कल शाम को दिन भर की गर्मी से निजात दल बादल व पवन देव के विकराल रूप ने दिलाई थी है मौसम हल्की बूंदाबांदी से खुश नुमा हो गया है कल शाम से ही बादलों की बारात बाजे गाजे के साथ आ जा रही है। क ई जगह ओलावृष्टि का नाच भी दिखाया। नई पोशाक पहने पवन देव काफी सुन्दर लग रहे थे। पूरी प्रकृति झूक झूक कर सलाम कर रही थी। वह कार्य क्रम आज भी चालू है। काफी अच्छा स्वागत हो रहा है ठण्डी हवाओं का। सूर्य देव अपने तेज में कमी कर पवन देव का हौसला बढ़ा रहे हैं। दामिनी देवी ने फोटो ग्राफी का कार्य बखुबी निभाया। पटाखे व आतिशबाजी स्वयं मेघदूत सम्भाल रहे थे। वसुंधरा ने पिछले रंग का छत्र भेंट किया था। उसके कुछ लम्हें मै ने निहारे, वह आपके के अवलोकन के लिए यंत्र बंद करता हूं। शायद मिडिया फिल्म आप लोगों के लिए नहीं है वह लोड ही होना नहीं चाहती। अतः आप पढ़कर ही अहसास किजीये। सभी का नशीब एक सा नहीं होता है।शिक्षक सभी को एक जैसा ज्ञान देने के लिए होता है और देता भी है लेकिन सभी उस ज्ञान को ग्रहण नहीं कर पाते हैं ,एक ही जगह पर एक साथ बैठकर कर , एक ही समय में लिये ज्ञान में बहुत अंतर मिलता है। जब ग्रहण कर्ता का वह ज्ञान हासिल न के योग होता है तो शिक्षक की बातें उसे सुनाई नहीं देती है। देखने वाली वस्तुओं पर उसका ध्यान ही नहीं रहता है । इसे ही किस्मत कहते हैं। सब-कुछ बताने व दिखाने पर भी ज्ञान से वंचित रह जाते हैं।
बाद में इल्जाम लगा दियै जाते हैं कि हम को तो पढाया ही नहीं गया।अपने लिए सहेज कर रखने के लिए निम्न दबाव स्थल का उपयोग करे।
