भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य़ न्यायधीश व अन्य बैंच के न्यायधीशों को कोरे कालर डूब के मर जाना चाहिये , जिन्होंने ने देश के संविधान के विरूध , न्यायधीश की कुर्सी पर बैठ कर इतना बड़ा अपराध कर दिया है , वैसा इतिहास में कहीं नहीं किया । जिन्होंने ऐसा सामाजिक कानुन तोड़ा है जो संविधान में पूर्ण अपराध का दर्जा प्राप्त है तथा एक दण्डनीय अपराध है ।
समाज में भीख मांगने वालों को दण्ड न देकर , पूरे देश के लोगों को भीखारी बनाने की व्याख्या कर दी है । जो एक मृत्य दण्ड का अपराध है । अतः अब भारत की जनता ही न्यायधीश बची है कि महाअभियोग चलाकर दोनों न्यायधीशों को मृत्यु दण्ड दे।अन्यथा पूरे भारत में भिखारियों के शिवाय कुछ नहीं बचेगा। सब लोग कर्म करना छोड़ भिख मांगना अपना धंधा फिर से अपना लेगें।
जैसे अंग्रेजों के समय भारत में होता था , बड़ी कठिनाई से कानून बना कर लोगों को सुमार्ग पर ला रहे थे कि महामुर्ख न्यायधीश , भारत के न्याय तंत्र में घुसे मिले जो पूरे देश को ले डूबेगें। अब लोगों के हाथ में है कि , क्या भारत की जनता भिखारियों की गुण्डागर्दी का शिकार होकर मरेगी या भिखारी व मूर्ख न्यायधीश लोगों के हाथों मारे जायेगें ।
