लोग सोचते क्या हैं करते क्या हैं। यदि यह देख लिया जाये और उसके पिछे छिपी भयानक व खौफनाक मानसिकता,उन लोगों की तरह, यदि सभी करने लग जाये तो यह दुनिया समाप्त होते देर नहीं लगेगी। करोना तो इसके सामने तुछ है। मैंने एक दो आदमियों से बात की, करोना के विषय में। बोले,” करोना वरोना कुछ नहीं होता”। लोग स्वास्थ्य के प्रति कितने लापरवाह हैं आप सोच भी नहीं सकते।यह नज़ारा देखिए तो आप खुद समझ जाएंगे।
करोना का संसार
अब आप बताइए, ऐसी दुनिया बनाने वालों के लिए कुछ करने की जरूरत रहती है। पता नहीं, क्यों सरकार व समाज सेवी संस्थाएं उन लोगों के लिए ,इतना रूपया खर्च करके ,अपनी जान जोखिम में डालते हैं ।ढाक के तीन पात। स्थिति में सुधार न करने देने की , और न होने देने की रुपरेखा को बखुबी अंजाम दिया गया है। यह हकीकत है। इसके जहरीले गंदे पानी से अन्न पैदा कर , लोगों के लिए ,करोना वायरस जैसे मौत के फरीस्ते वाली गेंहू , सब्जियां व पशुओं के लिए चारा पैदा किये जाते हैं। अब कौन सा भगवान या सरकार है जो इस धंधे को रोक पायेंगे।
यह सब करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद का हाल है। जब एक रुपए भी खर्च नहीं किया जाता था तब यह जगह राजस्थान के मरुस्थल के साफ सुथरे पानी के सोता के समान थी जिसकी हर साल सफाई लोग कर लेते थे।वे लोग अब जिन्दा नहीं रहे। सब सरकार जब रुपए देगी, कुछ करवा देंगे।बाकि जेब में। अब ये सरकार से ग्रांट लेने के सेम्पल के तौर पर सहेज कर रखे जा रहे हैं।
अब बताइए क्या करोना वायरस को रोकने का प्रबंध करने चाहिए।
