य़दि आपको किसी के कारण आंसू आते हैं तो आप समझ लेना वह आपके दूखों का कारण हैं चाहे चोट हो या दूसरे जैसे किसी मित्र या घनिष्ट के कारण आते हो तो आप समझ लेना किसी उससे ज्यादा तंग करने वाला किसी भी दुनियां में कोई नहीं है , चाहे भूत , प्रेत की बाधा हो यदि आपकी आंखों में आंसू नहीं आते हैं तो समझ लेना वह आपको तंग नहीं करता है
चाहे मृत्यु का शौक आपके मात पिता के कारण हो यदि आंसू नहीं आते हैं तो इस दर्द का कारण उनसे सम्बन्धित अन्य कारण है। प्रत्यक्ष भूत दिखाई देता हो और आपको महाभंयकर पिड़ा हो रही हो तो उसका कारण वह भूत नहीं जब तक आपकी आंखों में पानी न आये।
उसका कारण तुम उससे पूछ सकते हो , ज्यादातर बिना पूछे बताते नहीं। अतः जितने भी आंसू कारक कारण है उनका इलाज सबसे पह ले कर लेना चाहिये ताकि दूसरी को समस्या हो तो उसका पता समय पर लग सके। लोग कहते है कि खुशी के आंसू भी होते है लेकिन वे भी बिना दुःख के नहीं होतेहै ।
बिना दुख का पानी आता है लेकिन उसका तो पता ही नहीं लगता कि आंख में पानी आया है जो आंखों के लेंस को साफ करने के लिये आता है। उसकी कमी में ,आंख के रोग हो जाते हैं दर्द तो नहीं होता नजर कमजोर या भंगापन हो जाता हैै