आज के प्रदुषण भरे माहौल व रोगों की भ्रमार ने मास्क को सबसे अहम वस्तु का दर्जा दिला दिया है।हर बिमारी के रोगाणु होते हैं जीवित और मृत अवस्था में हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं । जरिय़ा वायु के माध्यम,स्पर्श और दवाओं के रूप में। दवाओं का तो यह फायदा कहा जाने लगा कि वे पहले से शरीर में मौजूद किटाणुओं का खात्मा करने के लिये होता है। जो सच है, जैसे दो दुश्मनों को लड़ाया जाता है उसी प्रकार जो ताकतवर होता है जीत जाता है। अतः शरीर के अन्दर के रोग कारक जिवाणुओं से ताकतवर जीवाणु वैक्सीन व सीरा के रूप में टीकाकरण द्वारा रोगों को ठीक किया जाता हैं।
अब मास्क का प्रयोग वायुजनित रोगों को रोकने के लिये किया जाने लगा है साथ में वायु प्रदुषण से बचने के लिये भी उपयोग में लाया जाता है। करना भी चाहिये ताकि सांस की बिमारियों से बचाव हो सके।मास्क कई प्रकार के आते हैं। सस्ते मंहगे का भी फऱक होता है।लेकिन मास्क का परतदार होना खतरनाक होता है। इसमें जिवाणु परतों में छुप कर रोग फैलाने का कारण बनते हैं। जिसमें डाक्टर व सफाई करने वाले सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। कोई भी , हर पांच दस मिनट में मास्क नहीं बदल सकता है।प्रयोग करो व फैक दो या जला दो ,मंहगा सौदा होगा। तीन लेयर को यदि दो तीन मरीजों पर देखने के लिये इस्तेमाल करोगे तो उसमें परतों के मध्य में जिवाणु पैदा होगे। वह भी बहु मिश्रितजिवाणु जो डाक्टर व पारा मेडिकल सदस्य को संक्रमित करते है यह तो संक्रमण होगा ही होगा।यदि हर मरीज को चैक करने लिये लगाया मास्क रोगाणु मुक्त नहीं किया गया तो।
इसलिये मेरा अनुरोध है कि केवल एक परत वाले मास्क का प्रयोग करें। जो मास्क उपयोग में ले ,उसे जिवाणु नाशक घोल में जिवाणु मुक्त कर ले।मंहगी दवायें या वस्तुयें बिमारी नहीं रोकती है।बिमारी रोकती है सही दवा व सही वस्तु का सही इस्तेमाल। हर जगह उपलब्ध सामान का ही उपयोग करे। ताकि आपकी जेब पर भारी न पड़े।स्पर्धा के युग में बड़े-बड़े क्रय- विक्रय केन्द्र मौजूद है, आप उनका फायदा उठा सकते हैं। व्यापक स्तर पर उपलब्ध भंडार का विवरण निम्नप्रेषित है।
