पिछली सदी के क्रिया कलापों के आधार पर इस वर्ष के अंत तक कऱोड़ों लोग प्रकृति के कोप का शिकार होगें। लेकिन इसमें डरने की कोई बात नहीं है। सौर मंडलीय घटना क्रम का साधारण सा कार्य है। जब कोई ग्रह रहने लायक नहीं रहता तो उसका शौधन करने के लिये, प्राकृतिक आपदाओं के रूप में उस गृह को तोड़ फोड़ कर रहने लायक बनाया जाता है।जान माल का नुकसान तो बहुत होगा। लेकिन जीने के लिये अच्छे ग्रह मिल जायेगें।फिर भी हमें डर व खौफ में रहने की जरूरत नहीं है। वह मौत स्वभाविक भी हो सकती है।
लोग मर तो करोना से रहें हैं लेकिन वे सब स्वभाविक मौत के रूप में हो रही हैं । करोना का तो नाम भी ऐसा है कि करो ना चिन्ता , मरना एक खेल है इस खेल में जीवन व मौत दो इनाम रखे है किसी जीत का उपहार पहला होता और किसी का दूसरा । यह एक ऐसा खेल है जिसको दोनों इनाम मिलते है।जीवन के बाद भी मौत व मौत के बाद बाद भी जीवन । इसमें हार किसी की नहीं होती है। बस नये तरीके से वही गेम खेलने चल पड.ते हैं।
करोना की इस घड़ी में , करो सब्र मिलने का । समय याद दिलायेगा आंसू क्यों प्यास बुझाते हैं।बाहें फैलाना छोड़ के हाथ जोड़े पाते हैं।समय ही एक ऐसा मिला जो हर जगह हर जख्म का न्याय देता मिलता हैं। करोना इन्तजार किसी का , अपने कर्म किये जा अपना। करोना तो नहीं करेगा कुछ, मरना दूर करेगा तू।छन कर सांसे आयेगी ले लेना एक कफन तू। करोना तो मर जायेगा , यह एक जतन करले तू।.,,
