Coronavirus

Ailments are the routine development of the body.If it faces some unpleasant situation it develope some irritative symptoms.But is not the body defect.very moment it faces acward situation,it tells the mind to be cautious.This environment is not fit for me be away from it.

It is the man who spoil the environment and causes the situation like Corona condition.The symptoms are all same of normal fever.We should be alert but should not be afraid of it.It may be propganda just like other scam to run their hospital , medical shops, pharmaceutical companies . You are seeing how they raised the price of face masks which hardly cost of one or two rupees in retail. We hope that it should not be scam.

Warm Winter

Have soothing winter

Winter is a season in which we have to escape ourselves from the chilly cold.It bites bitterly and most of the time our body is shivering and wants protection from feeling freezing cold.Here is a soothing ,warming and fabulous blanket to protect you and a pleasant night.

होली का महत्व

होली का महत्व आज तक कम नहीं हुआ , लेकिन कुछ सस्ते साहित्यकार कुछ अटपटे तथ्य जुटाते रहते हैं। यह बताये कि जब राम का जन्म किरष्ण के रूप में गया तो अयोध्या में राम कहां से आये।ये सब लोगों को बहकाते रहते झूठे व फरेबी लोगों का काम है। सब इतिहास की ऐसी की तैसी कर देते है । क्या झूठ छापने से किसी का गुलाल ज्यादा बिकेगा। ब्रज में तो होली गुंडों को लठ्ठों से पिट कर भगाया जाता है। ताकि लोग किसी की बहु-बेटियों की इज्जत बचाई जा सके।

इस अप्रासंगिक तथ्य पर कैसे विश्वास करे कि एक ही आत्मा धारी शरीर अयोध्या व ब्रज में एक साथ रहते हो। होली की किवदंती ब्रज के बारे में, लोग कृष्ण के साथ बरसाने से राधा को लेने जाते है तो बरसाने की औरतें लाठियों से पिट कर वापिस भेजती है।

पेपर लिक होना

पेपर लिक होना या करना एक सशक्त राजनीति का आधार है। आजकल ज्यादा तर प्राईवेट विध्यालयों व महा विध्यालयों का दौर है। उनको चलाने के लिये अच्छा रजल्ट चाहिये, उसके लिये पेपर लिक कर अच्छे नम्बरों से पास कर स्कूलों का नाम मन पसन्द व अच्छे स्कूलों में नाम दर्ज होता है। ताकि स्कूल चल सके।

अधिकांश विध्यालय राजनेताओं के हैं जिससे उनकी राजनीति की रोटियां सिकती है। सरकारी नौकरी मिलने में भी कठिनाई नहीं होती है। इस चलन से बैगर पढ़े ही पास हो जाते हैं। अध्यापकों व संस्थाओं को कम पढ़े -पढ़ाये रूपये कमाने का धंधे का संचालन करना आ जाता है। अब सरकार को पेपर लीक करने को एक व्यवसाय का दर्जा देना चाहिये, ताकि नकारा व बैकार लोग भी इस धंधे से अपना नाम कमा कर समाज को नरक में धकेल सके।

करोना वायरस

करोना वायरस का खौफ लोगों में इस तरह से फैल रहा है जैसे कोई माहमारी फैल गई है। हकीकत में यह कोई बिमारी नहीं है। केवल लोगों की गलत व नासमझी की आदतों के कारण ,छूआ छूत व भीड़ वाले स्थानों में लोगों के सांस छोड़ ने के कारण शरीर में होने वाली साधारण तकलीफ के लक्शण है।जो बिना किसी दवा के भीड़ व किसी से न मिलने से ठीक हो सकती है।

