नब्बे के दशक के बाद बेरोजगारी बढा़ने का एक सर्वोत्म उपाय बाजार में उपलब्ध है। करोना की बिमारी उसे वरदान के रुप में समाज के लोगो के लिए लायी है। यह वरदान अब प्राईवेट अस्पताल वालों के लिये धन लक्ष्मी का अवतार लेकर आया है। इससे आपको केवल काम धंधा ही नहीं मिलेगा। परन्तु आपकी जान जोखिम में डालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अब अस्पतालों में रोबोट काम करेगें , मनुष्य की जगह। डाक्टरों के वारे- न्यारे होगें। अब उनको रुपये लेने ही होगें, देने किसी को नहीं पड़ेगें। है न मजेदार बात। इससे सरकार को एक फायदा हो सकता है पुलिस की नोकरी में ज्यादा लोग भरती करने पड़ेगें, नहीं तो जो बरोजगारी रोबोट फैलायेगा , उसके फलस्वरुप चोर व डकैतों की संख्या बहुत बढ़ेगी।
दूसरा भारत के लोगों को पता है, यह होगा कि भारत में मृत्यु दर बढ़ जायेगी। इस भविष्यवाणी को गलत मत समझना। क्योंकि भारत के लोगों में किसी चीज को ठीक करने की बजाये खराब करने में महारत हासिल है।इसका जीता जागता परिणाम , भारत की तकनीकि कम्पनियां के उत्पादों को कितने प्रतिशत ठीक किया गया है। तकरीबन सारी कम्पनियां बन्द होने वाली है। सबका दिवाला निकल गया है या निकलने वादा है।
वे रास्ते तो रोजी रोटी तक थे, वे तो सरकार ने पहले ही वि आर एस से निगल गई । बाकि को करोना का का जायेगा।लोग रोजगार की जगह चोरी के धंधे करने लगेगें। केवल पुलिस ही एक डिपार्टमेंट होगा जो थोड़ा बहुत काम दिलायेगा। वह भी चोरी डकैती के डर के कारण, अन्यथा नहीं। देखते है मेरा दिव्य स्वपन कहां तक सच होगा। ज्योतिष झूठ जोती नहीं। यह मुझे साझा तो नहीं करना चाहिए था। परन्तु मेरी परेशानी तो अखबार ने समाप्त कर दी।यह मेरे एकले का मामला नहीं हैं।
लेकिन यह मशीन सीधे तौर पर जिन्दगी से जुड़ी हैं। इलाज पर होने वाले खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। मशीन खराब हो गई तो भारतीय कारीगरों को तो खराब करना है, सोर्टकट सब जानते है। तो और तकनीकि उत्पादों का हाल किया है, सब जानते हैं। अत: कारीगर भी विदेशी रखने होगें। देश के लोगों के सामने दो सोर्टकट आये हैं एक अकाल मृत्यु जो किसी की भी हो सकती है वस्तु स्थिति में आ जायेगा। दूसरा सोर्टकट है गुलामी का। जब भारतीय ठीक ढंग काम ही नहीं करते तो विदेशी कारीगर आयेगें तो एक दिन राज सता भी विदेशियों के साथ लगेगी।
