लोग पागल व झगड़े पर उतारू क्यों होते है इसकी कारण ज्यादातर ही नहीं बहुदा बार किसी दुरात्मा के स्पर्श का खाना खाने से होता है। यह कर्म ज्यादातर सेवड़े बाबा या तांन्त्रिक लोगों के टोटकों के कारण होता है। तथा सारी उम्र दँड भोगने के शिवाय कुछ चारा लोगों नहीं चलता है। वह उनके चक्करों में इस कदर फंस जाता व जाती है। केवल व केवल नरक के शिवाय कुछ नसीब नहीं होता है।
यदि इस नर्क से निकलना है तो केवल स्वयं के इलावा किसी की भी मदद दु ख दायी होगी। पता नहीं कितनी दुनिया के बुरे कर्मों से गुजरना पड़ेगा। परन्तु इसके अलग कोई चारा नहीं है। यदि आप किसी भगवान के सारे ये दुःख काटने के चक्कर में है तो वहां पर भी यही यातनायें भोगनी पड़ती है। जिस भगवान की पूजा करोगे ,उसके पितरों की भांति पिंड दान तक करने पड़ते है।अतः बाबे आदि राक्स्सों के लिये करने से अच्छा है अपने सगे सम्बन्धियों के पिंड दान से ये लडा़ई -झगड़े व पागलपन बन्द हो सकता है।
सर्त तो नहीं लेकिन पिंड दान करने के हर धर्म व महजब के स्थान निर्धारित होते है अतःवही पर पिंड दान करना चाहिये। वहां पर बने जल सरोवर में स्नान नहीं करना चाहिये।वह स्थान केवल ब्रम्हा के स्नान के लिये होता है।यदि आपने पिंड दान से पहले या बाद में सरोवर के जलमें स्नान कर लिया तो आपको कष्ट कम होने की बजाय बढ़ जाते है।लोग कहते फिरते है पिंड दान करने पर भी कष्ट कम नहीं हुये । अतः कोई घूमने ,देख ने किसी भी पिंड दान स्थल स्नान न करे।जाहे बामण कहता रहे। क्योंकि बामण ज्यादातर तो अनभिग होते हैं कुछ तांत्रिक किसम के बामण लोगों के बाबों की तरह फसाते व जलते बनते हैं।
औरतों को तो किसी भी किमत पर वहां पर नहाना नहीं चाहिये। लोगों को सचेत करने का आखरी लेख ।
