Main kaun hu

I am known as a human being named Sooraj Bhan Lohchab.A native hailing from Asean country known as India.I belong to a historical village of Hissar district in the ruling state of Haryana,the village is known as Kirmara related to the supra natural almighty called Lord Shiva. l am a graduate from Punjab University Chandigarh and a scholar from school board of education Haryana.By profession ,I Was a Airman and specialised in oral hygiene community of Dental Hygienist along with Medical Assistant, and goñe through a course of homeopathy.At present living as life of retired happy soilder,doing some writing job of thoughts.That can or not be useful for public.It my brief acknowledgements.Thanks for to know.

विध्यादान कन्याओं को

हमारे समाज में ,कहते तो है नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है ।लेकिन हकीकत इसको बिलकुल विपरीत हो ती है,नारी, औरतों ,लड़कियों तथा कन्याओं को हेय व नीच दृष्िट से देखा जा रहा है।उसे खाने-पिने की वस्तु या उपभोग की सामग्री समझा जाता है।आये दिन हो ने वाली घटनाओं में,स्त्री जाता की संख्या सबसे ज्यादा है , सभी वारदातों का तो उल्लेख तक नहीं हो ता है,शर्म के मेरे खबरें दबा जा जा ती है। उन्हीं को सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव झेलना पड़ता है।इसके रोचक पहलू पर यदि विचार किआ जाये तो ओरतें सबसे ज्यादा जिम्मेदार हो ती है।इसके निम्नलिखित कारण ध्यौतक है. कोई भी औरत अपने दम पर अपनी समस्याओं से लोहा नहीं देती है,वह किसी सहारे की तलाश में होती है तथा नही सहारे अधिकतर उसकी तबाही का कारण बनता है।वासना प्रेरित अपराध तो इतने नहीं है , मानसिक तौर पर समाज द्वारा कमजोर घौषित करना, इसका प्रमुख कारण है ।वह इन परिस्थितियों के कारण सदियों से टूटती आई है।और उन मानशिक व शारिरिक तौर पर कमजोर स्त्री कितने बच्चे मानशिक व शारिरिक तौर पर कमजोर व डरपोक पैदा हो ने,उनकी किसी भी समाज को जरूरत नहीं होती,। वह किसी प्रतीक से उनकी रक्श्या नहीं कर पायेगा।. अत: कन्याओं तथा लड़कियों की शिक्स्या पर ,खर्च जरूर करना चाहिय़े , चाहे वह कितनी ही मंहगी क्यों न हो।म्हारे हरियाणा में तो लडंकियों की पढ़ाई पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है।यह बात लड़ाई -झगड़े करने के ,अखबारों,थानों व कचहरियों तक ,फटाफट मानहानी के केस दर्द कर ले जाते है, पैसों और इज्जत का जनाजा,निकाल कर चुपचाप बैठे जाते है या अपनी किस्मत का लेना के तो है। लड़की पाँच-@चार पढ़ा दी ,चल अब तेरा ब्याह कर देगा,तू हमारे तो किसी काम की नहीं है ओर का घर बसाना,तो खर्च भी नहीं कर ले गा। ब्होत पढ़ा दी।च्यादा बोला तो देखता है यह फन्दा,लटका दूँगा।ये बातें व किसे आये दिन का लेखा है ,जोअभी तक ,अपने आप को पढा लिखा समाज रहता है में मौजूद है। कोई बच्ची किसी ने बचाई तो नहीं है , परन्तु उसे बचपन में ही ,बच्ची होते हुये ही ऐसे बच्ची या बच्चे की माँ बना दिया है,जिसे यह भी पता नहीं कि माँ होती क्या है। केवल माँ व बच्ची को लोगों का घर बना दिया है तथा जिसके घर ब्याही है ,उसको को दुनिया का सबसे बड़ा कंगाल बना दिया है क्यों कि बिमारियां तो उसके घर से ,इस जन्म में तो निकलनी असम्भव है,अगले का कर्ज तोड़ देगा। जिसके शरीर के अपने हिस्से ही नहीं बने हो , तो,मुझे बताओ कि जो बच्ची पैदा हो गा , उसके अंग पुरे कहाँ से हों गे। दो में के कुल में आनु वाँशिक अपगंता आये ही गी। इस लिये विवाह से जरूरी जीने के लिये ,ग्यान अपने बारे लेना,चाहिये,यदि विवाह करना है तो क्यों करना है ऐसी क्या जरूरत है कि शरीर के अहम हिस्सों को और स्वरूप प्रदान करना पड़ा, पड़ेगा व पड़ता है।मेरा निवेदन है हर समाज की कन्याओं व नारियों से अपने शरीर का दौहन पूरी परिपक्वता आने के बाद ही किया जाये, ताकि शरीर में कम से कम नुकसान हो व शारिरिक और मानशिक कष्टों बता जा सके ।

