कोई नहीं जानता कि महाभारत का युद्ध किस किस की सेनाओं के बीच लड़ा गया था सब लोग कहते हैं कि कौरवों व पाण्डु पुत्रों के बीच लड़ा गया था लेकिन यह तथ्य बिल्कुल झूठ प्रमाणित करता है इसका मैं आपको लोगों द्वारा दि गई व्याख्या से साफ झलकता है। किताबों में लिखे तथा दूरदर्शन पर दिखाये गये दृश्य इसे सही मानने को कतई तैयार नहीं हैं
संजय नाम का योद्धा व राजा धृतराष्ट्र वहां जीवित हालत में दिखाये जाते हैं सारी युद्ध की गतिविधियों की जानकारी राजा धृतराष्ट्र द्वारा ली जाती थी।तो अब दुनियां वालों बताओं कि निर्दोष कौरवों को वैसे ही कलंकित व दोषी बताया जा रहा है। जबकि तिसरा पुत्र भी जीवित मौजूद था विदूर । कौरव तो नारी को कहा जाता है जो आज भी मौजूद मिलती है पंजाब में ।
लड़ाई पाण्डू के भूत व उसके पुत्रों तथा धृतराष्ट्र की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। दूसरा परमाण यह है कि दुर्योधन ने कृष्ण से उसकी अक्षोहणी सेना क्यों मांगनी पड़ती । जिससे साफ झलकता है कि राज भी पाण्डु पुत्र करते थे । इसके भी साफ परमाण आज दुनियां के महा पांच वीटो पावर का होना दिखाता । जो पाण्डु के पुत्रों के हिसाब व गुण्डागर्दी दिखाते हैं हर समय संसार को युद्ध भू मि में धकेलते रहते हैं जैसे अमेरिका आजकल अफगानिस्तान में कर रहा है
जो परमाणों में गंधारी व शुकनि के पिता का राज होता था। अतः सरकारों नें इतिहास के लेख ठीक करने चाहिये ताकि आगे आने वाले युद्ध रोक सके। तथा किसी भी कृष्ण ने पाण्डु पुत्रों का साथ नहीं देना चाहिये ताकि कौरवों के साथ हुये अन्याय का सही हल निकाला जा सके । तीसरा कारण पाण्डु जब पाण्डु ने विश्व विजय कर ली थी तो सारी धरती पर उसका राज था। हस्तिनापुर तो केवल धृतराष्ट्र ने अपने पुत्रों के लिये भिष्म से मांगी थी।जो भीष्म ने धृतराष्ट्र को दी थी।
लड़ाई का कारण था भीष्म ही। क्योकि शुकनि उससे अपनी बहन अंधे के साथ ब्याहणे के कारण तथा तीसरी बहन शिखण्डी भी भीष्म से ही बदला लेना चाहती थी। कौरवों को तो व्यर्थ में मौहरा बनाया गया था। क्योंकि वे शिखण्डी व शकुनी के भानजे थे। कुनती व मादरी कौरवों को राज देना नहीं चाहती थी।कृष्ण ने उनका साथ इसलिये दिया कि कुनती उसकी बुआ थी ।
