हर आदमी व समाज को विकास की जरूरत होती है। उसके लिए वे हर प्रकार के प्रयास करते हैं। व्यक्तिगत तौर और सार्वजनिक तौर अपनी पूरी कोशिश करते हैं। विकास की दौड़ कभी सफल तो कभी विफल होता है। सरकार इसी कड़ी में मारुति कार की एक कम्पनी खरखोदा में लगवाने जा रही हैं। उसकी भूमि तो पहले ही ग्रहण कर ली है परन्तु अब बैटरी की कम्पनी के लिए भूमि अधिग्रहण करना है।

राज्य में कोई उद्योग लगाना, राज्य के लोगों को रोजगार के साधन मुहैया कराने के लिए यह आवश्यक भी है। हरियाणा में जमीन पहले ही कमी है पहले तो हरियाणा मरुभूमि के कारण परेशान रहा। लोगों ने हरियाणा की भूमि को उपजाऊ बनाने में बहुत कुछ बलिदान किया है। देश की भूखमरी हटाने बहुत बड़ा योगदान है। जमीन दान कर कर हर खेत तक पानी पहुंचाया गया है। अब जब किसान थोड़ी खुशहाली के नज़दीक पहुंच गया है तो कम्पनियों के लिए जमीन देने का कारण सामने समस्या बन कर खड़ा हो गया है। यह सब किसान को खाने को आतुर है।
अब यह सवाल सामने मुंह खोले खड़ा है दोनों में से एक को ही सही तौर पर विकसित किया जा सकता है। दूसरे को निगल जाऊंगा। अब हरियाणा सरकार को उचित निर्णय लेना पड़ेगा कि उद्योग धंधों को जमीन चाहिए या खेती के लिए। हरियाणा में किसान के पास भूमि नाम मात्र की बची है। वे उसमें बमुश्किल गुजारा करते हैं। भू माफिया ने भी किसान की भूमि औने पौने दाम पर खरीद ली है। जिसका बुरा असर मार्किट में बढ़ी महंगाई से साफ झलकता है। सारी भूमि कुछ बरसों में फैक्टरी व शोपिंग मॉल मालिकों के कब्जे में आ जायेगी। लोग पुराने ढर्रे पर चलने लग जायेंगे। साहूकार के गुलाम की तरह रहने को मजबूर हो जायेंगे।
अतः। सरकार को उद्योग देश के ऐसे भाग में लगाने चाहिए जहां बंजर भूमि है दूसरे राज्यों में ऐसी भूमि बहुतायत में उपलब्ध है। इससे वहां के गरीब लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। बंजर भूमि का सही इस्तेमाल होगा। खेती वाली जमीन बेमतलब के कार्यों में जाया न होगी। खेती व खेती आधारित उद्योग ही हरियाणा में किसान के हित में लगाये। ताकि किसानों व उनके वंशज को अपने काम को बढ़ावा देने के अच्छे अवसर प्राप्त हो सके। सरकार को यह भी करना चाहिए कि शहरी करण को रोक देना चाहिए। अब मकान बनाना तो दूर एक प्लाट लेने के लिए करोड़ों में रुपए चाहिए जो नामुमकिन होता जा रहा है।
गांव में अपने खेत की जमीं पर ही मकान बना सकते हैं। बनाने का खर्च भी करोड़ों में पहुंचा दिया है आमदनी के तौर पर महज १० से १५ हजार ही दिये जाते हैं। जिसमें खाने का भी पूरा नहीं पड़ता है। दूसरे खर्च अलग रह जाते हैं। अतः सरकार हरियाणा को खेती आधारित राज्य ही रहने दें। ताकि लोग अपना पेट तो ठीक ढंग से भर सके।
