
आजकल के दूषित वातावरण में हर प्राणी का जीना मुश्किल हो गया है। वातावरण में इतनी जहरीली गैस फैली हुई हैं कि हर जीव को आन्तरिक व बाहरी रोगों ने जकड़ लिया है। हर कहीं भी आपको ल्यूकोड्रमा जैसे बदरंग शरीर के साथ घुमते मनुष्य व अन्य प्राणी दिखाई दे जायेंगे।

इसका दूसरा कारण जलीय प्रदूषण है। आजकल आपको हर जगह सड़ रहा पानी अवलोकन में आता है। हर नदी,नाला जोहड़ व अन्य जल स्रोत गन्दगी से सरोबर पड़े हैं। सरकार इनकी सफाई व रखरखाव के लिए हर वर्ष अरबों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन डाक के तीन पात की तरह प्रदूषण नियंत्रण में नहीं आ रहा है। इसका कोई बड़ा कारण तो नहीं है परन्तु है बहुत ही गंभीर। यदि लिखते हैं तो बस यही श्रेय मिलता है कि सरकार के विरुद्ध है। परन्तु हकिकत में आज कल कोई विभाग सही से काम नहीं करता है।
काम केवल रुपए कमाने , बजट बढ़ाया जाता है रुपए हजम करने को। पीने के पानी तक की किल्लत चिखे मार रही है। पूरा रुपए नौकरशाह व विधायक और सांसद की जेब में जाते हैं । ठेकेदार को २% भी खर्च करने को नहीं मिलता है। खैर इसे छोड़ काम की बात कर ली जाये। हम जिस बिमारी की बात कर रहे हैं उसे मार भगाना है जैसे चुनाव में सत्तारूढ़ दल हरा कर भ्रष्ट तंत्र कर दिया जाता है उसी प्रकार हाईपरट्रोफाइड स्कीन नामक रोग हमारे खानपान में सुधार कर ठीक किया जा सकता है।
इसका मुख्य कारण शरीर में वसा की मात्रा कम होने से यह व्याधि देखने में आती है। शरीर में चिकनाई व पानी की कमी होने से जिस भाग पर दबाव अधिक पड़ता है वहां त्वचा इक्कठी हो जाती है वह दर्द करने के साथ भद्दी दिखाई देने लगा जाती है। चलने व काम धन्धा करने में कष्ट होने लगता है। इसका एक कारण चाय व मदिरा का अधिक सेवन भी है। आन्तरिक तौर पर जहरीली गैस व गन्दे पानी के प्रयोग से बहुत अधिक बढ़ रहे हैं।
इसका सबसे अच्छा इलाज तो बिना दवा खाए ही है कुछ शरीर की सफाई अच्छी तरह रगड़ कर करनी चाहिए। पैर हाथ की मृत चर्म निकाल दे फिर सरसों के तेल से मालिश करें। इन सबसे जरूरी आपके खाने में वसा यानि घी की मात्रा कभी कम नहीं होनी चाहिए। इससे शरीर के अन्दर वसा कम होने से चर्म व अस्थि के लोग निश्चित रूप से होते हैं। शरीर में साइनोवियल फल्यूड कम हो जाता है वह बनाना बंद कर देता है।
अतः पानी भरपूर मात्रा में लें। घी भी उचित मात्रा में अवश्य लें चाहें डाक्टर ने मना कर दिया हो। नहीं तो आपको विटामिन ए की दवा लेने को मजबूर होना पड़ेगा। घी में वही काम कर ना होता है। जितने रुपए डाक्टर की फीस व दवा में खर्च होंगे, उतने में घी आ जायेगा। यदि रोगी अधिक तंग करता है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
