Rothi Nigahe

क्या तू बता सकता है कि दर्द क्या हो ता है और मेरे दर्द का क्या ब्यानहै।समयके तगाजा इसे ले बैठाहै।सारी ओर बिखारी खाने-पिने बने बैठे है,जहाँ उनका पाँव पड़ता है,खाना-पीना खत्म हो जाता है।सारी दुनिया भूख प्यास से तडप- तड़प कर मर रहीहै।तु इसका कोइ समाा बता।यही चलता रहा तो जल पर्लय कारन सम्पुर्णपढ़ना जारी रखें “Rothi Nigahe”

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