आप हर रोज किसी न किसी समस्या से दुखी रहते हो। क ई प्रकार के इलाज करवा कर थक गये होंगे। बहुत सारा या सारा ही रूपया अपना बुरा भाग ठीक करने में लगा दिया गया । अब खाली हाथ भिखारी सी हालत बन गई होगी। इसके जिम्मेदार और कोई नहीं आप खुद है। अपने बुरे भाग पर रुपए खर्च नहीं करना चाहिए। आपको ठन ठन गोपाल कर देगा।बुरा भाग ही वह अनमोल खजाना है जो बिन मांगे छप्पर फाड़कर देता है।
लोग यहां एक गलती करते हैं वह अपने बुरे कर्म को किसी मंदिर , मस्जिद, गुरुद्वारा या गिरजाघर और टौनै टोटकों में रख आते हैं। उन कर्मों की वजह से लोगों को दुःख तथा गुरुद्वारा , मंदिर, मस्जिद व झाड़ फूंक करने वाले मजे करते हैं। अच्छे कर्मों के पास पिछले जन्म की संचित पूंजी होती है वह एक उम्र के बाद काम आती है।आप थोड़े से कष्ट में अपार धन दौलत को चौराहे या किसी जगह दान कर आते हैं। जिस आपने यह काम किया अगले दिन से आप के बुरे दिन लग जाते हैं। इसका पूरा प्रभाव सात महीने के बाद पता लगना शुरू हो ता है
जब आप को बिना किसी वैद्य व हकिम के पता चलेगा। तब सात बरस से सताईस साल लग जाते हैं।उस समय या तो आप के पास कुछ भी नहीं हो ता। यदि है भी तो आप बिछी बातों के कारण एक नारकिय जीवन जीते हैं। यदि आप हकीकत से रूबरू होने का माद्दा रखते हैं सुनने व सोचने का इल्म भी होना चाहिए। एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। लोग लाखों खर्च करते हैं जिसके लिए , वहां उनको एक पैसा भी नहीं देना था। बगैर एक पैसा दिये , हस्पताल में कैंसर का इलाज हो सकता है। आपको बस, पता नहीं है कि कैंसर का मूल कारण करता है।
चलो किसी को बिना खर्च किए ठीक होना है तो इस, बात को अच्छी तरह अजमा लेना , फिर कहना की ,कैंसर कहां ग ई । कैंसर जल प्रधान व्याधी है। जो पानी की वजह से होती है। यह पानी नहीं , जो पानी पीने से यह बिमारी न के बराबर ही होती है। यह उस पानी से होती है जो आपने चोरी कर रखा है। किसी भी समय, इस जन्म या पूर्व जन्म में। दोनों अवस्थाओं का समय ,अलग अलग उम्र के लोगों में मिलता है। बच्चे पूर्व जन्म के भाग में तथा बड़े या वृद्ध इस जन्म की पानी चोरी के कारण कैंसर ग्रस्त होते हैैं।
आज कल कैंसर का प्रचलन बहुत हो गया है। इसके चोरों की संख्या राष्ट्रपति से लेकर कोई भी काम गार करता है। कोई सिंचाई का तो कोई घरेलू पानी की चोरी करते हैं और रोग का शिकार हो रहे हैं। इसका इलाज तो बिना किमोथेरेपी के भी हो सकता है लेकिन लोगों की अक्ल ठिकाने आती किमोथेरेपी के कारण। जब ज्योतिषी के पास जाते हैं तो पूर्वाग्रह कह अपनी फिस ली और चलता कर दिया। पुख्ता इलाज उन्होंने बताया ही नहीं । माता रानी सब ठीक करेगी , कह काम चला लिया।
यह किसी ने नहीं कहा कि खेती का माल , नगर पालिका का पानी का बिल, चोरी का तम्मान भरने को । यदि यह कह दिया होता तो पचास रुपए नगरपालिका के, सो रुपये माल खजाने के व हजार दो हजार सिंचाई विभाग का तमान जमा करवाना है जा ,भर आ ।सब ठीक हो जाएगा। सबको हजारों से लाखो देने के बाद भी ,सारा दिन कहरा कर , नरक भोग कर , अगले जन्म का दर दर की ठोकरें खाने वाला बन कर ,मौत की नींद सो जाता है। उसकी मौत पर कोई रोता नहीं है। सब कहते है ,एक खर्च चला गया। सबको तंग कर रखा था। यह है पूरे जन्म की कमाई।
अतः अपना बुरा भाग किसी को नहीं देना चाहिए, पता नहीं, कब उसकी आवश्यकता आन पड़े। यदि आपके शरीर में कोई तकलीफ़ हो तो डाक्टर के पास जाने या दवा दारू लेने से पहले ,अपनी याददाश्त से पूछे , कि किसी का बकाया ,उधार तो दर्द नहीं कर रहा । यदि याद आ जाते तो पहले वह चुका देना चाहिए। कभी दवा लेने की नौबत नहीं आएगी। बाकि आप की तथा आपके अहंकार की मर्जी।
समय ऐसा मोका कभी नहीं देता है यदि अहंकार की बू मुंह से निकल गई तो। देर आय दूरस्त आये। समय पर काम आये को ज्ञान कहा जाता है। बाकि बेकार। लोगों को शायद मेरी बात समझ में आ गई होगी। मुझे तो कल पता चल जाएगा लेकिन आपको इस बात का दोबारा मालूम सताईस वर्ष बाद में चलेगा। पूछे ना कांकरी पत्थर बोल पड़ा। अपना तो पूजा पहाड़ गया। तू कहां ठाकरी।, नंगे पांव चला दिया , कहे ना कांकरी।
पूरी कहानी लिखने की शायद जरूरत नहीं रहेगी। आप समझ गए होंगे। यदि नहीं समझे तो समय एक गतिमान शिक्षक है वह सब कुछ समझा देगा। किसी से वार्तालाप करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।