Test Fire

It is good news and occasion for the Indian public to see a party with overwhelming majority win in election and came into power in the government of India.Some time , earlier Congress party were also had come in the power in the central cabinet.It is not good thing for B.J.P.,When some one assumes office in such a huge back of population.Can they bear the load of expectations,the people have.If some one’s father is in power of ruling in some states of The ruling.You will through your father by hooks and crooks,and grab the power.Or to be asked the power of hierarchy will be sought. How you will deal with your father ,a son comes in power.His father should be killed by his son or due respect to be accorded.It is the same thing is applied on B.J.P..How the government of ruling B.J.P. alliance work and behave with the public opposite party ruling.I am not telling about leaders ,I am asking what type of behavior will be towards the public.whose have given mandate to both of the party members.Why you people shows your ugly face to them.Fighting there in house of Rules and laws.If you have the fighting capabilities ,you would have joined the Military, could have been a real fighter. And saved the national boundaries intact.Better join the Indian Navy ,where without killing any body ,you can be awarded abrave sailer in the nation.You fight there with tidal waves which are spoiling the national property and causing huge loss to human kind.

जाता किसकी

आजकल पुरे भारत में खुशी और दुख का माहौल है कोई नेता की जीत के गीत गा कहा है तो कोई काग्रेस समेत अन्यथा पार्टियों की हार का लेना के कहा है।परन्तु हकीकत , जीत,हार से कोसों मिल दूर बैठे ,अग्यात की हो गयी है। कभी ने अपना सिर किसी न किसी ठिकाने पर झुकाया है।अत: जीत भी उसी ठिकाने की ही हुयी है।अब ,मोदी की ही बात ले तो जीत काशी विश्वनाथ व केदार नाथ की ही हुयी है,मोदी को तो काशी विश्वनाथ पर विश्वास ही नहीं था ,डरके मेरे केदारनाथ पागल बन कर पहुँच कर हाथ, पैर जा जोड़े। इस में मुझे यह बाये कि जीत किसी की है। सब एक दुसरे पर आरोप,प्रत्यारोप लगा रहे लोगों से, कोई यह पूछे कि उस अवधुत बैरागी को तुम्हारी हार-जीत कुछ भी ळेना देना नहीं था ,फिर जीत का मुखौटा तुम्हारे पल्ले बाँध दिया।आपेक्श!

खुलासा दरवाजा

खुलासा दर तो आजकल हर नहीं पर मिल जायगा परन्तु वाजा ढुंढे़ पर भी कहा नहीं मिलेगा।सभी सोचते हो गे ,यह वाजा कहाँ से आ गया।अब पढने से पहले इसका अर्थ खोजो,तो मैं आप के संग्यान के लिए लिख देती हूँ वाजा का मतलब मरना होता , ज्यादा कर यह स्त्री लिंक के लिये प्रयोग किया जाता है।आजकल यदि आंकलन कराया जाये तो विश्व में मौत की बहुत बडी़ जरूरत है , मैं यहाँ किसी के कत्लेआम की बात नहीं कर कहा हूँ। मैं आम जन मानस का ध्यान उस ओर आक्रशित कर कहा हूँ।. संसार में विधवाओं की संख्या बहुत हो गयी है, उनके कारण समाज में लड़ाई,झगड़े व चरित्र की समस्या आ खड़ी हो गयी है,ऐसा औरतों में ही नहीं,परूषों में भी लाया जाता है,देखने में तो यह छोटी ली लगती है लेकिन ैैहै बहुत विकराल।हर कोई उनको हेय दृष्िट से देखता है,भेड़-बकरियों की तरह ,उनका भकषन कर गन्दगी व कुड़े की तरह कही भी फेंकने की कोशिश में रहता है।इस समस्या का समाधान मनुष्य के बस की बात नहीं है,इसका इलाज़ भगवान ही कर सकता है।परन्तु पर विराम चिन्ह लगा या जा सकता है समाज के लोगों द्वारा,आपसी लड़ाई -झगड़े व कोई भी वस्तु उधार न लेकर।उधार लियी वस्तु जाने इन जाने में समय पर न वापिस करने का दुखद परिणाम का ही स्वरूप है यह समस्या,जो ज्यादा तर पिछले व आने वाले जन्मों का लेखा हो ता है।इस समस्या के २(दो) पक्के समाधान है ,जो आने वाले समय के लिए , इसको पुर्ण रूप से दूर किया जा सके।. एक किसी से उधार न ले, यदि लेना पड़े तो ,समय पर भुगतान करदे।दूसरा उपाय अप्रत्यक्श रूप में देना होता है जिसमें बहुदा लोग विश्वास नहीं कर के,लेकिन यह है हर मरज़ की दवा।जो आपक़े शरीर भंयकर लोगों कारण व मौत का दरवाजा खोले खड़ी है।इसका इलाज़ अपने पूर्वजों की भाँती ,पिण्डदान व तरपण करा कर निजात पाई जा सकती है।अन्यथा खुलासा दरवाजा, हमेशा ,दुखों के पहाड़ लिए मुँह बाये खड़ा,आपके अन्दर समाहित हो ने का इन्तजार कर कहा है।

