अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीने के सही सलीके के लिए ।अपने जीवन की आदतों में छूआछूत का का समावेश पूर्ण रूप से शख्ती के साथ अमल में लाना चाहिए।छूआ छात की आदत एक सामान्य व स्वस्थ जीवन जीने के लिए अनिवार्य अंग है। यदि इसका इस्तेमाल न करें तो भंयकर व लाइलाज रोगों का घर बन कर ,नरकमय जीवन ही जीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा।
जैसा करोना ने आपको करोना की बिमारी ने सोये दिमाग के लोगों को पुनः जगाने की कोशिश की है कि अछुत मनुष्य से दूर रहो , नहीं तो पूर्व की भांति तरह-तरह के जाति वादि रोग पूरे संसार में फैल जायेगें। जिनका इलाज सृष्टि का विनाश करने पर भी पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। जब मृत पर्याय सृष्टि दुःख से कहराने लगती है तो उसका जन्म उनके पूर्व जन्म के कर्मों के दण्ड के साथ उत्पन्न किये जाते है। जो महाभंयकर कष्टकारक जीवन जीने को बाध्य करते हैं।
अतः किसी भी जाति बंधन का उल्लघंन नहीं करना चाहिए। न मृत्यु काल तक किसी अन्य जाति का कर्म करना चाहिए। जातिगत सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत गृहस्थ आश्रम के नियमों का पालन कठोरता से करना चाहिए। अन्यथा निम्न जाति में विवाह आदि करने विभ्रंश के बच्चे पैदा होते हैं और उनमें जो जिनेटिक्स असंतुलन की बिमारियों होती है उनका कोई इलाज नहीं है। वह अनुवांशिक रोग बन जाता है।
इसके लिए एक जन्म जिस जाति का पूर्व जन्म का भार अधिभार निवृत्ति हेतु जो जन्म लिया है । मान सम्मान के साथ उस जाति के बंधनों के साथ जीवन व्यतीत कर अपने जीवन को रोग मुक्त व दोष मुक्त कर सकते हैं।