इसके पिछे पूजा पाठ व मन्नतों का सबसे बड़ा योगदान हो सकता है। क्यों कि आजकल लोग अपनी योग्यता व मेहनत को छोड़ कर भगवान के भरोसे व्यपार चलाने की फिराक में रहते हैं। भगवान लोगों के हस्पताल आदि चलाने के लिये , बिमारियों को दुनिया में फैला देते हैं। बचने के लिये मन्दिर आदि स्थलों से पहरेज करे। बिमारी के लक्शण स्वत गायब हो जायेगें।

कोल्ड स्टोरेज में खाने से

कोल्ड स्टोरेज में रखे खाने से तकलीफ व रोग तो फैलते हैं लेकिन कैन्सर व लेपरोसी जैसे रोग बहुत लम्बे समय तक प्रयोग करने से होता है।इसमें रोगों के इलावा खाना बनाने में ईन्धन भी कई गुणा ज्यादा खर्च होता है। फ्रीज में रखे दूध का सीधा प्रयोग करने से गले के रोग व बच्चों में निमोनिया नाम की बिमारी फैलती है।

कोल्ड स्टोरेज के खाने से वायु दोष व अपच के रोग होते हैं। कोल्ड स्टोरेज में रखे सब्जियां व फलों से ,बाहर रखे सब्जियां व फल पर बहुत ही जल्दी सड़ ने का असर पड़ता है। जबकि बिना कोल्ड के रखे सामान लम्बे समय तक रखा जा सकताहै। अतः कोल्ड स्टोरेज में हर एक वस्तु नहीं रखनी चाहिये।जैसे केला कोल्ड स्टोरेज में सुरक्शित तो रहता परन्तु बाहर आते ही एक दिन से ज्यादा नहीं रखा जा सकता ,वह सड़ जाता है।सड़ी हुई वस्तु रोग फैलायेगी। इसमें कोई संकोच नहीं होना चाहिये।केवल रूपये ही कमाने का साधन तो हो सकता है रोग हटा ने का नही,व सड़ने से हटा ने का नहीं।किसी चीज की अछाई के साथ ,उसकी बुराईयों के दंड झेलने पड़ते है।जब तक की बुराईयों का ईलाज न निकाल लिया जाये।

अपने व्यवपार के हेराफेरी के तरीकों का इस्तेमाल करने के लिये लोगों के जीवन के साथझूठ बोलकर बिमारियों में न धकेले। जिसको तकलीफ होती है वे लोग ताजे फल सब्जियां बना कर खाये।जिसको न होती हो तो वे खा सकते हैं।अपने व्यवसाय चलाने के लिये झूठ बोलकर व्यवसाय न करे। रसोई गैस वाले भी झूठ बोलेगे कि ठंडी वस्तु को गर्म करने गैस ज्यादा खर्च न होती है। इसका गृहणी को एक फायदा होता है कि उसे दिन में दो बार खाना बनाने का झंझट नहीं होता है।गैस की बचत नहीं होती है जब गर्म करोगे खाने को फ्रीज में, गैस ज्यादा खर्च होगी।

मुफ्त में बेशकिम्मती फार्मूला

मैं देश वासियों व विश्व के हथियार निर्माताओं को एक एेसा बहुमूल्य फार्मूला मुफ्त में देने जा रहा हूं जिससे किसी भी देश की बचत एक दिन में कई हजार करोड़ रूपयें ,हर रोज होगी। लोगों रोजगार भी उपलब्ध होगा।लेकिन उस फार्मूले पर अमल करने के लिये एक न या पैसा भी किसी सरकार को खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस बात की पूर्ति के लिये उस देश के पास वह वस्तुयें बनाने का कार खाना पहले से मौजूद हो। नहीं तो जो जहां से हथियार ले रहे हैं ,उनके पहले के वचनों पर आधारित समझोते से काम चल जायेगा।

