आजकल अस्पतालों में या बाहर मन्दिर,मसजिद ,गिरजाघर व गुरद्वारों में मानसिक परेशानियों वाले लोग बहुत ज्यादा है । क्या किसी ने जाना इसका मुल कारण । इसका मुख्य व अहम कारण है यह सदी जिसका मूल अंक 2 है यह कारण 2099 तक बरकरार रहेगी। केवल ज्योतिषय उपायों से मानसिक विक्षोभ कम कर सकते हो। उसका कारक चंद्रमां है जो मानसिक परेशानी देता है अपनी नादानियों के लिये विख्यात है। वह केवल एक दिन ही महीने में ठीक रख सकता है।बाकि उपाय आपको करने है। क्योंकि चंद्रमां खुद पूरे महीने रोग ग्रस्त रवै सै। कटता रवै सै। उसके पूजने से कोई इलाज नहीं हो सकता है। जो अपना इलाज नहीं कर सकता , वह दूसरों का इलाज कहां से करेगा।दूसरा कारण जल है अतः जल इसको और बढ़ा देता है।इसका कारक इन्द्र है। दोनों सम्मोहनी विध्या के ज्ञाता हैं। मन मस्तिष्क खराब कर वैश्यावृत्ति व वैश्यागामी बनाते हैं।जो यहां भंयकर रोग ,कष्टकारक व भविष्य के जन्म कुष्ट रोग कारक होते हैं।
पहले साधारण सा स्टीक उपाय बता दें, फिर कहानी बतायेगें। सूर्यदेव को जल दान करना चाहिए। लेकिन पानी के अन्दर पांव रख कर जलदान नहीं करना चाहिए। ताकि जल की अधिकता को कम कर सके। पानी की अधिकता से कैंसर जैसी जान लेवा बिमारी बहुत हो गई। जैसे – जैसे पानी की अधिकता बढ़ेगी कैंसर का रोग भी बढ़ेगा। यह भी प्रमाणित स्तरीय है। आज से ३० साल पहले कोई ढूढां , कैंसर का रोगी मिलता था। आज पानी की मात्रा बढ़ ने से , लाखों की संख्या में कैंसर रोगी हो गये हैं।कैंसर के रोग से बचने के लिये आग में जल दान सूर्यदेव को करना चाहिए। ध्यान रहे आग बुझनी नहीं चाहिए।
मानसिक तनाव के लिए मोती पहना चाहिए। वह पीले या गुलाबी रंग का हो। यह मनुष्य की जन्म कुंडली पर आधारित होगा की, किस रंग का पहनना चाहिए। आप आर्टिफिशियल मोती भी पहन सकते हैं। उनका प्रभाव भी उतना ही पड़ता है जितना की प्राकृतिक मोती का। आर्टिफिशियल मोती कोई भी पहन सकता है जबकि प्राकृतिक मोती समुद्र के किनारे बसे लोग , समुद्र से चारों ओर से घिरी भूमि के लोग पहन सकते हैं। इसका प्रमाणिक आधार है। पूजा करने के लिए लक्ष्मी, सिन्धु राज की पूजा की जा सकती है। क्योंकि यह जल आधारित व्याधि हैं। इसमें मैं अत्यंत महत्वपूर्ण बात बता दूं ताकि आपकी परेशानी दूर करने में कोई देरी व तकलीफ न हो। इसके लिए सस्ते से सस्ता मोती धारण करना चाहिए। मंहगा मोती अपराधियों की तकलीफ़ दूर करने को होता है और मिलता भी वहीं है जैसे मछवारों को।इस परेशानी का दूसरा कारण है इन्द्र देव।
अब इसके पिछे की कहानी बताते हैं। इन्द्र से एक बार मनु के एक पुत्र ने अपने पूर्वज के क्रियाक्रम के लिए जल का आवाहन किया तो इन्द्र ने सातों भाईयों का जल दें दिया ,जिससे जल प्रलय आ गई।फिर द्वापर युग में कृष्ण के कारण सात दिनों तक घनघोर वर्षा की ,फिर जल प्रलय आ गई। इन्द्र के पास जल नहीं बचा ।सारा जल कलयुग की भूमि पर आ गया। इन्द्र लोक जल विहिन हो गया । इसी प्रकार अलग काल व सृष्टि में व्याप्त जल , इन्द्र देव की गलती से ऊपर के बहुत से गृहों से गायब हो गया। इस पीड़ा से पीड़ित हैं ऊपर के गृहों के लोग। कुछ को तो तोड़ कर उल्का पिंडों में बदल दिया है। ताकि वहां की भूमि सही की जा सके।
चांद का टूकड़ों में धरातल दिखाई देना , उल्का पिंडों के भांति टूटे हुए भाग हैं।जो हर रोज घटते, बढ़ते रूप में दिखाई देता है केवल पूर्णिमा को ही पूरा दिखता है। जो कलयुग की भूमि से पानी वापिस लेने की एक क्रिया है। उल्का पिंड का प्रयोग,समुद्र का पानी वाष्पित करने के लिये किया जाता हैं। ज्वारभाटा भी इसी बात के कारण आते हैं। ताकि पानी गर्म कर ऊपर ले जा सके। आपने कभी-कभी महसूस किया होगा की रात दिन की बजाय ज्यादा गर्म होती हैं। उसमें बैचेनी बढ़ जाती है।इसका मतलब एक झील सूख गई। इसी प्रकार अपनी पिछली मूर्खता को इन्द्र व चन्द्र देव करते चले आ रहे हैं। अब जाकर अंग्रेजी काल चक्र के चन्द्र व इन्द्र देव को अपना पानी उठाने का समय मिला है। अतः पश्चमी देशों में समुद्री तुफानों की संख्या में वृद्धि होती जा रहीं हैं। जो एक अच्छा संकेत है भविष्य में यह गृह रहने लायक बन सके। अब तो यह जेल है राक्षक वृति के लोगों की।
हिन्दूओं को तो पहले ही मिल चुका है तथा 23 वर्ष ही बचे हैं मुसलमानों का अभी साढे 500 साल बचे हैं, समय आने में। उनके जल की स्थिति तुम छिमबी वाली जोहड़ी देख कर लगा सकते हो। तथा मुसलमानों के दयनीय चेहरे भी ,उसी के सामान नज़र आते हैं यह सब पूर्व जन्म के कृत्यों का जीता जागता प्रणाम है।हैं तो सभी के गन्दे, लेकिन संघनता का फरक सै । कोई भी अजमा कर देख सकता है। आंखो न के सामने हकीकत बिना लड़ाई , झगड़े के समझी व ठीक करने की कोशिश की जा सकती है।
परेशानी केवल उन्हीं को होगी जो उस काल व उस काल के लोगों से सम्बंध रखता होगा। व जन्म का उद्देश्य भूल गया होगा। इसी कारण से लोक तंत्रीय प्रणाली राज व्यवस्था में आई। अन्यथा राज व्यवस्था थी। इसमें सबसे पहले हिन्दू ओं की परे शानी खत्म होगी। लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं करना। धर्म परिवर्तन इस समस्या का हल नहीं है। वो परेशानी धर्म बदलने पर भी होंगी। आप अपनी जिम्मेदारी व समय के चक्र से भाग नहीं सकते हैं।आज बस इतना ही । जनता हित की बातें सुनकर डर जाती है। लेकिन डर का कई बार बहुत अच्छा नतीजा निकलता है ।
