संसद में पिछले दिनों एक विधेयक पारित किया गया है जो महिला आरक्षण के नाम पास किया गया है। इसमें महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।
यह विधेयक पूर्ण रूप से महिलाओं का उपहास बनाने के लिए लाया गया है तथा वोट की राजनीति के फल स्वरूप परिणामित है। चुनाव आने वाले हैं। आप देख लेना, महिलाओं को किसी भी पार्टी में ३३ प्रतिशत टिकट नहीं दिए जायेंगे।
इससे भी ग़लत तथ्य यह है कि महिला मनुष्य के शरीर का ५०प्रतिशत हिस्सा है तो महिलाओं को जब तक पचास प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा समाज में असंतुलन बढ़ता जाएगा जो समाज व देश दोनों के लिए घातक सिद्ध होगा।
प्रकृति व लिंग भेद संतुलन के लिए खतरनाक साबित अवश्य होगा। महिलाओं का उत्पिड़न होगा और बढ़ता जाएगा। इसके रोकथाम का सरकार की ओर से किसी प्रकार का प्रयास नहीं किया जायेगा।
इन सबसे भंयकर बात इस कानून के कारण होगी , वह यह है कि भारत में हिजड़ों की सरकार बनेगी व राजनीति होगी। देश विनाश के कागार पर पहुंच जायेगा। समाज में व्यभिचार अपने चरम पर पहुंच जायेगा।
तेंतीस प्रतिशत आरक्षण का साफ मतलब है कि भारत में ३३प्रतिशत आरक्षण नपुंसकों व हिजड़ों को दिया गया है। जो असंतुलन का द्योतक है।
यदि संतुलन की स्थिति लानी है तो ५० आरक्षण केवल महिलाओं को चाहिए। बाकी मनुष्य यानि पुरुष आरक्षण हो। नपुंसकों को किसी भी प्रकार से कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। समाज में सब तरह के असंतुलन के पुर्ण रुप से हिजड़े जिम्मेदार हैं।
देश के लोगों को देखना है कि आने वाले चुनावों में पचास प्रतिशत से ज़्यादा महिलाओं को जीता कर भेज कर अपना भला करे।
यदि पचास प्रतिशत टिकट महिलाओं को कोई पार्टी नहीं देती है तो महिलाएं आजाद उम्मीदवार के रुप चुनाव लड़कर जीत हासिल कर सकती है। यह तर्क संगत न्याय की गारंटी है।
