सभी पढ़ने व देखने वालों को और ज्योतिष विद्या में विश्वास रखने वालों को एक बात बताना चाहता हूं। कि लोग सूर्य देव के साथ घोड़ों की तस्वीर के घर में लगाने के स्थान के बारे में बहुत बताते हैं। उनकी बात को जांचने के मैंने भी मेरे कमरे में लगी तस्वीर की दिशा बदल दी। दोस्तों जो मैंने किया तुम कभी भी मत करना। भंयकर नुकसान उठाना पड़या हैं।
घोड़ों की तस्वीर पूर्व की ही दिवार पर लगाये। जो दिशा सूर्य देव की है। लोग कहते है दक्षिण दिशा में यह तस्वीर लगाने से ये फायदा होगा । बिलकुल गलत है मेरे साथ हुआ ,बता रहा हूं । अजमाना भी नहीं। यदि आपकी नुकसान झेलने की हिम्मत नहीं हैं तो। बाकि आपके जयोतिषी पर। अत: ऐसी वस्तुऐ ध्यान से लगानी चाहिए।
भारत के सभी लोगों को करोना की इस दुःख भरी दासतां की जींदगी में लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने के धंधे लोगों ने निकाल लिये हैं।इसलिये सावधान हो जाइये ताकि करोना की बिमारी से बचा जाउसका सके।लोग दूसरे देश के लोगों को मुहरा न बनाना। धन के लालची लोग रुपये सड़कों पर फैंक रहे हैं वे चाहे संक्रमण ग्रस्त हो या न हो , लेकिन दवाई व मास्क बेचने वालों की घिनोनीं साजिस अवश्य हैं।
सबको पता हैं कुछ दिन है दुकानों में पड़ा बैकार कपड़ा , इस इमरजन्सी में लोग बहका के मास्क के तौर पर बेच कर वारे न्यारे कर ले। यदि ये रुपये संक्रमित हुये तो जान तक से हाथ धोना पड़ेगा। साथ में रुपये की बरबादी भी। एक गैंग और सक्रिय हो गई है ,वह है धर्मशाला व होटल मालिको की गैंग। जहां साफ सफाई तो पहले ही नहीं होती थी। रोग कारक ये स्थल पहले से महसूर हैं इधर के किटाणु उधर किया जा रहा है।अब लोगों धर्मशाला से निकल जाने की धमकी व होटल में रहने को मजबूर किया जा रहा है।
वास्तविक हकीकत यह है जिसको जान कर लोग ,लोगों को जान से मार देते हैं। पिछले 10 -15 वर्षों से लोगों ने रियली स्टेट का धंधा किया । बैंकों से करोड़ों रुपया कर्ज लिया। उसका ब्याज तक चुकाने की हेसियत किसी में रही नहीं। लोगों ने इतनी कलोनी व होटल बना दिये जितनी भारत की जनसंख्या भी नहीं है। रहने कौन आये। कितने किरायेदार लाये,लोगों ने कई – की प्लाट व फ्लेट ले लिये, सब्जी की तरह की शाम को खा लेंगें। सब्जी तो नहीं बनी, लेकिन करोना बन गया। शाम की सब्जी के पैसे अब किसी भी बिल्डर व कलोनी निर्माता व प्लाट खरीदने वाले और किराये पर मकान देने वाले के पास। सामान बिक नहीं रहे हैं।
खेति लायक जमीन थी , उसमें पत्थर हो दिये हैं। खाने के लाले पड़ गये हैं बि जे पी सरकार ढाई रुपयें में राअशन दे रही है फिर भी लोग भिखारी वाली लाईनों में खड़े है। यह सब बड़े- बड़े भू माफिया का हाल है।आगे आने वाला समय ,हाथ में जूती लेकर दो किलो दाने पैदल चल बेचने का आने वाला है। लोग करोड़ो अरबों के शोपिगं माल खोल रही है। बहुत ही कठीन घड़ीआने वाली है।क्योंकि हर एक की सीमा जोती है। फिर उसी ढहरे पर आना होता है।अत: अपना ढहरा बचा कर रखिये।
