बहुत लोगों ने इस बिमारी का नाम ही नहीं सुना होगा कि होता क्या है यह वास्तव में बिमारी है भी नहीं। यह पूर्व जन्म का बोझ है जिसको मनुष्य ढोता है । इसका मैं अर्थ बता दू। फिर आगे कारण व इलाज बताऊंगा । हैं तो पका इलाज लेकिन बहुत से लोग लालच वश मानते नहीं तथा इस नर्कीय बोझ को अपनी कमर लादे फिरते है
थलसिमिया का अर्थ है मेरी कन्या जन्म की भूमि । थल का मतलब जमीन , सि का अर्थ कन्या तथा मिया का अर्थ होता है मेरी । यह एक पुस्तैनी कारण है वह उसके नाम क्यों नहीं है जब कोई जन्म लेता है तो जन्म के साथ ही उसे पैतृक उतराधिकार के रूप में अचल सम्पति का हिस्सा नाम में मिलता है यह ब्रह्म सृष्टि का नियम है नहीं तो पैदा होने वाले का खाना पिना कदापि नहीं मिलता।
लोग लालच या अनभिज्ञता के कारण नहीं मिलता है , इसका सबसे बड़ा उदाहरण सती माता है जिसका हिस्सा महाराज दक्ष ने आज तक नहीं दिया है । इस कारण आप देख सकते है सती का काली रूप कैसा भंयकर हो गया है तथा जो शिव जी भगवान है सारे संसारों में भूखा व कूरूप हो कर बैठा है , दक्ष की हत्या करने पर भी भाग नहीं मिला।
ऐसे करोड़ों केस हैं लेकिन भारत में सबसे ज्यादा पंजाबी ,शर्णार्थियों में मिलते है कारण सपष्ट है वे विदेश से आये हैं जब तक उसकी जमीन ब्रम्हा के नाम दान नहीं होगी तब तक वह कितने ही लैंड लोर्ड परिवार में जन्म ले ले,उसे खाने के दाने नहीं मिलेगें यह पक्का नियम है। क्योंकि बलोक पिछले जन्म का लगा पड़ा है लोग रूपयों के झोले लिये फिरते हैं खाना गले नहीं उतरता है।
मन्दिर ,देवि देवता की पूजा से रूपये तो मिल जाते है लेकिन समस्या जो बिमारी का रूप ले चुकी है खत्म नहीं होती है। इलाज है बहुत ही आसान परन्तु होना दुर्लभ है। इसमें लालच आड़े आता ह, यह मेरी आंखो देखी बात है , किसी ने दान तो कर दिया लेकिन जो सामान दान किया था वापिस घर ले आया। अतः कोई फायदा नहीं हुआ।
मैने अजमाने के लिये वह तरीका किया बहुत नुकसान हुआ। नौकरी तक छुट गई।यह एक बार में भी नीं सकता है कोई बिरला ही होगा जिसका एक बार में हो। पता नहीं कितने जन्म का बलोक लगा पड़ा है शिव जी से पूछ सकते हैं सती ने दान पुन करते कितनी सृष्टी बित गयी है आज तक भाग ठीक नहीं हुआ है । जन्म दर जन्म बाप बेटी में मार काट मची रहती है।
जब तक दक्ष हिस्सा दान नहीं करेगें , यह समस्या बनी रहेगी। उसी प्रकार आप इस जनंम से उस जन्म तक का दान करे जहां से दान नहीं हुआ है यदि में जन्म किसी और के घर का है तो बहुत मुशकिल हो जाता है इसमें स्वयं दान कदापि न ले। दान करें । मरीज का भाग ब्रह्मा से मि लेगा किसी संकेत के तौर पर।केवल जमीन दान करनी है व भी कथन के तौर पर फीजिकल नहीं।