मैं देश वासियों व विश्व के हथियार निर्माताओं को एक एेसा बहुमूल्य फार्मूला मुफ्त में देने जा रहा हूं जिससे किसी भी देश की बचत एक दिन में कई हजार करोड़ रूपयें ,हर रोज होगी। लोगों रोजगार भी उपलब्ध होगा।लेकिन उस फार्मूले पर अमल करने के लिये एक न या पैसा भी किसी सरकार को खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस बात की पूर्ति के लिये उस देश के पास वह वस्तुयें बनाने का कार खाना पहले से मौजूद हो। नहीं तो जो जहां से हथियार ले रहे हैं ,उनके पहले के वचनों पर आधारित समझोते से काम चल जायेगा।
तकरीबन देशों के पास वायु सेना है। वायु सेना के जहाज व पायलेट हमेशा नुकसान पहुंचाने के लिये जाने जाते हैं।जाहे सिद्ध काल हो या शांतिकाल।युद्धकाल में दु श्मन देश के जान व माल का नुकसान पहुचाते है तथा शांतिकाल में देश को नुकसान पहुंचातेहै। वह देश को कैसे नुकसान पहुंचाते है।यह सुनो।देश हवाई जहाज के पायलेट पर जहाज की किमत से ज्यादा खर्च करता है। युध्द कोई नहीं चाहता है परन्तु कुछ लालसायें , मनुष्य की युध्द को मनपसंद व्यवसाय बना देता है जैसा पश्चिमी देशों ने बना रखा। लड़ाकू जहाज कुछ मिनटों में लाखों रूपयें में धुंआ निकाल देता है। फायदा कुछ भी नहीं है।नुकसान के सिवाय। यदि वैसे ही फायदा जाहिये तो युध्द जरूरी होता है।जैसा पश्चिमी देशों में हर रोज युध्द करने के बहाने ढ़ूढोंगे जाते है। जब जनता मर जाती है तो सेरोगेसी अपनाते घूमते हैं। सम्भव जाओ,समय इम्तिहान लेने वाला है।
देश के व वायु सेना के पायलेट नाराज़ तो होगें, लेकि
न मेरा लेगें कुछ नहीं, क्योंकि मैं देश व वायु सेना के साथ धोखा-धड़ी नहीं कर रहा हूं।केवल युद्ध के हथियारों के नाम व काम बदलने की कह रहा हूं। देश ने जब ब्रह्मोश मिजाईल बना कर ब्रम्हा को युध्द के लिये आमंत्रित कर ही लिया है तो सृष्टि का विनाश अवश्य होना होता है।फिर भी देखते है क्या कुछ देर और हो सकती है या समय बिलकुल नजदीक आ गया है।कृष्ण भगवान शाम मिजाईल बने खड़े है।महा भारत के युध्द की तरह ,कभी भी पंच जन्य का शंख नाद हो गया तो कुछ अवशेष नहीं रहेगा।
अतः देश,समाज ,मानवता व विश्व की शाान्ति व विकास के लिये कुछ ऐसा करे जो कोई न कर सका। आईये हम मानव संहार की बजाय उनके खाने पिने के लिये मिजाईलों का प्रयोग करें।शांन्ति काल में लड़ाकू वायुयान की मिजाईल में बारूद की जगह सब्जियों व अन्न भरकर , देश के एक कोने से दूसरे कोने तक बैगर किराये के लोगों तक पहुंचा कर , मंहगाई कम करे।हररोज की प्रशिक्सन उड़ानों में जाया होने वाले ए टी एफ का सही उपयोग करे।देश की सब्जी मंडियों में मिजाईल के माध्यम से सब्जी व अन्न डरोप करें। इससे पायलेट की ट्रेनिंग गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आयेगा। इससे युध्द कौशल में निखार आयेगा। केवल मंडियों में ,अरेस्टर बैरियर के तरह के नैट लगाने पडेगें।ताकि मिजाईल टूटे फुटे नहीं।खाली कर मिजाईल फिर प्रयोग में लाई जा सके।
ये सामान देश के पास मौजूद है। बाकि देश की जनता व सरकार की मर्जी। कोई भी यह शुरू करके देश के सम्मान के अधिकार प्राप्त कर सकते है।तीन से सात दिन का लगने वाला समय घटकर केवल पन्द्रह से तीस मिनटों में रह जायेगा।यह केवल फायटर पायलेट के फैसले पर ही रूक सकता है केवल इस बात पर की हम सब्जी वेंडर नहीं है। युध्द कौशल के योध्दा पायलेट है।बाकि कोई अड़चन नहीं आ सकती है।वे मोरली डिग्रेड न समझ बैठे। जनता अपनी राय का ब्यौरा मेरी ई मेल पते पर देने का कष्ट करे ताकि जान सकूं कि कितनी दुनिया युध्द नहीं चाहती है। मेरा ई मेल पता है sblohchab19@gmail.com.