कहां तक देखें व सुने केवल उतर एक ही मिलता है करोना के फैलने व जन्म की कहानी में।लोगों द्वारा फैलाई गंदगी के कारण।कितने ही शौध कर लेना किसी का असर नहीं होगा, केवल आपके द्वारा फैलाई गंदगी को जलानें के सिवाय।किसी सांईसदान की जरूरत नहीं। कि फलां बिमारी की दवा बनायेगा।हर जगह वह व देशों में पशु-पक्षी मार कर तो लोग खा लेते हैं उसके बचे अंगों के कचरे को यहां वहां फैक देते हैं, जिसके कारण हमेशा माहमारी फैलती है।सदिया नहीं युग तक बीत चुके हैं सृष्टियां करोड़ों बार उजड़ चुकी हैं लेकिन मनुष्य ढाक का तीन पात ही रहा।सुधरा नहीं, दण्ड भोगता रहा।
मरना गंवारा परन्तु अपनी फैलाई गंदगी समेटनें में कभी दिल चस्पी नहीं ली और करोना जैसी सकड़ों जख्मों को लेकर अगले जन्म की यात्रा पर निकल पड़े। आंख खुली तो उसी कुरड़ी के ढेर पर फिर जन्म ले लिआ,आदत और सबसे मन पसन्द जगह छोड़ कर मरे थे। फिर बस गये जन्म लेकर ।कितना बड़ा वैज्ञानिक हो या भगवान, मुर्गा मार कर पंख फैलाये हैं तो ,पंख तो ईक्कठे भी ,वैज्ञानिक व भगवान को ही करने पड़ेगें।करोना की चिन्ता छोड़, विषलें अंग बिखरायें हैं उनका समाधान करों।
गंदी वायु पर धारा 144 व लोकडाउन लागू नहीं होते हैं। बैगर वारंट के आपके शरीर के अन्दर जाने की इजाजत ,उसका जन्म सिद्ध अधिकार है। यदि यह अधिकार छिनने की कोशिश की तो प्राण -पखेरू ढूढे भी नहीं पायेगें। कहां गये।वह सातों दरवाजों के भीतर बैरोक-टोक जायेगी। मौत के सिवाय उसे कोई नहीं रोक सकता है। इस हाल में आपके पास एक ही विकल्प बचता है, वह है कि वायु का मान सम्मान करें, उसे गंदा होने से बचायें।ताकि वह गंदी होकर तुम्हें गंदा न करें।अतः सरकार को बुचड़खानों का सफाया करना चाहिये। ताकि स्वचछ वायु सांस लेने को मिल सके। मोदी सरकार नारे को ,हारा न कर। स्वच्छ भारत का निर्माण का नारा जो दिया है , उसे पूरा करें।
जितना खर्च दवाओं पर बर्बाद करोगें , उससे आधे में सफाई व कसाइखाने बंद हो सकते हैं जो बैवकूफी तीन महीनों तक मुफ्त में राशन देने की बात कही हैं वह सफाई के बदले में दिया जायेगा ,कह सकते थे, क्या कहेगें। पिछले सात वर्ष से जो भिखारी व मुफ्तखौर भारतीय जनता पार्टी ने पाले हैं साढे तीन व उससे कम में राशन देकर पाला है जिनकी आबादी देश में सतर करोड. से ज्यादा होगी। यदि उनके हाथ में उसी दिन एक झाड़ु पकड़ा दी होती तो भारत करोना के भय से दुबका न बैठ कर , सोने के सदृश चमकता होता। सम्भल जाओं अभी कुछ नहीं बिगड़ा है।जिस देश में सतर करोड़ लोग ,भिखारियों से बदतर स्थिति में पहुंच गये हैं।
नेता होने के नाते बी. जे. पी. या दूसरी पार्टियों के सर्वे में वोट बैंक तो आ गया , साथ में करोना नाम का दहेज लेकर आया है।अब विवाह करना बाकि हैा गंदगी के साथ या सफाई के साथ । मेरे सर्वे के मुताबिक सतर करोड़ लोग बि. जे . पी .के साथ है यह बात झूठ नहीं है। लेकिन नदी में जब बाढ़ आती है तो पानी का कुछ नहीं बिगड़ता लेकिन किनारा ,आपना अस्तित्व तक खो देता है और मिट्टी लाकर नदी का किनारा बनाना पड़ता है। फिर देखते है क्या न्याय मिलेगा।आगे क्या होता है व राजनैता कैसी राजनीति करते है।
