बिहार एक ऐसा प्रदेश है भारत में , जिसमेें हर सिजन में लोग धड़ल्ले से मरते हैं। गर्मी हो तो डि हाईड्रेसन से मर जाते हैं । फिर प्यासे लोग पानी की चाहत कर बैठते हैं तो बाढ़ बहुत से लोगों को निगल जाती हैं। फिर मन्नत मांग लेते हैं हमें अब यह सिजन भी नहीं चाहिए, यह हमारे सगे संबंधियों को निगल जाता है।
फिर किसी संध्या को भोले नाथ के यहां पहाड़ पर चढ़ जाता है। वहां उन जैसा मौसम मांग लेता है । बिहार के इलाके में बर्फबारी की ठंड उतर आती है तो उससे भी वहां मौत का तांडव नृत्य होने लगता है। बिहारी भोले नाथ से हाथ जोड़ लेता है । मुझे आप कुछ नहीं चाहिए है आप अपने ये मौसम वापिस लेने की कहता है।
इतने में एक बिहारी ब्रामण आकर ठंड ले लेता है। बिहारी तंग आकर , बिहार छोड़ दूसरे राज्यों में काम धंधे करने निकल जाता है। उसने सरकार से बहुत बार कहा और लिखा । भारत सरकार के मंत्रियों से , लेकिन कुदरत की आपदा कह कर , छुट्टी कर लेते थे।
अब एक सिजन और आ गया है करोना का सिजन। बिचारे बिहारी पहले ही परेशान थे।ऊपर से करोना की मार ,ऐसी कि काम करो तो मरो। सरकार ने सारे काम बंद कर दिये। बिहारी को काम न होने की वजह से बिहार में जाना पड़ा। अब बिहारी को डर है कि कहीं बिहार में , चुनाव करोना न फैल जाये। अतः सरकार से अनुरोध किया है कि बिहार के चुनाव टाल दिये जाते, जब तक करोना यम का राज बिहार में चले।
यह बात भारत सरकार के चुनाव आयोग के साथ है । वह चुनाव करोना जाने के बाद भी करवा सकता है। अब बिहारी का कोई कार्य सरकार खुशी के साथ करने में सक्षम है। बिहारी लोगों की मौत भारत सरकार टाल सकती हैं।। क्योंकि बिहार में एक दिन में चुनाव हो सकता नहीं। पान , कत्था,चुना, तम्बाकू, खैनी, जर्दा व बिड़ी किसी कि कहा नहीं मानते हैं। ये सब करोना के मातहत है। वे अपनी फर्ज अदायगी बखुबी निभाते हैं
अब करोना को वापिस भेजने है तो चुनाव टालने पड़ेंगे।

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