आने वाले हजारों वर्षों तक रियली स्टेट कोई फायदा नहीं देगी। षडयंत्र तो एक बार कर सकते हैं।परिणाम महाभारत की तरह शुन्य। महाभारत की असलियत सुन ,सारे कौरव कै साथ में पाण्डू के पुत्रो की भी वंशावली भी समाप्त हो गई थी। पांडु पुत्रों को डूब कर मरना पड़ा था। महान योद्धा अर्जुन के वंश का कुछ भी नहीं बचा था। तो रियली स्टेट है उसी का नाम, महाभारत है। अत: सम्भल जाओं। षडयत्रों में कुछ नहीं रखा है।
सरकारी बैंक दिवालिया हो ने के कारण घटती ब्याज दर हैं। लोग अधिक ब्याज के चक्र में महाजनी ब्याज पर रुपयों का लेन देन करते हैं। सरकारी बैंक से कम ब्याज पर लोन लेकर महाजनी सूद का धंधा करके लोग प्राइवेट बैंक खोल बैठे हैं। सरकारी बैंकों का कर्ज लोग लौटाते भी कम है । एक पक्की धारणा कर रखी है सरकार कर्ज माफ कर देगी। यदि सर कार ने करज माफ कर भी दिया तो भी काल की चक्की आटा अवश्य पिसेगी।
सरकारी बैंक फैल हो गये। सरकारी कम्पनियां फैल हो गई ।अब बताओं प्राईवेट बैंक व कम्पनियां भी बंद हो जायेगी। तो स्वत बंद हो जायेगी। लोन लिये अधिकांश लोगों ने फैक्ट्री लगाई ही नहीं। तो रूपये वापिस का सवाल ही उठता। आजकल वे लोग दलाल गली में बैठे हैं। वे निकम्मे लोगों के सहारे काम चला नहीं सकते। भारत निकम्मों का देश है।कामगार लोग ज्यादा रुपयों के लालच में ,फेक्टरी बंद करवा देगें। बहतर है सरकारी कम्पनियां में ईमानदारी से काम करना सिखें। बिना काम किये रुपये लेने की आदत त्याग करने पर ही देश के हालात सुधरेगें।।
रुपयों के लालची विदेशों में करोना जैसे रोगों व नश्ल भेद व आतंकवाद की भेंट चढ़ जाते हैं। यदि देश के लिए ,इतनी मेहनत कर ली होती तो शायद ये दिन न देखने पड़ते हैं। मुशिबत पड़े तो देश याद आता है नहीं तो देश जाये भाड़ में का , मनसुब्बा छोड़। देश वाशी बनना सीखों।
आजकल अस्पतालों में या बाहर मन्दिर,मसजिद ,गिरजाघर व गुरद्वारों में मानसिक परेशानियों वाले लोग बहुत ज्यादा है । क्या किसी ने जाना इसका मुल कारण । इसका मुख्य व अहम कारण है यह सदी जिसका मूल अंक 2 है यह कारण 2099 तक बरकरार रहेगी। केवल ज्योतिषय उपायों से मानसिक विक्षोभ कम कर सकते हो। उसका कारक चंद्रमां है जो मानसिक परेशानी देता है अपनी नादानियों के लिये विख्यात है। वह केवल एक दिन ही महीने में ठीक रख सकता है।बाकि उपाय आपको करने है। क्योंकि चंद्रमां खुद पूरे महीने रोग ग्रस्त रवै सै। कटता रवै सै। उसके पूजने से कोई इलाज नहीं हो सकता है। जो अपना इलाज नहीं कर सकता , वह दूसरों का इलाज कहां से करेगा।दूसरा कारण जल है अतः जल इसको और बढ़ा देता है।इसका कारक इन्द्र है। दोनों सम्मोहनी विध्या के ज्ञाता हैं। मन मस्तिष्क खराब कर वैश्यावृत्ति व वैश्यागामी बनाते हैं।जो यहां भंयकर रोग ,कष्टकारक व भविष्य के जन्म कुष्ट रोग कारक होते हैं।
पहले साधारण सा स्टीक उपाय बता दें, फिर कहानी बतायेगें। सूर्यदेव को जल दान करना चाहिए। लेकिन पानी के अन्दर पांव रख कर जलदान नहीं करना चाहिए। ताकि जल की अधिकता को कम कर सके। पानी की अधिकता से कैंसर जैसी जान लेवा बिमारी बहुत हो गई। जैसे – जैसे पानी की अधिकता बढ़ेगी कैंसर का रोग भी बढ़ेगा। यह भी प्रमाणित स्तरीय है। आज से ३० साल पहले कोई ढूढां , कैंसर का रोगी मिलता था। आज पानी की मात्रा बढ़ ने से , लाखों की संख्या में कैंसर रोगी हो गये हैं।कैंसर के रोग से बचने के लिये आग में जल दान सूर्यदेव को करना चाहिए। ध्यान रहे आग बुझनी नहीं चाहिए।