भूली यादें: राजघर

मैं ने था कि राजे राजमहलों में कहते है ,राजाओं के घर बहुत बड़े होते है। कइयों के तो कई कई गाँवों के समान एक राजा का महल होता है,परन्तु हम जिसका राज में रह रहे हैं ,उस में तो राजा नाम की कोई वस्तु तक नहीं दिखाई देती। किसी ने आजकल राजा की जगह अम अल ए तथा अम पी ने ले ली है।मैंने ,पूछा कि ने राज कहा करते है, वह मेरा अपमान करने वाले लहजे में ,बस कि ने इतनी भी पता नहीं, तु कहाँ का आदमी है।शर्मिन्दगी के अहसाहन तले दबा, मैं कुछ नहीं बोला।चेतन मन जागिरत हो ने पर,फिर पूछा कि ने कहते कहाँ पर है ,सब राजधानी में कहते है ,अच्छा बहुत अच्छा बात हो गयी ,मैले कुचले लोग भी राजधानी में रहने लग गये।मैने फीर पूछा ,”करते क्या है तड़ाक से बोला , लोगो के लिए कानुन व नियम बनाते है तथा उनकी पालन करवाते है।” अच्छा ये बता कि ने कानुन का पालन कभी किया है ,बोला मेरा क्या , मैं कानुन का पालन नहीं करता,फिर वे कानुन बनाते ही क्यों है। वह हमारे हर दिलाने के लिए नियम बनाते है,,।तु पालन भी नहीं कर का और नियम,कानून तेरे लिए।बोला, इस देश में ऐसा हो ता है हर सरकार में,।चल, यह तो बता ने वह राजधानी है कड़ै,कदै कदै हम भी घुम आया करेगें।दिल्ली री देश की राजधानी।आर म्हारे हरियाणा की चण्डीगढ़।मैं बोला तेरे ग्यान की तो दाद देना पड़ेगी।और यह बता तु पढ कितना रहा है ,फिर तड़ाक से जवाब म़ ए पास लु फस्ट डिविजन ।सरकार ने तेरे को नौकरी क्यों नहीं दी। सब बेईमानी व भर्ष्ट बैठे है।ना, कुछ न कुछ तेरे में कमी हो गयी ।सारे ,बैईमान व भर्ष्ट नहीं होते।मैं हट्टा हट्टा नौजवान तेरे को दिखाई नहीं देती क्या?तु तो मेरे भाई ,इन्टरव्यू और ईम्तिहान गलत दे आया । वह कैसे , हरियाणा की तो राजधानी आज बना ही नहीं है तथा न हरियाणा में राज है , भारत के २९ राज्यों में , हरियाणा के छोड़कर सभी की अलग अलग राजधानी है चाहे ,वह दो चार साल पहले ही क्यों न बना हो।तथा राजधानी के बिना राज राजे भी नहीं हो ता है।सब अपने घर की राहें ढूढते है , हरियाणा की राजधानी की राहें कोई नहीं ढूढ़ता।हरियाणे का राज सही करना है तो अलग हरियाणा अस्तितव में लाना हो गा। पाण्ुओं तथा चन्दरवन्शियों की राजधानी में विष्णुहरिवन्शियों की राजधानी नहीं हो सकती, सरकार के लिए ये शुभ संकेत नहीं है।

केन्द्र व राज्य सरकार के हित में लेख।

सावधान साहूकार

आज कल एक हौड़ मची ,हाय,पैसा, राय पैसा।साहूकार बैचारा कंगाल हुआ फिरता है।पैसा और रूप या सड़कों पर निलाम हूआ फिरता है।समय पर तो नहीं आया ,खाली खज़ाना निलाम हूआ फिरता है।पैटैम पर हो ती है,देरी का फरमान न कर।समय सही हुआ तो, रूप या लेने से इनकार न कर। रोज दिखावा कर का है पर, बेईमानी पर इतब़ार न कर।कर्मों की ना या मिल जायगा,अब औरों का इन्तजार न कर।paytm पर कर देगा, और झोली भरने का इन्तजार न कर।