एक झूठी समस्या

मैं पिछले पचीस वरषो से देश के लोगों को गुमराह करने वाले बन्द लिफाफे की कहानी की ओर हरियाणा के बासिन्दो का ध्यान केन्दिर्त करना चाहता हूँ।अभी हरियाणा में हर पाँच वर्ष में मनाया जाने वाली त्योहार आने वाली है ,जिसमें पागल खाने के खेल की तरह के खेल खेले जा़येगे।उन खेले में बढ़ चढ़ घोषणाये कि जायेगी।आपको इस बात का पुरा पुरा ध्यान रखना होगा अन्यथा आपको हार का सामने करना पडे़गा,और दोबरा लाटरी का टिकट पाँच वर्ष बाद मिलेगें,जी हाँ।. बन्द लिफाफे शुभ मूहरत करदू ताकि आप के सिर हो कहा दर्द खत्म हो जाये।बात दुनिया में जाने जा वाली नदी सतलुज की कहानी है जिसका अपना सत न हो, वह औरों में सत कहाँ से पैदा कर देगी। मैं अभी इसी लेख में इसकी खुलासा करूगा। सतलुज का अर्थ होता है जिसके शरीर,जुबान में सत न हो,या यू कहे कि झूठी या झूठा।यदि आप झूठ्ठे लोगो के पास उठते-बैठते,खाते-पिते हो तो समझो ,गये काम से।तो मैं पशि्चमी हरियाणा के लोगो की हकीकत बता दूँ।कि हरियाणा के मेहनती लोग इतने झूठ्ठे क्यों हो गये है।यह हादसा मेंरे साथ भी हूआ है तथा उस का इलाज़ ढूढते मुझे करीब तेतीस वर्ष बीत गये।आज जा कर मुल कारण मिला है।पहला झूठ्ठे शब्दों,दूसरा सच्च।होना चाहिय़े था पहला सच्च,दूसरा झूठ।यह अनादि काल की सच्चाई है।. अब,यदि कोई नेता आपको सतलुज का पानी सामने की बात करो तो उस नेता को शतपर्तिशत झूठी करार कर देना। क्यों कि सतलुज का पानी तो हरियाणा ही नहीं ,राजस्थान को भी मिलता हुये चालिस साल से ज्यादा समय हो लाया है। समस्या है सतलुज यमुना लिंक नहर के निर्माण की।क्योंकि पूर्वी हरियाणा में यमुना नदी का जल सिंचाई व दुसरे कार्यों में होता है।बैरानी व रेतीले श्छेतर के लिए आबन्टित था।दुसरा अहम सवाल यह हैकि कुछ लोगो तक झुठ समित क्यों न करे।सारे लोगो को झूठा ,करने की बजाय शपथ से कि झूठ को जड़ से खत्म करे। विश्वास के लोगो से इसी उम्मीद के साथ लेख को विराम देती हूँ ।लो की अपेक्शयों के साथ ,धन्यबाद।

हर व्यकि्त मुद्रा कोष का अध्यक्श

आप को विश्वास हो या न हो, मैं आप को ऐसी राय दूँगा किसी आप का ही नहीं ,पुरे भारत वर्ष का हर एक ऩागरिक अपने रुपये खुद बना लेगा।वह भी पुरे कानुन के दायरे में रह कर , न सरकार मना कर सकती।ऊपर से आपकी सहायता भी करेगी, तथा नकली नोटों का भय भी नहीं रहेगा।बस आप उस कानुन का सही तरीके व कड़ाई से पालन करना होगा।और उच्च वर्गीय सम्मानीय जीवन जी सकोगे।मैं पुरे भारत के लोगो की ओर से भारत के माननिय राष्ट्रपति से इस संदर्भ में शिक्श्या निति व मौद्रिक निति में ,मेरे संग्यान पर विचार कर , भारत के पर्तयेक नागरिक को समानित करे।. विध्यालयों ,व प्रोढ़ शिक्श्या केन्द्रो पर इसकी अच्छी तरह पढाई कराके,सही-तोर-तरीके से इसको अमल में लाया जाये।मैं आपकी उतस्कता ज्यादा देर नहीं रोक सकता, वह वस्तु है एक सरकारी कागज,जिस को ,आप , अपनी आवश्कता अनुसार ,जितने का नोटों चाहिय़े, उतना ही लिखकर,अपने दसखत , भारतीय रिजरव बैंक के राजपाल की कानुनी वैध्ता हासिल कर सकते है ।वह पेपर है ,बैंकों के माध़्यम से दिया जाने वाला चैक।आप उस कोरे कागज़ को जितने रूपये ,आपक़े पास जमा पूँजी के तौरपर, अपनी आवश्कता अनुसार लिखा सकते हो, कोई भी कानुन आप का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता,बशर्त कि पेपर बैंक से दिया गया सरकार व बैंक दवारा पर्माणित हो।उस सरकारी पेपर सरकार तो क्या ब्रम्हा भी झूठा साबित नहीं कर सकता। पूरे भारत के लोगो के सम्मान के प्रतीक लेख को भारत सरकार को समरपित।”चेक का प्रयोग , रूपयों के लेन-देन में करे।