मानसिक तनाव के लिए मोती पहना चाहिए। वह पीले या गुलाबी रंग का हो। यह मनुष्य की जन्म कुंडली पर आधारित होगा की, किस रंग का पहनना चाहिए। आप आर्टिफिशियल मोती भी पहन सकते हैं। उनका प्रभाव भी उतना ही पड़ता है जितना की प्राकृतिक मोती का। आर्टिफिशियल मोती कोई भी पहन सकता है जबकि प्राकृतिक मोती समुद्र के किनारे बसे लोग , समुद्र से चारों ओर से घिरी भूमि के लोग पहन सकते हैं। इसका प्रमाणिक आधार है। पूजा करने के लिए लक्ष्मी, सिन्धु राज की पूजा की जा सकती है। क्योंकि यह जल आधारित व्याधि हैं। इसमें मैं अत्यंत महत्वपूर्ण बात बता दूं ताकि आपकी परेशानी दूर करने में कोई देरी व तकलीफ न हो। इसके लिए सस्ते से सस्ता मोती धारण करना चाहिए। मंहगा मोती अपराधियों की तकलीफ़ दूर करने को होता है और मिलता भी वहीं है जैसे मछवारों को।इस परेशानी का दूसरा कारण है इन्द्र देव।
अब इसके पिछे की कहानी बताते हैं। इन्द्र से एक बार मनु के एक पुत्र ने अपने पूर्वज के क्रियाक्रम के लिए जल का आवाहन किया तो इन्द्र ने सातों भाईयों का जल दें दिया ,जिससे जल प्रलय आ गई।फिर द्वापर युग में कृष्ण के कारण सात दिनों तक घनघोर वर्षा की ,फिर जल प्रलय आ गई। इन्द्र के पास जल नहीं बचा ।सारा जल कलयुग की भूमि पर आ गया। इन्द्र लोक जल विहिन हो गया । इसी प्रकार अलग काल व सृष्टि में व्याप्त जल , इन्द्र देव की गलती से ऊपर के बहुत से गृहों से गायब हो गया। इस पीड़ा से पीड़ित हैं ऊपर के गृहों के लोग। कुछ को तो तोड़ कर उल्का पिंडों में बदल दिया है। ताकि वहां की भूमि सही की जा सके।
चांद का टूकड़ों में धरातल दिखाई देना , उल्का पिंडों के भांति टूटे हुए भाग हैं।जो हर रोज घटते, बढ़ते रूप में दिखाई देता है केवल पूर्णिमा को ही पूरा दिखता है। जो कलयुग की भूमि से पानी वापिस लेने की एक क्रिया है। उल्का पिंड का प्रयोग,समुद्र का पानी वाष्पित करने के लिये किया जाता हैं। ज्वारभाटा भी इसी बात के कारण आते हैं। ताकि पानी गर्म कर ऊपर ले जा सके। आपने कभी-कभी महसूस किया होगा की रात दिन की बजाय ज्यादा गर्म होती हैं। उसमें बैचेनी बढ़ जाती है।इसका मतलब एक झील सूख गई। इसी प्रकार अपनी पिछली मूर्खता को इन्द्र व चन्द्र देव करते चले आ रहे हैं। अब जाकर अंग्रेजी काल चक्र के चन्द्र व इन्द्र देव को अपना पानी उठाने का समय मिला है। अतः पश्चमी देशों में समुद्री तुफानों की संख्या में वृद्धि होती जा रहीं हैं। जो एक अच्छा संकेत है भविष्य में यह गृह रहने लायक बन सके। अब तो यह जेल है राक्षक वृति के लोगों की।
हिन्दूओं को तो पहले ही मिल चुका है तथा 23 वर्ष ही बचे हैं मुसलमानों का अभी साढे 500 साल बचे हैं, समय आने में। उनके जल की स्थिति तुम छिमबी वाली जोहड़ी देख कर लगा सकते हो। तथा मुसलमानों के दयनीय चेहरे भी ,उसी के सामान नज़र आते हैं यह सब पूर्व जन्म के कृत्यों का जीता जागता प्रणाम है।हैं तो सभी के गन्दे, लेकिन संघनता का फरक सै । कोई भी अजमा कर देख सकता है। आंखो न के सामने हकीकत बिना लड़ाई , झगड़े के समझी व ठीक करने की कोशिश की जा सकती है।
