो।जीता तो बिना हथियार के भी जा सकता है।और महाभंयकर रूप से विनाश कारक रूप में।किसी निर्दोष को तंग करने के जो श्राप लगते हैं उस से कुल का सम्पूर्ण विनाश हो जाता है।

अतः हथियारों की आवश्यकता वास्तव में होती नहीं है। समय आततायी को दंड अवश्य व मानव की अदालत से जल्दी व बिना खर्च के ।इसलिये समय से न्याय लेना चाहिये।जो बहुत ही जल्दी न्याय दिलाता है।

रोने से आँखों की रोशनी तेज

न रोना शब्द अच्छा है ,न ही आदत । रोने से आप ही नहीं ,आस पास के लोग तक परेशान हो जाते है। दुःख में रोने का सेहत पर वैसे तो बुरा असर होता है लेकिन किसी रोग या व्याधी के कारण शरीर के मनोभाव पर रोक लगी हो तो ,रोने से स्वास्थय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।इससे शरीर वेदना मुक्त हो जाता है वह भी तब जब आप बिलकुल अकेले हो ,और रोते हो। यदि आपके पास सहानुभूति देना वाला है तो आपकी समस्या बढ़ सकती है। क्योंकि वेदना व विद्वेग निकालने में सांतवना रोड़ा बनती है। आपके विद्वेग बीच में ही रूक जाते हैं जो काफी खतरनाक होते हैं।

रोने से आँखों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है आँखों की ज्योती तेज होती है।आँखों की पुतली व लेंस पर बहुत ही अच्छा असर होता है रोने का। इससे लेंस आंतरिक स्त्राव से साफ हो जाता है।जिसे आंसू कहते हैं। पुतली की स्कुंचन शक्ति बढ़ती है जिससे रेटिना पर पड़ने वाली प्रतिबिम्ब रोशनी सही जगह पर पड़ती है। इससे साफ दिखाई देने लगता है।

लेकिन डर ,मार व भय के कारण रूलाई आने के बुरे प्रभाव होते है। इनसे आपके शरीर की तंत्र प्रणाली का चोट आदि के भय के कारण, जिस जगह पर मार पड़ती है वहां बचाव में संवेदित ऊर्जा लग जाती है।अतः गलत धारणा न पाले। यदि अकेले में रोना आये तो जी भर कर रो लेना चाहिये। यह अक्सर देखने व सुनने में आता है वह अकेले बैठे रोये जाती या जाता है।पूछने पर कहता है बस यू ही रो रहा था। वे सच बोलते है । उनको भी कारण मालूम नहीं होता है। यह शरीर की रोग दूर करने की स्वभाविक क्रिया है। लेकिन उनके शरीर में काफी आराम महसूस होता है। इस लिये इस प्रकार रोने वाले को रोकना नहीं चाहिये।

जिन्दा हूँ मर कर

जिन्दा हूँ मर कर ,इसी राह में कोई एक राह गिर मिल जाये। जिन्दा रह कर कितना काम आया औरों के जी कर ,देखूंगा मर कर कितना काम आऊंगा औरों के। सलामती रह नहीं पायी चाह कर, जिसके काम आया रोंदा उसी ने बलवान बन कर । कितने बेरहमी से हथियार चलाये तन पर। शाया ही तो उठायेगा , लालच का बयान बनकर। मैं तो राख बन जाऊंगा तेरे अरमानों को पूरा करके।क्या तू मैं बन पायेगा ये गंडासा मेरे तन पर धर कर।

शाम होने को आई है चल अन्धकार मिटा दूं तेरे घर का । चूल्हा तक तो जलाया है तूने अपना पेट भरने के लिये। क्या इतना भी रहम आया तूझे, मेरी राख बिछाले अपने खेतन पर

। सूख जायेगा एक दिन तू भी ,क्या देखता है मुझे, मैं तो सूख पाया सुख कर ,क्या तू सुख पायेगा ,सूख कर , इसका पता लगा ले।

कानून का सबब

जिस देश में भिखारियों को पालने के लिये कानून व मन्दिर मसजिद गुरूद्वारे बने ,उस देश को तबाह होने से कोई ताकत नहीं बचा सकती है। क्योंकि जब उस ताकत का घर तुम बना कर दे रहे हो तो कोई भी भगवान व देवता तुम से बड़ा नहीं है। मन्दिर मसजिद गुरूद्वारे में भिखारी के सिवाय कोई नहीं पलता है ।

अतः देश में भिखारियों के सिवाय कुछ नहीं रहेगी, तथा भिखारियों के पास कुछ होता नहीं है। देश क्या होगा ,रहने की आवश्यकता नहीं रही क्या होगा । बेवकूफ से बेवकूफ भी समझता है।

देश की सरकार की मंशा?