सच्चाई के झूठ्ठे गवाह नही होते।

दर्द किसी का दोस्त नही होता।. नदी किसी की रिस्तेदार नहीं होती।. कर्म किसी का मोहताज़ नहीं होता।. सारी किसी का विश्वास नहीं होती।. बन्धन किसी की आजादी नहीं होती।. बेवफाई किसी की माँ नहीं होती।. आज किसी की दुश्मन नहीं होती।. लेख को झूठला नहीं सकता , सच्चाई चाहे कुछ भी हो।. आवाज कभी दबाई नहीं जा सकती।.

शक कभी मेहमान नहीं होता।. अभिलाषा और लाश नई जिन्दगी होती है।

आज तो हूँ मैं

आज तो हूँ मैं ,कल कहा हूँ गा पता नही बहारो को,रोयेगी कहानिया शब्दों में पिरो कर तेरे अहसानों के फसानों। मिलता नही जिन्दगी में लम्हें, समा लिये हवाओ ने।रोयेगा मन याद कर उनके दिए सबक को,ढूणढे नहीं मिलेगें, फिजा़ओ में।

क्या करना चाहिए

कुछ एसे दृश्य जिन्हे देकर अफशोस होता है क्यो करते है लोग ऐसे घृणित कर्म,जो उनके लिये दुःखो का पहाड़ बनकर टुट पड़े।ऐसा ही नजारा किरमारा गाँव में अक्सर देखने को मिलता है।सरकार से बहुत कठिनाई से पक्की करवाई गई गलियो की ईटें उखाड़ कर अपने घरों में लगा ली है तथा उनकी जगह कुडे़ करकट के ढेर लगा दिये है यह कार्य सरकार के सबसे ज्यादा चहते , लोगो का कार्य है क्यों सरकार ही ऐसे लोगो को बढावा देती है यदि सरकार गरीबो को किसी पर्कार की मदद न दे तो देश इसकी एवज में बिमारिया नही होगी।यदि आए दि जाने वाली सहायता ,गलियों में गड्डे होगे तथा उनमें गन्दी नालियों व वर्षा का पानी ठहरेगा।उनकी मौत कारक रोग फैलेगें,इसमें गाँव की पन्चायत का भी हाथ हो सकता । उनको रुपये बनाने के लिए हररोज पक्की गलियो के लिए सरकार को लिखा जाताहै।अनुशासनात्मक कार्यवांही यदि न कर सके तो, उस गाँव के विकास की सारी मदद बन्द कर दी जाये।

खट्टर क्या होता है

खट्टर शब्द का अर्थ सारा िदन मेहनत करमो वाला, परन्तु उसे यह नही मालूम िक वह मेहनत कर क््यों रहा है। इसी पर्कार का एक मनुष्य म्हारे हरियाणे भी रहता है क्या आप उसका नाम व पत्ता बता सकते हो।मै उसे बाहय तौर पर जानता हू,परन्तु वह औरो के लिये , इतना क््यों खट्टता है।. उसके परिवार ने, उसके इलावा कोई नही है,सारा दिन मशीन की भान्ति दुसरो के लिए काम करता रहता है। उसने कभी से जाना है कि जिसका कार्य किया,उसने खट्टर को बुरा भला क्यो कहा।भला करो तब भी बुरा कहते है क्या बेवकूफ आदमी है ,से ही ,इन बुरा लोगो की मदद कर दी।यदि मना कर दिया तो,ऐसे शब्द इस्तेमाल करेगे ,उनको सभ्य समाज के लोगो के लिए लिखा नही जा करता।अपनी राय खट्टर को अवश्य लिखिये।धन्यवाद।

Nice to Read

Decision to make the interest free loan to the needy has been announced by Bhartiya Janta Party government headed by Mr. N Modi,is a commendable thought to be implemented for down troden people of India.It can be proved poverty lifting program for the Indian population.If they utilised for the purpose ,they have shout the loan , will only fulfill their wishes.If they misuse it and transactions are not metted out to be equalised at the end of terms of loan and every citizen of Bharat to be a true customer of bank service.To materialize this , Bharat should be cashless, all the amount should be transferred to the other hand service provider. Then only , your government will success fully implement this scheme for the people.All the best regards and go head.

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