हरियाणा में बर्षा ऋतु के पूर्व की बारीस ने दस्तक दे दी है जो खेती-बाड़ी के लिए उपयोगी है। कपास की अगेती फसल के लिए राम बाण बन कर बरसी है वर्षा। कई बिरानी खेती करने बालो के लिए लाभदायक हो सकती है यदि सही बीज का इस्तेमाल करें।
बाजरे की अगेती किस्म की फसल की बुवाई की जा सकती है। यदि आगे दो और ऐसे बारिस हो तो बिरानी बाजरा अच्छी पैदावार दे सकता है।मौसम व प्रकृति केे अवलोकन से कुछ ज्यादा बारिश के आसार दिखाई रहै। बाढ़ भी आ सकती है। किसानों को अपने खेतों में ,कम से कम लोग बिमार करने वाली फसलें बोनी चाहिए।
खाद और कीटनाशकों का प्रयोग बहुत ही कम मात्रा में करना चाहिए या बिल्कुल भी नहीं करें। ताकि जहर युक्त पैदा वार न हो। जिससे स्वयं व दुनियां को करोना जैसी असंख्य बिमारियों से बचाया जा सके। यदि पैदावार कम भी होंगी तो कुछ नहीं बिगड़ेगा।
यदि करोना जैसे रोग ,खाद्यान्न से पैदा होने लग गये तो सृष्टि का नाश हो जायेगा। लोग पहले ही सुअर ,कागें, कबूतर व मुर्गे को मार कर महामारी को पैदा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जैसे स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू आदि व मलेरिया जैसे गंदगी से फलने वाले रोग।
लोग कहते हैं व किताबों में लिखा है, डाक्टर लोग पढ़ाते हैं कि मलेरिया मच्छरों से फैलता है लेकिन यह बात पुरी सच नहीं है। मलेरिया , गंदगी से फैलता है जो लोगों ने जान बूझ कर फैलाई हुई है। यदि लोग गंदगी नहीं फैलाते तो मच्छर पैदा ही नहीं होते ।।
अतः समय रहते सम्भल जाओ, नहीं तो घर पर लगा ताला खोलने वाला भी नहीं बचेगा। अभी तो पांचवां ताला लगाया है सरकार ने। एक ताला ऐसा भी है, लगने के बाद खुलता नहीं है। अतः जीवन का मतलब समझ कर फसल पैदा करनी चाहिए। यदि आपको तकलीफ़ दे, वैसी चीज पैदा ही क्यों करें।
ध्यान रखिएगा , स्वास्थ्य वर्धक फ़सल ,पैदा करें। ज्यादा रूपये, दवाओ पर खर्च करना ना सिखिये। सारे रूपये दवा पर लगाओं गे तो वे खानी तुम्हें ही पड़ेगी।। किटनाशक रहित अन्न पैदा करें।
