नाभि हमारे शरीर का अभिन्न व बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। जन्म से पूर्व सारा खाना पिना गर्भ में इसी से मिलता है। तब इसे नाल कहते हैं।जन्म के समय इसको काट दिया जाता है तथा नाल जेरज के साथ बाहर फैंक दिया जाता है।बाकि हिस्सा शरीर के अन्दर रह जाता है।यदि नाल को ठीक से न बांधा जाये तो वह लिंग की तरह बाहर रह जाती है जो देखने में अच्छी नहीं लगती व तकलीफ का कारण बनती है।
नाभि सरकने के निम्नलिखित कारण होते हैंः-1
1 पैर मुड़ना 2 कूदने से 3 ज्यादा चाय पिने से 4 आन्तरिक गर्मी बढ़ने से 5 लू लगने से
6 ज्यादा संमभोग करने से 7 करैम्प पड़ने से (बाटे पैरों में आने से) 8 ज्यादा बोझ उठाने से
9 गलत जन्म तिथि के आलेख से 10 मानसिक तनाव से 11 देर तक जागने से
12 शारीरिक कमजोरी से 13 गलत पोशचर से 14 टी वी व कम्पूटर ज्यादा देखने व इस्तेमाल करने से ।
इसके इलाज के तरीके बहुत ही आसान हैं जो मैं अगले लेख में लिखूगां । किसी की सहायता की जरूरत भी नहीं होती है । केवल जन्म तिथि के लेख को छोड़ कर। यदि आपकी जन्म तारीख गलत लिखि है तो यह लाइलाज बिमारी बन जाती है। जिसका इलाज बहुत कठीन है क्योंकि नाभि बार बार सरकेगी ही।
इसका स्टीक कारण ,आपके ग्रह व जन्म नक्षत्र है जो नाभि काटने के समय से भिन्न होने के कारण सौर कर्म में बाधा आती है। ग्रह व तारे बदलने से सिस्टम सही जगह पर नहीं रहता है नई सौर प्रणाली बनने से दूसरी जगह चली जाती है तथा एक क्रोनिक बिमारी का रूप धारण कर लेती है व भंयकर पीड़ादायक रोग हो जाती है ।
इस मामले में अनपढ लोग फायदे में रहते हैं उनको जन्म तारीख की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
