Kashmir issue is bad decision but Good Act.

Kashmir is Pain and sorrow prone state since beginning.The geographical conditions are very bad due to hilly and mountains region. The life on the hilly area , always depends others productions.Every thing brought from out side.The life of such area is always not stayable due to livelihood problem.

Division is a bad decision of government. Before Independence ,It was a independent riyasat.What was the necessity to get merger in the India.They were wanting a strong cover to protect their socio economic and physical security . Political security ,they were having at that time also.Now people of Leh and Ladakh will have extra burdon of texes due to burdon of a separate states will be incurred on the people of Leh and Ladakh.

Abolition 370 act is a nice decision for the people of Jammu and Kashmir .Now ,they may be relexed and will be thinking of a Bhartiya Nagrik. Now they will be part and parcel of Indian territory.Due to that artical , They wer deprived open air Independence citizenship of Bharat Varsh. The head of Bharat Mata has come back on her neck. Altimately a nice decision has come from Bharat Sarkar

अयोध्या का मामला गट्टर की गंदगी

यह धार्मिक पंथी ताकतों व बवालियों की भावनाओंके साथ छेड़ छाड़ का मामला नहीं है।जो जगह राम और दशरथ की हैं युगों से तब उस पर किसी का कब्जा कैसे हो सकता है , क्यों कि राम और दशरथ दो में ही विश्व विजेता थे।उनकी भी ना पर कैसे अतिकरमण हो सकता है, यह सब बेकार व भिखारी लोगों का दुनियाँ की आँखें में धूल झोकनें के सिवाय कुछ भी नहीं है । धर्मांध लोगों को भड़का कर ,उन्हें को मौत के हवाले कर दिया जाता है। तथा भिखारी उन मन्दिरों में बैठे कर जन भावनाओं के साथ खि लवाड़ करते है।यदि गट्टर के वाले को सा फ करना है तो किसी के पुछने की जरूरत कैसे आन पड़ी ।क्योंकि गन्दा वाले की बदबु व कजरा तो आसपास रहने वाले को बिमारी व मौत की शौगात लाता है। अतः इसे जितना जलदी हो सके सा फ कर तक देना चाहिय़े। राम व दशरथ तो अब ढुढे़ भी नहीं मिलेगें।अदालतों के फसलें तो युगों तक नहीं आते है वहाँ पर तो तारिखों पर तारिखों रख कर कैसे तमाये जाते है , दुनिया ऐसे ही मरती रहती के सिध्दांत पर काम करती नजर आती है। दूसरा अदालतों का कहा मानता कौन है फैसला आने पहले स्थगन आदेश का पालन करने का हूकम जा की हो जाता है।राम तेरे देश में जब तेरे माता -पिता ही तेरे नहीं हुये तो औरों से अपना होने की उम्मीद न कर । भारत अन्याय की भूमी थी व लगती है रहेगी भी। जब निर्दोष को बनवास हो सकता है वहाँ न्याय की राहें देखना ,अपने को राम की भाँती दण्डित करना है।

How Nature Reacts

Nature never excuse any one tor one ‘s blunder causing imbalance in it comes with ahavoc when someone distribution its synchronous pattern with five elements.Any thing causing even 1% disturbance in the Balance of natural phenomena.It results into some problem.At the initial stages, it is very difficult to trace Out the cause, by the time when results are known facts at that time it takes the shape of problem of masses.The masses problems are such bad habits where no one takes one ‘s responsibility of one,s misdeeds.Then nature shows its turmoiler and destructive mood ,comes with the boon of flood , earthquake, hurricane and losses of life and property.It better not to disturb balance of the natural processess.

Never Ask Two Things

Anyone never ask to anybody about one’s age and payment except the authority , where it is menditory to tell or write.In authority papers one cannot tell a lie,he escape himself to a victim of of lie. The lie is such bad habit , which spoil the whole life.It is a general tendency to show higher status of any body in front of someone. The individual never hesitate to tell a lie ,then it effect one’s carrier.

Second is age factor ,no one wanted to tell the correct age due to that he wants to be always look younger.It is a nice concept to be look like younger than yours age,One must maintain own body in such a fashion so he seems to be young.If one tells lie about the age ,it reflects bad consiquences on the health. That becomes a untraceable and undiagnosed conditions and diseases listed uncureable. It is the best habit , never tell a lie.But protect oneself, better not to ask these idiot knowledge which proves to be dangerous for life.

भिखारी और बाबा

आजकल भिखारी व बाबा लोग भी हाई टैक होगये हैं। मुझे बिलकुल भी समझ में नहीं आताकि लोग भिखारी बाबाऔ के पास क्यों जाते हैं। उनके पास जब अपना पेट भरने के लिए , उनकी कमाई का कुछ नहीं हो ता ।जो कुछ होता है औरों को बेवकूफ बना कर हेंठा हूआ होता है ,जो कुछ बातें वे आपक़े बारे में बता के हैं,वे सब बातों में उलझाकर आप से पुछ लेते हैं या आपक़े अड़ोसी- पड़ोसी से पता लगा लेते हैं। ओरतें व बच्चों का भाऊक बैलेक मैल करते है। जिस आदमी के पास देने को कुछ नहीं है, तुम्हीं से ही सब कुछ लेकर अपनी पूजा करवा कर, तुम्हीं ठगते हैं। यदि तुम किसी भी भगवान के पास जाते हो, माँगने के लिए तो ,उस भगवान को वापिस देने की जरूरत नहीं हो ती है। यदि तुम किसी भगवान को रुपये, धन व खाना -पिना देते हो तो, आप ,उस भगवान से बड़े हो तब भी आपको उसके पास जाने की आवश्कता नहीं,वह खुद चल कर तेरे पास आयेगा।अतः आप बेकार निक्कम़े लोगों के खाना-पिना,स्वयं भूख मरी का दण्ड न झेले। निक्कम़े लोगों को खाना खिलाने से , करोड़ों जन्मों तक के आपक़े भाग खराब होते हैं।आप स्वयं परख कर देखता सकते है ,दुसरे ही दिन तुम्हीं भोजन नसीब नहीं हो गा।

वर्षा क्यों होती है?

