सबको इच्छा होती है आपने घर में रहने की। लेकिन नियती, समय ,नीति व राज यह होने नहीं देता।पता सबको पहले से होता कि जो घर या झोपड़ी का सहारा लिया जा रहा कितना फायदेमंद है चाहे अपना हो या किराये का। झोपड़ी तो मजदूर की होती है, मकान बना ,इतने रहने की।बाद में उनको तो दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है यदि बड़ी बड़ी भवन निर्माण इकाईयों की बात है तो। इसमें झोपड़ी तो हट जाती है बिना तकलीफ के। असली तकलीफ तो वह खड़ी कर दी, जो बहुमंजिला इमारत है।उसमें लोग रहते जरूर हैं, करोड़ो रुपये खर्च करके। लेकिन रहते हैं लोग तिसरे दर्जे की जेल से बदतर।
बिना किसी अपराध के बहुत धन गंवाने पर भी इतने भीड़ भड़ाके की जगह मिली जिसमे सांस तक लेने जगह भी ठीक से नहीं मिलती। खर्चों का औड़ नहीं उनमें। बहुत से तो इन खर्चों से तंग आकर ,आत्महत्या कर लेते हैं।उपर से इमारत का कोई भरोसा नहीं कब धराशाही हो जाये। कम्पनी की गलती बनाने में चाहे न हो। लेकिन जो खोखलापन जमीन में गंद निकालने के लिये किया गया है। वह उसे जमीन में धंसने को मजबूर कर देगा। नीचे सिवरेज का सही निसकासन न होने व बोझ से कारण इंगित है। पुन: निर्माण के लायक भूमि रहती नहीं हैं।
सरकार को अब तल पर बने मकान ही बनाने की इजाजत देनी चाहिए।। ताकि घर का स्वामी बन सके तथा करोना जैसी भयानक आपदा से बचा जा सके।बड़े बड़े शहरों की जगह , छोटे छोटे गांव बसाने की नीति अपनानी चाहिए।कल कारखाने भी ,एक जगह से हटा कर पूरे देश में फैला देने चाहिए ताकि वातावरण साफ किया था सके। कारखानों को तो एक जगह पर दो की इजाजत नहीं देनी चाहिए।कम से कम दूरी, दोनों के चारों और पचास किलो मीटर से कम नहीं हो।गांवों की आबादी एक हजार से ज्यादा न हो। दो गांवों की दूरी दो किलो मीटर से कम न हो। ताकि अमीर गरीब शकुन, चैन व स्वस्थ जीवन जी सके।
अमीरों का तो बहुत बुरा हाल है।इसलिये वे झूगी झोपड़ी तूड़वा देते हैं। वै रूपये की अंधी माया छुपाने के लिये व कही चोर चोरी न करले। तो सबसे ऊपर की मंजिल पर रहते हैं। ऊपर नीचे आने जाने का दंड बहुत भोगते है।उनकी समस्या कभी खत्म नही होती है। शायद हो भी नहीं। अमिरी का लालच , दुःख साथ लाती है। वो दुःख ऐसे सोते है उनका इलाज किसी वैद ,डाक्टर व भगवान के पास भी नहीं। राजा मिदास की तरह बहुत से लोगों को चैन से जीने के लिये अमीरी तजनी पड़ी है।
अत: घर अपना जितना हो सके ,छोटा रखे। ताकि , आप से देख भाल कर सके।बे मतलब में दुनियां की बिमारी व बोझ नहीं खिंचना चाहिए।स्वयं के घर से मानसिक बिमारी जड़ से खत्म हो सकती है। सबसे बड़ा कारण है परेशानी का घर ही है।अभी नहीं तो ,कभी न कभी ,करोना जैसी मजबूरी में ,यह नीति तो अमल में लानी पड़ेगी।
