बचाव का हस्तक्षेप जब हो गया है तो उसका चाव ,मन में होना चाहिए।यदि चाव नहीं होगा तो बच पाना ना मुमकिन है।जब काल दूत पैदा कर दिया है तो पूरी फौज की तरफ किले बंदी कर के ही खत्म या काबू में किया जा सकता है। ये सब रावण व कंश जैसे राक्षसों से कहीं ज्यादा खतरनाक होते हैं। जिन्हें मारने को राम व कृष्ण जन्म लेते हैं। देश व विश्व को एक पूरी मुस्तैद सेना चाहिए जो केवल रोगों को फैलाने के कारण की उत्पति का नाश कर सके।
नाश तब कर सकते है जब कारण का पता हो।बगैर पते के चिठ्ठी नहीं पहुंच सकती, उसी प्रकार बिना कारण जाने वायरस का नाश सम्भव नहीं।अब यह पता होना चाहिए यह पैदा क्यों होता तथा कहां जन्म होता। यह सिलन भरे गंदे स्थानों पर तथा समय पर निदान न हो।खड़े गंदे पानी , उसका प्रयोग खेती बाड़ी में उपयोग से। सड़े पदार्थ खाने वाले पशुऔं व अन्य जीवों के माध्यम से पैदा होता व फैलता है। जो हमारे आस पास या पालतू होते हैं। सूअर ,मुर्गे,कुत्ते व बिल्ली। सभी माशाहारी जानवर।और बायो लोजिकल अवशेष व उससे निर्मित खाद के कारण।
पेड़- पौधों में ,मनुष्य शरीर की तरह रोग प्रतिरोधी क्षमता होती है। लेकिन उसकी एक सीमा होती है। उसके बाद व लगातार गर्शित वातावरण व पदार्थ का सेवन ,रोग उत्पति का घर बन जाता है। शरीर की तरह के बदलाव फसलों व फलों में देखने को मिलता। फसलों पर इसका दुश्प्रभाव इतना घातक होता हैं कि उसका प्रयोग आदमी करता है तो मनुष्य भगवान को प्यारा हो जाता। नहीं तो कैंसर जैसे रोगों का घर बन जाता है।
संसार की नगरपालिकाओं की फौज ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा से कार्य करे।सारे कचरे को जला कर राख करके ही छुटकारा दिलाया जा सकता है।सांस लेना आवश्यक होता हैं।यदि वायु गंदी होगी तो स्थिती नाजुक होगी। डाक्टर व अस्पताल के लोग बिमारी फैलाने का कारण भी बन सकते हैं। क्योंकि उनके पास रोगी बहुत आने के कारण कैरियर बन सकते हैं। आओ इस आपदा को सब मिल कर झड़ से उखाड़ फैकें।
