कल के प्रश्न का उत्तर

हां , करोना का इलाज हर आदमी के पास है। बस , जरूरत है दृढ़ मनोइच्छा शक्तिकी। जो सारी ताकत मन में संजोकर, संकल्प करे कि मुझे कोई करोना नहीं है।न हो सकता है। हर वक्त उसे याद कर धिक्कारे। वह गलती से भी पास नहीं आयेगा।

अब मनुष्य भगवान से बड़ा

करोना के चलते मनुष्य व सरकार ने एक उपलब्धि हासिल कर ली है।अब वह रावण, चण्ड,मुण्ड व हरिणयक्शयप जैसे राक्षस बन गये है।खास बात यह देखने मे यह आई है कि हर सुबह शाम अपनी जान बचाने की मिन्नते जिस भगवान के आगे करता है। वही जब मन्दिर से बाहर आ जाता है तो मन्दिरपढ़ना जारी रखें “अब मनुष्य भगवान से बड़ा”

करो ना करो

करो ना करो लेकिन काम तो हर रोज की तरह करना पड़ेगा। करोना ,यदि काम नहीं करेंगे तो ,कार्य कैसे चलेगा। करो ना लोगों से बातें। करो ना गंदगी का फैलाव। करो ना आदेश का उल्लघंन करो ना सैर सपाटे। करो ना होटल में ठहराव। करो ना खूले मुंह विचरण।

दुनियां में देश,कल के प्रशन का जवाब

दुनियां में भारत ऐसा देश जहां के लोग कानून की बाध्यता की तरह गंदगी फैलाने को अपना कर्त्तव्य समझ, यहां वहां कचरे ढ़ेर लगा देते हैं। कुड़ा करकट कहीं भी डाल देते हैं। इसीलिए भारत को महान कहते हैं।

आकृति

छायांकन व चित्रण एक कठिन व दुर्लभ वस्तु स्थिति है। जो स्थिति आज है ,शायद वह किसी भी जन्म में दोफारा ना मिले। ऐसे अवसर आते बहुत हैं ,संजोकर रखने के लिये। परन्तु यह सब लोग अपने जहन में तो रख लेते हैं। ब्यां करने में भी कोताही नहीं रखते। लेकिन हर समय चित्रण करनेपढ़ना जारी रखें “आकृति”

कल पूछे सवाल का जवाब

कचरे का एण्डीज पर्वत अमेरिका के न्यूयोर्क शहर के प्रति दिन निकलने वाले कचरे से जनता है। वहा की आबादी बहुत ज्यादा सोने के कारण व कारखानों से निकलने वाले गंद से एक एण्डीज पर्वत के समान ऊंचाई बनाई जा सकती है। आज का सवाल :- दुनियां में ऐसा कौन सा देश है जहां कीपढ़ना जारी रखें “कल पूछे सवाल का जवाब”

पान गुटका सरकारी तोहफा

पानी व गुटका खाने से बिमारी व गंदगी फैलती है तो सरकारी तंत्र उसके निर्माण की इजाजत ही क्यों देता हैं। सारी फक्टरियां स्थाई तौर पर बंद करवा देनी चाहिए। इसमें सरकारी की गलत नीति व अज्ञान का जीता जागता उदाहरण है। पान व गुटका शरीर के लिये किसी प्रकार लाभदायक नहीं हैं। ये केवलपढ़ना जारी रखें “पान गुटका सरकारी तोहफा”

विकास की दौड़ का पिछड़ापन

आप को जान कर दुःख होगा कि हम इस विज्ञान के दौर में कितना पिछड़ते जा रहे हैं लगता यह है कि हम विकसित होते जा रहे हैं।हमारी अर्थव्यवस्था का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। सब कुछ खर्च करने के बाद भी।इसका सीधा सा मतलब है अर्थ व्यवस्था को विश्व स्तरीय न बना कर। केवलपढ़ना जारी रखें “विकास की दौड़ का पिछड़ापन”

करोना वायरस के प्रति रोकथाम

विश्व व्यापी आवाहन का असर ,भारत के जन मानस पर भी देखने को मिला।हर गांव व गली में गांव के खौफजदा लोग ,अपने मुंह पर रुमाल या किसी कपड़े नाक व मुंह ढके गांव के बाहर से आने वालों को रोक कर पूछ रहे थे। कहीं कहीं पर साबुन या किटाणुनाशक घोल से हाथ मुंहपढ़ना जारी रखें “करोना वायरस के प्रति रोकथाम”

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