तकरीबन देशों के पास वायु सेना है। वायु सेना के जहाज व पायलेट हमेशा नुकसान पहुंचाने के लिये जाने जाते हैं।जाहे सिद्ध काल हो या शांतिकाल।युद्धकाल में दु श्मन देश के जान व माल का नुकसान पहुचाते है तथा शांतिकाल में देश को नुकसान पहुंचातेहै। वह देश को कैसे नुकसान पहुंचाते है।यह सुनो।देश हवाई जहाज के पायलेट पर जहाज की किमत से ज्यादा खर्च करता है। युध्द कोई नहीं चाहता है परन्तु कुछ लालसायें , मनुष्य की युध्द को मनपसंद व्यवसाय बना देता है जैसा पश्चिमी देशों ने बना रखा। लड़ाकू जहाज कुछ मिनटों में लाखों रूपयें में धुंआ निकाल देता है। फायदा कुछ भी नहीं है।नुकसान के सिवाय। यदि वैसे ही फायदा जाहिये तो युध्द जरूरी होता है।जैसा पश्चिमी देशों में हर रोज युध्द करने के बहाने ढ़ूढोंगे जाते है। जब जनता मर जाती है तो सेरोगेसी अपनाते घूमते हैं। सम्भव जाओ,समय इम्तिहान लेने वाला है।

देश के व वायु सेना के पायलेट नाराज़ तो होगें, लेकि

न मेरा लेगें कुछ नहीं, क्योंकि मैं देश व वायु सेना के साथ धोखा-धड़ी नहीं कर रहा हूं।केवल युद्ध के हथियारों के नाम व काम बदलने की कह रहा हूं। देश ने जब ब्रह्मोश मिजाईल बना कर ब्रम्हा को युध्द के लिये आमंत्रित कर ही लिया है तो सृष्टि का विनाश अवश्य होना होता है।फिर भी देखते है क्या कुछ देर और हो सकती है या समय बिलकुल नजदीक आ गया है।कृष्ण भगवान शाम मिजाईल बने खड़े है।महा भारत के युध्द की तरह ,कभी भी पंच जन्य का शंख नाद हो गया तो कुछ अवशेष नहीं रहेगा।

अतः देश,समाज ,मानवता व विश्व की शाान्ति व विकास के लिये कुछ ऐसा करे जो कोई न कर सका। आईये हम मानव संहार की बजाय उनके खाने पिने के लिये मिजाईलों का प्रयोग करें।शांन्ति काल में लड़ाकू वायुयान की मिजाईल में बारूद की जगह सब्जियों व अन्न भरकर , देश के एक कोने से दूसरे कोने तक बैगर किराये के लोगों तक पहुंचा कर , मंहगाई कम करे।हररोज की प्रशिक्सन उड़ानों में जाया होने वाले ए टी एफ का सही उपयोग करे।देश की सब्जी मंडियों में मिजाईल के माध्यम से सब्जी व अन्न डरोप करें। इससे पायलेट की ट्रेनिंग गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आयेगा। इससे युध्द कौशल में निखार आयेगा। केवल मंडियों में ,अरेस्टर बैरियर के तरह के नैट लगाने पडेगें।ताकि मिजाईल टूटे फुटे नहीं।खाली कर मिजाईल फिर प्रयोग में लाई जा सके।

ये सामान देश के पास मौजूद है। बाकि देश की जनता व सरकार की मर्जी। कोई भी यह शुरू करके देश के सम्मान के अधिकार प्राप्त कर सकते है।तीन से सात दिन का लगने वाला समय घटकर केवल पन्द्रह से तीस मिनटों में रह जायेगा।यह केवल फायटर पायलेट के फैसले पर ही रूक सकता है केवल इस बात पर की हम सब्जी वेंडर नहीं है। युध्द कौशल के योध्दा पायलेट है।बाकि कोई अड़चन नहीं आ सकती है।वे मोरली डिग्रेड न समझ बैठे। जनता अपनी राय का ब्यौरा मेरी ई मेल पते पर देने का कष्ट करे ताकि जान सकूं कि कितनी दुनिया युध्द नहीं चाहती है। मेरा ई मेल पता है sblohchab19@gmail.com.

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