मैं नंगी हूँतु ,।।

मैं नंगी हूँ क्या तेरे पास मेरा तन ढकने के लिए कुछ है,होतो इस माटी के शरीर को ढक दे।नहीं तो धूप वर्षा और आंनधी पुरेी क्या को चट कर जांय़्गी. । तेरे इस संसार में बेरहम लोग रहते है,किसी का दिया हुआ बदन,बेहयायी इस तरह नोच कर खा जाते है तथा नगीं करते चलेपढ़ना जारी रखें “मैं नंगी हूँतु ,।।”

Greed Leads To Chracterlessness

As the days progresses in in life ,and achild ‘s nature starts changing his/her habits as per the society. Let it be , the may not be able to stand oñ his feet and walk. Let his mother or father does not teach him,the way he or she behave in ackward manner.Parent are astonished ofपढ़ना जारी रखें “Greed Leads To Chracterlessness”

आग

आग लगाये तेरे बड़पन को ,सिखा नहीं तूनें जीना।जो चिज दिखाई देती है,वो पास नहीं तेरे ।किस बात में बड़ा बनती ,शर्म,हया नहीं पास में। आग लगा इस तन को ,सोना बन कर देख ज़रा। तोड़े से भी न टूटेगा हंकार तेरा।नंगे हो कर क्या मिलता है,माटी का ढेर हुये जा। काम नहीं आयेगा कामपढ़ना जारी रखें “आग”

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