देश की सरकार की मंशा देश बेचने की हो गई है। सरकार की जगह इस्ट इडिंया कम्पनी की तर्ज जैसी कोई कम्पनी लाने के लिये भारत सरकार पूरे जोर शौर से प्रयास रत है। आये दिन सरकारी कम्पनियों की हिस्सेदारी बेचना एक प्रमुख उदाहरण है भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश में लूट खसोट करने वाले पूंजिपतियों की सरकार लाने का हर जोर प्रयत्न करने में जूटी है। सारे सरकारी बैंकों का तो दिवाला निकाल दिया। उनकी सारी जमा पंजी प्राईवेट कम्पनियों के मालिक डकार गयें तथा अपना नकली दिवाला निकाल कर , प्राईवेट बैंक खोल कर बैठ गये हैं।

अब सरकारी उपकर्मों को बेचने की तैयारी है कुछ तो कांग्रेस सरकार बेच गयी थी। बची खुची भारतीय जनता पार्टी की सरकार बेच देगी। तथा देश पूर्व की भांति गुलाम होने वाली है। कुछ ही दिनों में यही हाल रहा तो प्राईवेट आई ए अस अधिकारी व कर्मचारियों की भर्तियां भी निकालने का फरमान सरकार ला सकती है। क्यों कि अपने कर्मों व मेहनत न करने वाले देशों में ऐसा ही होता है।अब देखते है अगला खौफनाक आदेश क्या आता है।

कड़वा सच

किसी की धर्मपत्नीं जब किसी भी मंदिर आदि स्थलों में अकेली व बिना पति कें जाने लगती है तो उसके पति की अकाल मृत्यु या उसके पति की मृत्यु पहले होती है।यह एक कड़वी सच्चाई है।।यदि इस तथ्य की सच्चाई जानना चाहते हो तो, एक ढ़ूढोंगे तो करोड़ों मिलेगें।

आप इस बात का पता लगाने के लिये सरवेअ्क्स्न करवा सकते है।अतः धर्म परायण औरत को अकेले किसी भी धर्म स्थल पर नहीं जाना चाहिये।बाद में पछताने से कुछ नहीं होगा। हकीकत बितेगी।जो कदम उठाने है या समझना या समझाना है पहले कर लेना जरूरी है।बाद में कुछ भी नहीं हो पाता है।कुछ शब्द बोलने बाकि रहते हैं ,सब डाक्टर व मन्दिर, मसजिद गुरूद्वारे पूजे कोई काम नहीं आये।

कोई शक्ति व ताकत किसी प्रकार का लांछन अपने ऊपर नहीं लेती है।अकेली औरत वहां जाने से उन पर लांछन आता है जिसका दण्ड उन्हें भोगना पड़ता है।

पेड़ नहीं जमीन सांस लेती है क्या

टेलीविजन पर दिखाई जा रही वस्तु स्थिति कि जमीन सांस लेती है।जो विडियो दिखाई गई है इसमें पेड़ तो हिलेगें जब जमीन उपर नीचे होती है। उसमें जो कुछ हो रहा ,यह सब भूकंप आने वाली जगहों पर होता है । कभी न कभी वह ज्वालामुखी बन कर फट जायेगा। वहां के आस पास की आबादी को सचेत कर देना चाहिये ,कनाडा सरकार ने,ताकि समय रहते जनता की सुरक्सा हो सके।

भारत में भी ऐसी जमीन मिल जायेगी लेकिन लोग ध्यान नहीं देते हैं।रात को व दिन में हल्के कम्पन आते रहते हैं।जिसके कारण ९९ प्रतिशत भवनों में पतली से एक सेंटीमीटर की दरारें , आपको दिखाई देती है। महीने में पांच से दस बार ये झटके महसूस होते है। सोते समय चारपाई झूले की तरह हिलती है। इसका इलाज कुछ है नहीं हैं।आगे आगे यह समस्या उग्र रूप धारण करगी ।इसका कारण सिवरेज सिस्टम व कच्चे कुयें जो बन्द हो चुके हैं।गैस नीचे होती है और आन्तरिक जो गैसों का दबाव होता है वह धरातल की कमजोर जगह को तोड़ कर , बाहर आने की कोशिश करता है।दबाव कम ज्यादा होने से जहां पर जमीन की करैस्ट पतली होती है तो ऊपर नीजे होने लगती है।

Why the company goes in loss

When the company implies the unjustified profit and impliment robbers law to the public . Then any company start decline in every aspect and go for fate of bankruptcy. I was watching a YouTube video that was telling a conspiracy to burgle the public and loot them and run away.

He was narrating about the plan of RuchiSoya,that company is going to boost by patanjali of Baba Ramdev.He is a such big decoit,I never imagined. How he will loot the honest people ,give their hard earned income to a company to to install or reboost,or to expand . provide interest free money to companies owners with out fear.No government other organisations even can not think of it.

They help the firm,factory , company or any other institutions to build the installation for public interest without any hesitation in share capital to help them in their needs.Even no body knows them any way in person. And invest their wealth on their request.But in latter stage how they behave, you cannot believe.

You can see the case of Baba Ramdev,How he has begged from public and every day ,he shouts on the media modes for an appeal to gether the wealth that I am big beggar and begs for public .Said that I am a international beggar. You can know the reality of him in RuchiSoya bankruptcy case.He or his management decided to re- allocate the share in such a fashion that in future nobody will a single paisa to a man who is going to install a unit or expend. He has made price of a share 2 paisa , which is real at par price is Rs10 but due to the bed decision habit of the company management,It is Rs 3.50 or something ,but it is above Rs 3/-.He has devalued the rupee to nil. How you can imagine that Bharatiya Rupee can be strong to any other country’s currency.In future , you will be slaves of other countries currency.Nothing will be available in rupees.Because Rupee will loose all its value.

Second blunder is doing that they are converting 100 share into 1share only. Now ,you can calculate the amount 100*10=1000 rupees will cost only 2paisa. He will loot 500 times.I don’t know whether that beggar knows or not that he is deceiving those people who has eracted that factory indirectly involved.No , new investor will invest a single paisa to such a fraud organisation.

I request the public , not to be emotionally black mail by idiot mongers.Hope for the best to save you from hipnotizing black mailer

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