हरियाणा में सड़कों की हालात ऐसी बना दी है उसे मरम्मत करने की बजाय दोबारा बनाने की जरूरत हो गई हैं लेकिन न तो पी डब्लू डी और न ही मार्किट कमेटी को चिन्ता है चाहे लोग वहीकल पलट कर मर जाये । मरम्मत का रूपया अपनी जेबों में ठूंस ठूंस कर भर लिया है
सरकार की गैर जिम्मेदाराना आदतों के कारण अगले चुनावों में पक्की हार सुनिश्चित है मंहगाई ने लोगों कमर तोड़ दी है किसी भी वस्तु का दाम उठा कर देख लो नाजायज बढ़ोतरी हुई है भारत सरकार ने , लोग त्राही त्राही कर रहे है सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगती ।
आदमपुर के चुनाव में जनता के साथ खिलवाड़ किया है आदमपुर का चुनाव होना ही नहीं चाहिये था एक बार चुनाव होने के बाद पांच वर्ष बाद में चुनाव हो का कानून लेकर आये ,चाहे विधायक व सांसद मर जाये या अस्तीफा दे या राज्य सभा के लिये चुना जाये । उसका कार्यभार जिला आयुक्त देखे अगले आम चुनाव तक ।
संविधान में संसोधन तुरन्त प्रभाव से लेकर आये । इससे दल बदलूओ पर रोकथाम लगेगी सरकार व लोगों का करोड़ों रूपया बचेगा । यह आम जन के हित में होगा। लोगों के समग्र विकास के मार्ग खुलेगें। क्योकि जिला आयुक्त विधायक और सांसद की तरह भेदभाव नहीं कर सकते हैं लोगों के कार्य सुचारू रूप से होगें ।
नहीं तो अनूप धानक की तरह का नेता होगा जिसको अपनी जातिय व्यवस्था के सिवाय कुछ करने का दिल नहीं करता । यदि उसमें मनुष्य मात्र का अंश कही है तो एक बार नंगथला से किरमारा सड़क को देख ले , फिर से बनाने की उनकी व उनकी सरकार की हिम्मत नहीं है तो लोगों बता तो दे ताकि लोग सरकार के भरोसे न रहें
भारत सरकार से निवेदन है कि चुनाव आयोग के द्वारा विधायक क्षेत्र का पुनः निर्धारण करे ताकि दलित लोगों की गलत मानसिकता के कारण समाज में बिमारियों व कुरीतियों को रोका जा सके । सरकार द्वारा दी ग्रांट से विधायक की गरीबी दूर करने की राशी में तबदील न हो जाये।

