Main kaun hu

I am known as a human being named Sooraj Bhan Lohchab.A native hailing from Asean country known as India.I belong to a historical village of Hissar district in the ruling state of Haryana,the village is known as Kirmara related to the supra natural almighty called Lord Shiva. l am a graduate from Punjab University Chandigarhपढ़ना जारी रखें “Main kaun hu”

विध्यादान कन्याओं को

हमारे समाज में ,कहते तो है नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है ।लेकिन हकीकत इसको बिलकुल विपरीत हो ती है,नारी, औरतों ,लड़कियों तथा कन्याओं को हेय व नीच दृष्िट से देखा जा रहा है।उसे खाने-पिने की वस्तु या उपभोग की सामग्री समझा जाता है।आये दिन हो ने वाली घटनाओं में,स्त्री जाता की संख्यापढ़ना जारी रखें “विध्यादान कन्याओं को”

भूली यादें: राजघर

मैं ने था कि राजे राजमहलों में कहते है ,राजाओं के घर बहुत बड़े होते है। कइयों के तो कई कई गाँवों के समान एक राजा का महल होता है,परन्तु हम जिसका राज में रह रहे हैं ,उस में तो राजा नाम की कोई वस्तु तक नहीं दिखाई देती। किसी ने आजकल राजा की जगहपढ़ना जारी रखें “भूली यादें: राजघर”

सावधान साहूकार

आज कल एक हौड़ मची ,हाय,पैसा, राय पैसा।साहूकार बैचारा कंगाल हुआ फिरता है।पैसा और रूप या सड़कों पर निलाम हूआ फिरता है।समय पर तो नहीं आया ,खाली खज़ाना निलाम हूआ फिरता है।पैटैम पर हो ती है,देरी का फरमान न कर।समय सही हुआ तो, रूप या लेने से इनकार न कर। रोज दिखावा कर का हैपढ़ना जारी रखें “सावधान साहूकार”

तेरा दर

मैं ने सपने में भी नहीं सकता था कि तेरा दर इतनी ऊँच्चा हो गा।अब तुही बता भगवान कैसे अन्दर आऊ,और तेरा अपमान न मेंरे हाथों व पैरो से हो जाये।बहुत बार सोचा कि से भगवान इतने बड़े कैसे बन जाते है बस,मै तेरे सही विनती कर का हूँ कि जितना बड़ा तु बना हैपढ़ना जारी रखें “तेरा दर”

ऐसा लोग क्यों करते है

कुछ लोग संसार में ,ऐसे भी हो तो है जिसका शारिरिक वजूद तो होता है लेकिन स्वाभिमानी अस्तितव बिलकुल भी मौजूद नहीं हो ता है, वह दुनिया में टुटे पत्ते की तरह बिखरा पड़ा हो ता है।उस पत्ते को कोई उठाकर चल देती है या हवाओं के थपेड़े कही की कही फैक देते है सारीपढ़ना जारी रखें “ऐसा लोग क्यों करते है”

प्रोत्साहन

आप के शब्दों की ना समझी ने , आपक़े अहसास की गर्मी ने,मु झे मानस बना या,लिखने को एक लु की बुँद का दामन दिया,तेरे लेख ने अहसास लिखा मेरे मन को ,दू मैं विचार किसे भाये तोलू ,राहें तोलू ,कुछ भी ना बोले, फिर भी सब कुछ बोलू।जी ऐ इनायत का सलाम. जिगर से,कहीपढ़ना जारी रखें “प्रोत्साहन”

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