तेरा दर

मैं ने सपने में भी नहीं सकता था कि तेरा दर इतनी ऊँच्चा हो गा।अब तुही बता भगवान कैसे अन्दर आऊ,और तेरा अपमान न मेंरे हाथों व पैरो से हो जाये।बहुत बार सोचा कि से भगवान इतने बड़े कैसे बन जाते है बस,मै तेरे सही विनती कर का हूँ कि जितना बड़ा तु बना है किसी गैर तौर तरीके से , मुझे नहीं बनाना।हर रोज दुनिया गाली देगी।देख क्या अज़ब तमाशा है दुनिया का।जाने को गाल नहीं ,पर गाली देती है कुछ बोले तो,तुझे बीच गाल में खड़ाकर देती है। कहाँ तक तुझे बचाऊ ये दोषी भगवान क्यों राह बीच में रोड़ा टेक दिया,क्यों न तेरी जेल कराऊ,कानुन के दोषी।जो भी पाठ पढाया तुने, मुकदमे बहुत हुय़े रह बैहोशी। जितने कर्म कराये तुने,सबके सब अवैध निकले।. अब तु बता कितना बड़ा बनाऊ तुझे कि पाँच सात एकड़ पर कब्जा न कर। मेरे हुये भुतों के तो घर नहीं हो तो,

कहाँ दि वार दिखाऊ कि वार न कर,समय आगया है जाने अब तु वार न कर। कहाँ सिर ,हाथ पैर तुड़ाऊ ,रहने का तु एतबार न कर।दूर खड़ा करना ,पास आने का अहसाहन न कर।

ऐसा लोग क्यों करते है

कुछ लोग संसार में ,ऐसे भी हो तो है जिसका शारिरिक वजूद तो होता है लेकिन स्वाभिमानी अस्तितव बिलकुल भी मौजूद नहीं हो ता है, वह दुनिया में टुटे पत्ते की तरह बिखरा पड़ा हो ता है।उस पत्ते को कोई उठाकर चल देती है या हवाओं के थपेड़े कही की कही फैक देते है सारी जिन्दगी इसी उठा-पटक में बि़त जाता है हाथ पल्ले कुछ भी नहीं लगती है।. आज कल सही हाल कर्नाटक व गोवा के विधायका हो ने जा रहा है किसी परिवार में केवल वाली अकेली या पुरूष अकेले का कोई वजूद नहीं हो ता है,उसी पर्कार एक देश एक पार्टी की सरकार का भी कुछ भी महत्व नहीं है।घर की औरतों या मर्द में से किसी एक की जरूरत न रहे तो ,वह परिवार बर्बाद हो जाता ।यही हाल, आने वाले जन्मों में भारतीय जनता पार्टी का हो ने वाली है क्यों कि उस काग्रेस रूपी बहू की जरूरत ही नहीं समझी।जबकी नरेन्द्र मोदी को अपनी निजात जिन्दगी से तुलना अवश्य करनी चाहिय़े थी। अपनी जिन्दगी की तरह ही, बी़ जे पी रूपी परिवार चलाने के लिए विरोधी पार्टी बहुत ही अहम रोल अदा करती।अब तुम किसी आधार पर अपना आंकलन करोगे।तुम्हें तुम्हारी किया बता ने वाला ही न रहा हो तो अपनी पार्टी के न्याय का मार्ग का से ढूढोगे।

प्रोत्साहन

आप के शब्दों की ना समझी ने , आपक़े अहसास की गर्मी ने,मु झे मानस बना या,लिखने को एक लु की बुँद का दामन दिया,तेरे लेख ने अहसास लिखा मेरे मन को ,दू मैं विचार किसे भाये तोलू ,राहें तोलू ,कुछ भी ना बोले, फिर भी सब कुछ बोलू।जी ऐ इनायत का सलाम. जिगर से,कही हवाओ की गन्ध से नफरत न हो जाने,तेरे अहसास को।लु ईस के अहसास को।

Test Fire

It is good news and occasion for the Indian public to see a party with overwhelming majority win in election and came into power in the government of India.Some time , earlier Congress party were also had come in the power in the central cabinet.It is not good thing for B.J.P.,When some one assumes office in such a huge back of population.Can they bear the load of expectations,the people have.If some one’s father is in power of ruling in some states of The ruling.You will through your father by hooks and crooks,and grab the power.Or to be asked the power of hierarchy will be sought. How you will deal with your father ,a son comes in power.His father should be killed by his son or due respect to be accorded.It is the same thing is applied on B.J.P..How the government of ruling B.J.P. alliance work and behave with the public opposite party ruling.I am not telling about leaders ,I am asking what type of behavior will be towards the public.whose have given mandate to both of the party members.Why you people shows your ugly face to them.Fighting there in house of Rules and laws.If you have the fighting capabilities ,you would have joined the Military, could have been a real fighter. And saved the national boundaries intact.Better join the Indian Navy ,where without killing any body ,you can be awarded abrave sailer in the nation.You fight there with tidal waves which are spoiling the national property and causing huge loss to human kind.

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