हरियाणा रोडवेज में प्राइवेट बसों का परमिट बिल्कुल बंद हो सकता है तथा पुरानी बसों का संचालन आदेश पुर्ण रूप से समाप्त किया जा सकता है इसके लिए रोड़वेज के अधिकारियों व कर्मचारियों को एक काम करना होगा। वह उनकी यूनियन के नियमों के अनुसार ही है। जैसे की करो या मरो की नीति।
इसमें हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों को मरना पड़ेगा, जिन्दा रह कर । हर रोज की गलत भाषण बाजी गलत होती है। अब लोगों को बहकाने का आखिरी समय आ गया है । समय की परिक्षा में हरियाणा रोडवेज कर्मी पूर्ण रूप से असफल है। बीस साल में कुछ नहीं कर पाये तो आगे ,क्या करेंगे।
यह तो करोना की भल मनसी अच्छी निकली जो सारी बसें बंद करके दिखा दी। रोड़वेज कर्मचारियों ने करता किया। केवल अपनी प्राइवेट बसें खरीदी। और लोगों को बहका कर , अपनी बसें चला रहे हैं। लाखों बेरोजगारों के पेट पर लात मार दी। सरकार कहां से भर्ती निकाले। सारी वैकेंसी तो बसों के मालिकों ने खत्म कर दी।
अब इस समस्या का एक ही इलाज है वह है सारे रोड़वेज कर्मचारी अपनी बसों को कबाड़ में बेच दे। तभी उनके अखबारों में छपे छूठे भाषण सच हो सकते है।यदि चुनाव लड़ने के चक्कर में हो हल्ला कर रहे हैं तो साफ साफ बता दें कि रोड़वेज कर्मचारियों में से कोई चुनाव जीतने लायक नहीं हैं। न तब तक हो सकता जब तक, एक एक प्राइवेट बस कबाड़ न बिक जाते व दोबारा कभी न खरीदने की कसोटी पर खरे उतरे।
