आज कल किसी भी जगह , स्थान,पत्थर पत्रिका अखबार , दूरदर्शन जहां कहीं देखो ,सुनो ,केवल एक ही समाचार सुर्खियों में मिलता है करोड़ों वायरस । दोस्तो यह आया कहां से।यह अकेला नहीं है , इसके साथ इसके दोस्त वायरस है जो अपना लोहा मनवा चुके हैं। और अपनी जीत मौत के मुंह में मनुष्य को धकेल कर पूरी कर चुके हैं। कितने ही चिकित्सा के प्रबंध कर लिये जाए, हार मनुष्य की ही होती हैं। छः सात फुट के आदमी को नंगी आँखो से न दिखने वाले जीव को चुटकियो मे मौत की नीद सुवाया है। उसके सामने अहंकारी मनुष्य लाचार व बेबस है।ज़ब किसी को निगल देता है तो उसके रिश्तेदार व नाति ,अपनी पहलवानी सरकारी व प्राइवेट सामान तोड़ फौड़ कर दिखावे है। ह नी अजीब इतफाक।
कसूर किसी का, सजा किसी और को।क्या आपने सोचा है कभी । इसके असली जिम्मेदार कौन है यदि पता लग जाये तो आप क्या करेगे। अपनी पहली गलती सुधार लोगे या फिर एक नई माहमारी को जन्म दोगे। मैं आपको बताता चलू कि जो नीति सरकार ने कचरा प्रबंधन मे बनाई है उसी का खौफनाक मंजर है यह,जिसका लोगो ने रूपयों के लालच मे किया। कुछ महीने पहले, मैने सरकार व लोगो को आगाह किया था कि जो कचरा व मैला हमारे दैनिक कार्यकलापों से निकलता है उससे केंचवा व जैविक खाद न बनाये। लोग पैसों की हवस मे कभी नहीं सुनते। और हरजाना भोगते है।यही हाल हो रहा है।
आप के ज्ञान हितार्थ बता दू कि यदि आपको कोए गंदगी खाने को दे तो क्या तुम लोगे, जाहिर जवाब होगया ना। फिर दूसरा कोई क्यों लेगा। जाहे धरती ही हो। धरती ने अपने अंदर गंदगी कभी नहीं रखी।उसने ज्वालामुखी बन कर आग गंदगी फैलाने वालों पर वापस लौटा देती है।वहीं हाल जैविक खाद का मामला है। लोगों तो यह पता नहीं है कि जैविक का अर्थ वायरस वह बैटरियां ही होता है।जो रोगों का कारण है। यदि तुम पेड़ पौधों व फसलौ को रोग फैलाने वाले तत्व दोगे तो तुमहे वे तुम्हारी मेहनत बहुत बड़ा उपहार दे गी। बहुत सारी लाइलाज बिमारियों के रुप मे। यह प्रकृति का नियम है कैसे को तैसा।
करोनावायरस जैसे अनेक वायरस है जो हर रोज लाखों लोगों को डस लेते है।दवाई एक सांतवना है ईलाज नहीं। ईलाज चाहिए तो रुपये रूपी राक्षस का साथ छोड़ कर ,उसे समूल विनाश के कागार पर ,केवल आग लगा कर ही ,इन भंयकर कष्टदायक रोगों से छूटकारा मिल सकता है बाकि तुम्हारी मर्जी। जिसका मतलब मरना होता है। मर जी, जी का अर्थ जीव जिसमें सबसे पहले मनुष्य का नंबर आया है।
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