यह तथ्यों पर तोला जाये तो सब का एक ही जवाब होगा कि जब दिन की गर्मी के कारण पानी गर्मी हो कर ,उपर वाष्प के रूप में चला जाता है फिर वातावरण के बदलाव व तापमान में गिरावट के कारण वाष्प ठण्डी हो कर ,जब भारयुक्त हो जाती है तब वर्षा हो ती है। लेकिन यह सही कारण नहीं है।यदि एेसा हो ता तो हर रोज वर्षा होती। क्यों कि सूर्य की गर्मी तो हररोज बढ़ती है घटती नहीं है।दूसरी बात यह कि बादल वही एक जगह पर बरसता है व दुसरी जगह पर बिना बरसे गुजर कर कर तीसरे स्थान पर पानी फैंक देते हैं।जबकि तीनों स्थानों का तापमान समान हो ता है। वर्षा हो ने का कारण पौराणिक है। इन्द्र नाम का एक आदमी था जो पानी का रखरखाव करता था।आजकल उसे लोग इन्द्र देवता कहते है परन्तु उसके पास तापमान नहीं हो ता है।

एक समय मनु के पुत्र की मृत्यु हो गयी,उसके अन्तिम संस्कार के लिए शुध्द जल की आवश्कता थी । मनु का दूसरा पुत्र जल लेने इन्द्र के पास गया।इन्द्र हंकारी था , उसने कहा कि तुम कल फिर आऔगे,अत: तुम सब भाइयों का हिस्सा ले जाओ और अपनी जलांजली से सात दिन तक जल निचे फैंक दिया।जिससे जल प्रलय हो गयी।मनु पुत्र ब्याहा हुआ था तथा उसे वर कहते हैं इसी कारण इस जल का नाम वर्षा कहा जाने लगा। वर्षा का जल मृत्यु आत्माओं की तृप्ती व अगले जन्म के लिए दान किया जाता है क्यों कि वर्षा का जल पता हुआ व शुद्ध हो ता है।आजकल वर्षा इन्द्र के कोप के कारण होती है,इसका सही जवाब है । कोई भी गन्दी वस्तु नहीं लेती है।भूमी पर जो जल व्यापत है गन्दा ही है।अत: काले बादलों के जल को इन्द्र वापिस नहीं लेता है तथा उस जल को वापिस दण्ड स्वरूप जमीन पर डाल देता है,जिसके फल स्वरूप बाढ़ जैसी आपदायें आती है।इन्द्र देव केवल शुद्ध सफेद बादलों का जल ग्रहण करता है इस लिये सफेद बादल नहीं बरसते हैं। सफेद बादलों से कभी -कभी कुछ बुन्दे गिरती है,वही बुंदें आपक़े हिस्सों का शुद्ध जल है जो आपक़े पितरो द्वारा आपको दिया जाता है।जो प्राण वायु हवा में विचरण करती है,वही जल लाती व ले जाती है। वह समय ८४ लाख योनियों का श्राध्द समय हो ता है। जो अलग – अल़ग स्थानों व समय पर हो ता है। अतः हर स्थान पर एक समय पर वर्षा नहीं हो ती है।

मृत्यु की और

पढ़ कर कुछ अटपटा सा लगा,एक और पढ़े-लिखे व संभ्रात कहे जा रहे लोगों को करोड़ों युगों से मानव शरीर को डसने वाली योन रोगों की दर्दनाक व भयानक तस्वीर के आकड़े ,पढ़ कर बहुत दुख हुआ।करोड़ों युगों से मृत्यु का खोपनाक मंजर दिखाने वाले , रोगों को आज भी लोग राज योग की भाँती बड़े चाव से पहले लगा रहे है,तथा मानव शरीर को एक भयावह शक्ल पुनः प्रदान करने को समाज अग्रसर है।योन रोगों का हकीकत में कोई इलाज़ नहीं है लेकिन इस से अपनी इच्छा शक्ित से बता जा सकता है।नहीं तो राजे – महाराजों की तरह विनाश के कगार पर पहुँच जाओगे। इस में उच्च व निम्नलिखित वर्गीय के लोगों का समावेश हो ता है।उच्च वर्गीय के लोग अपनी काम पिपासा को शाँन्त करने के लिए अपने एक से अधिक ठिकानों का प्रयोग करते हैं।निम्न वर्गीय लोग काम पिपासा को खेल व भुख मिटाने के लिए करते है।इन रोगों से बचने के कारगर उपाय मनुष्य के स्वयं के हाथ में है। इसको लिए हमें मासाहार व मिर्च -मशालों से दूर रहना होगा। हमारे खाने-पिने में इसका बिलकुल भी प्रयोग न करें ताकि शरीर के अन्दर पाशविक काम वृति न पनप सके।हमेशा शाकाहारी व सात्विक भोजन का प्रयोग करें।हरियाणा में ,इन रोगों ने जो आंकड़े दरसाये हैं उनका प्रतिशत काफी ज्यादा है।अत: अपने बच्चों को समय रहते ,इन रोगों से दूर रखे व समाज को सुरक्सॅय़ा व स्वस्थ रखने का संकल्प ले।

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