परेशानी केवल उन्हीं को होगी जो उस काल व उस काल के लोगों से सम्बंध रखता होगा। व जन्म का उद्देश्य भूल गया होगा। इसी कारण से लोक तंत्रीय प्रणाली राज व्यवस्था में आई। अन्यथा राज व्यवस्था थी। इसमें सबसे पहले हिन्दू ओं की परे शानी खत्म होगी। लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं करना। धर्म परिवर्तन इस समस्या का हल नहीं है। वो परेशानी धर्म बदलने पर भी होंगी। आप अपनी जिम्मेदारी व समय के चक्र से भाग नहीं सकते हैं।आज बस इतना ही । जनता हित की बातें सुनकर डर जाती है। लेकिन डर का कई बार बहुत अच्छा नतीजा निकलता है ।
नब्बे के दशक के बाद बेरोजगारी बढा़ने का एक सर्वोत्म उपाय बाजार में उपलब्ध है। करोना की बिमारी उसे वरदान के रुप में समाज के लोगो के लिए लायी है। यह वरदान अब प्राईवेट अस्पताल वालों के लिये धन लक्ष्मी का अवतार लेकर आया है। इससे आपको केवल काम धंधा ही नहीं मिलेगा। परन्तु आपकी जान जोखिम में डालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
अब अस्पतालों में रोबोट काम करेगें , मनुष्य की जगह। डाक्टरों के वारे- न्यारे होगें। अब उनको रुपये लेने ही होगें, देने किसी को नहीं पड़ेगें। है न मजेदार बात। इससे सरकार को एक फायदा हो सकता है पुलिस की नोकरी में ज्यादा लोग भरती करने पड़ेगें, नहीं तो जो बरोजगारी रोबोट फैलायेगा , उसके फलस्वरुप चोर व डकैतों की संख्या बहुत बढ़ेगी।
दूसरा भारत के लोगों को पता है, यह होगा कि भारत में मृत्यु दर बढ़ जायेगी। इस भविष्यवाणी को गलत मत समझना। क्योंकि भारत के लोगों में किसी चीज को ठीक करने की बजाये खराब करने में महारत हासिल है।इसका जीता जागता परिणाम , भारत की तकनीकि कम्पनियां के उत्पादों को कितने प्रतिशत ठीक किया गया है। तकरीबन सारी कम्पनियां बन्द होने वाली है। सबका दिवाला निकल गया है या निकलने वादा है।
वे रास्ते तो रोजी रोटी तक थे, वे तो सरकार ने पहले ही वि आर एस से निगल गई । बाकि को करोना का का जायेगा।लोग रोजगार की जगह चोरी के धंधे करने लगेगें। केवल पुलिस ही एक डिपार्टमेंट होगा जो थोड़ा बहुत काम दिलायेगा। वह भी चोरी डकैती के डर के कारण, अन्यथा नहीं। देखते है मेरा दिव्य स्वपन कहां तक सच होगा। ज्योतिष झूठ जोती नहीं। यह मुझे साझा तो नहीं करना चाहिए था। परन्तु मेरी परेशानी तो अखबार ने समाप्त कर दी।यह मेरे एकले का मामला नहीं हैं।
लेकिन यह मशीन सीधे तौर पर जिन्दगी से जुड़ी हैं। इलाज पर होने वाले खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। मशीन खराब हो गई तो भारतीय कारीगरों को तो खराब करना है, सोर्टकट सब जानते है। तो और तकनीकि उत्पादों का हाल किया है, सब जानते हैं। अत: कारीगर भी विदेशी रखने होगें। देश के लोगों के सामने दो सोर्टकट आये हैं एक अकाल मृत्यु जो किसी की भी हो सकती है वस्तु स्थिति में आ जायेगा। दूसरा सोर्टकट है गुलामी का। जब भारतीय ठीक ढंग काम ही नहीं करते तो विदेशी कारीगर आयेगें तो एक दिन राज सता भी विदेशियों के साथ लगेगी।