विदेशों की छोड़ ,भारत में करोना का खात्मा होना नामुमकिन है। भारत ऐसा देश जहां के लोग इस बिमारी को समाप्त न करके , कमाई का जरिया बना रहे हैं जब कोई चीज कमाई का रूप धारण कर लेती है तो उसको खत्म करना बहुत कठिन होता है।लोग हर रोज अपनी कमाई व रोजगार के लिये पूजा पाठ करते है , भगवान बेचारा बना दिया है, उनकी इच्छा पुरी करे या न करे, यदि इच्छा पूरी कर दे तो करोना आयेगा। यदि इच्छा पूरी न करी तो रोजगार में घाटा होगा।
बाहर निकल कर देखा जाये तो हर जगह नरक कुंड मिलते हैं।बि. जे.पी. की बजाय गन्दगी का साम्राज्य स्थापित है। सड़को का नामोनिशान मिट कर जोहड़ों का रूप ले लिया है, हर सड़क व गली कचरे के ढेरों से लबरेज हैं। लोगों की पहली पसंद गंद फैलाना , प्रथम स्थान पर आकर सरकार द्वारा सम्मानित होने के कागार पर जोर शौर से हल्ला बोल कर बिमारियां फैलाने में इनाम पाने की होड़ में है।
आने वाले कुछ दिनों में करोना के साथ मलेरिया जैसी दूसरी बिमारियां महामारी का रूप धारण करेगी। जल प्रदर के रोग बारिस के कारण होगें। फाईलेरिया जैसी बिमारी धान की फसल के कारण कोहराम मचायेगी।चिकनगुनिा व स्वाईन फ्लू मुर्गीखानों व सूअरपालन के घंधों से जान लेवा साबित होगा।अब सरकार बेचारी व लाचार बन गई है , बिमारी फैलाने वाले धंधों को बढ़ावा देकर।
यदि रोगों की रोग थाम करनी है , तो ये सब धंधे पूर्ण रूप से बैन करना ही होगा । तथा शाकाहार की सात्विक खेती को बढ़ावा देना ही होगा। अन्यथा आप परिणाम भोग ही रहे हैं।
